कविता

कविता : ज़िंदगी 

एक उड़ते पंछी की तरहा तन्हा पानी की लहरों जैसी हलचल वाली बहती हवा जैसी मस्त तूफानो जैसी हिम्मत वाली खाई में गिरते पत्थरों जैसी मगर कभी कभी ये ज़िंदगी मज़बूत हो कर भी बिखर जाती है तूफानी हो कर भी थम जाती है लहरों जैसी हो कर भी रूक जाती है मगर ये मत […]

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कविता : एक ऑटो

एक आॅटो टूटा फूटा सा जो जोर से आवाज करता है ना कोई तेजी न कोई ताकत है रोज हजार सवारी आती हैं जो अपनी अपनी दिशा बताती हैं वो टूटा फूटा आॅटो बस कही हुई दिशाओं पर चलता जाता है चुपचाप हमारी जिन्दगी भी एक आॅटो की तरह है सब आते हैं कहते हैं […]

कविता

कविता : रंग

रंगो भरी खुशियाँ बिखेरने आई ये होली सब में प्यार बाँटने आई ये होली मगर रंगो में कुछ फीका है सच्चाई के नाम पर धोका है खुशियों में भी गम ज्यादा है रंगो में छुपा ये झूठ ढूंढते पर भी नज़र नही आता हम पर गम का रंग डाल कर फिर छुप जाता है मगर […]

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एक अजनबी देश में

एक अजनबी देश में था मैं तो सोचा क्या जगह है ये लोग अलग हैं भाषा अलग है बोली अलग है रंग रूप अलग है भगवान तक अलग हैं लेकिन सारी दुनिया तो एक थी फिर क्यों सब ने हिस्से कर दिये अपनी अपनी अलग जगह बना ली और अपने रास्ते अलग कर लिये सालों […]

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बीते लम्हे

यादों में डूबा कभी सोचता हूँ कि वो पल क्या थे सच के ईनाम थे या झूठ के पैगाम थे वो यादें आज भी जिंदा हैं मुझ में चाहे ये दुनिया भी छोड़नी पड़े लेकिन वो यादें आत्मा में खुदी हुई हैं किसी जन्म में भी पीछा नहीं छोड़ने वाली ये यादें जो चेहरे दिल […]