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  • कौन सी बात लिखूँ

    कौन सी बात लिखूँ

    कौन सी शाम की बात लिखूँ हुई थी या नहीं वोह मुलाक़ात लिखूँ ढलते हुए शाम के साये में उभरते हुए जज़्बात लिखूँ अँधेरे खड़े थे लेकर रातों का सहारा लड़खड़ाते कदमों से कैसे लिखूँ बंध...

  • नज़र से

    नज़र से

    मिल गयी आज मेरी नजरे उनकी नजर से जब जा रही थी वो अपनी गलियों में होके बेखबर से हमने अपनी मोहबत का इज़हार ना किया बस इसी डर से ऐसा ना हो कही गिर जाऊ...

  • साधना है….

    साधना है….

    आज मुझसे मेरा ही सामना है इसलिए मन थोडा अनमना है हर झगड़े की यही है एक जड़ सभी को एक दूसरे से  घृणा है इस हार को भी तुम जीत मानो दुश्मनों से भला क्या...

  • जो खुद है बेवफ़ा

    जो खुद है बेवफ़ा

    हमारे आशियानों में अपना घर रखेंगे, सच में वो आसमानों में पर रखेंगे? रख के मेरे कदमों के नीचे काँटे वो मेरे कंधे पे अपना सर रखेंगे कर के लहूलुहान मेरे जज़्बातों को अपने ही हाथों...

  • पाप का घड़ा..

    पाप का घड़ा..

    कोई नहीं समझा वो किसके सहारे पड़ा है , लोग यह समझ बैठे कि वो सबसे बड़ा है सच बोलने की कोई सीमा नहीं है और झूठ पकड़ना भी इक कला है, मैंने सुना है शैतान...

  • गांधीवाद

    गांधीवाद

    कायर नहीं वो लोग जिन्होंने हथियार उठाया है, किसी ने किया होगा उन्हें मजबूर जो उन्होंने ऐसा अभीयान चलाया है, कब तक चलते रहेंगे हम गांधी के बनाये हुए उसूलो पर, आखिर हमे अपना प्राण गांव...

  • आवाज रुक जाती है

    आवाज रुक जाती है

    अक्शर मेरे गुलाब लगाते ही आपके बालो़े में, आपकी आँखे मुसर्रत से मुझे देख कर झुक जाती है, ना जाने आज मैं क्या बात कहने वाला हूँ, जो ज़बान खुश्क है और आवाज़ रुक जाती है....

  • आज सब अकेल है

    आज सब अकेल है

    मेरे हर एक दर्द पे बदनामियों का जमघट है हर एक मोड़ पे रुसवाइयों के मेले हैं न दोस्ती, न रिश्ते न दिलबरी, न अपने किसी का कोई नहीं आज सब अकेले हैं परिचय - अखिलेश...


  • बेवफा से वफ़ा

    बेवफा से वफ़ा

    मिट्टी भी जमा की, और खिलौने भी बना कर देखे… ज़िन्दगी कभी न मुस्कुराई फिर बचपन की तरह… ……… जीते है कुछ लोग इस तरह, मरकर भी अपना असर छोड़ जाते है पा लेते है मंजिल...