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  • शैर – अलका जैन

    यूं गुजरने को तो उम्र गुजर ही जायेगी। गर चैन से गुजरती तो जिन्दगी होती। ळळळ दिल के दर्द को इस तरह छुपाया मैंने, कि जैसे दामने दाग छुपाते हैं लोग। ळळळ दर्दो गम में अश्क...

  • ज्यों गगन में चान्द चमके

    रचनाकार- अलका जैन विधा- कविता ज्यों गगन में चान्द चमके बेटी चमके आंगना में बेटिया साडी का आंचल बेटिया आंखों का काजल बेटिया चूडी की खन-खन बेटिया मां का है दर्पण बेटिया पूजा की थाली बेटिया सबसे निराली...

  • तुम लौट आये

    तुम लौट आये

    ओह, तुम लौट आये मुझे यकी था तुम जरूर आओगे, ज्यादा दिन न मेरे बिन तुम रह पाओगे। क्योंकि – मेरे प्यार की छाप बड़ी गहरी है। ये फीका रंग नहीं कि पानी पड़े तो धुल...