कविता

भारत में

भारत में पूर्ण सत्य कोई नहीं लिखता अगर कभी किसी ने लिख दिया तो कहीं भी उसका प्रकाशन नहीं दिखता यदि पूर्ण सत्य को प्रकाशित करने की हो गई किसी की हिम्मत तो लोगों से बर्दाश्त नहीं होता और फिर चुकानी पड़ती है लेखक को सच लिखने की कीमत भारतीयों को मिथ्या प्रशंसा अत्यंत है […]

गीत/नवगीत

गीत (मैं तो हूं केवल अक्षर)

मैं तो हूं केवल अक्षर तुम चाहो शब्दकोश बना दो लगता वीराना मुझको अब तो ये सारा शहर याद तू आये मुझको हर दिन आठों पहर जब चाहे छू ले साहिल वो लहर सरफ़रोश बना दो अगर दे साथ तू मेरा गाऊं मैं गीत झूम के बुझेगी प्यास तेरी भी प्यासे लबों को चूम के […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

गोली नहीं चली है यारों फिर एक बार दिमाग चला है किसी का घूम रहे पत्थर लेकर वो लगता है पेड़ फला है किसी का इरादे नापाक़ हैं उसके और पढ़ रहा वो कुरान की आयतें कोई बताओ उसे नहीं इस तरह से हादसा टला है किसी का टूटेगा ना हौसला दुश्मनों के किसी भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जब शाहीन बाग़ में गुज़ारी हमने रात थी एक अजीब एहसास से हुई मुलाक़ात थी मत पूछ क्या क्या देखा हमारी नज़रों ने बस यूं समझ कि बिन बादल बरसात थी बड़ा ही सुकून मिला जब मिला दिल उनसे दरम्यां हमारे कोई शह न कोई मात थी जीती थी हमने हारी हुई सारी बाज़ी भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

आग नहीं हूं मैं कुछ लोग फिर भी जलते हैं मुझको गिराने में वो हर बार फिसलते हैं उनसे भी मिला करो जिनकी ज़ुबां है कड़वी बचो उनसे जो कानों में ज़हर उगलते हैं देती है सुकून आख़िर मेरी ही मोहब्बत आज भी दिल जब हसीनाओं के मचलते हैं अश्कों का सैलाब उमड़ पड़ता है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सारे शहर में चर्चा ये सरेआम हो गया दोस्ती से ऊपर हिंदू इस्लाम हो गया खड़ी कर दी मज़हब की दीवार तो सुन अब भगवान मेरा परशुराम हो गया गिरे हो तुम जबसे मेरी इन नज़रों में तेरी नज़रों में काफ़िर मेरा नाम हो गया कामयाबी मिल सकती थी तुझको लेकिन नापाक था साजिश तेरा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुद को तुम समझाकर तो देखो दर्द में भी मुस्कुराकर तो देखो जरूरतें हो जाएंगी कम तेरी भी ईमानदारी से कमाकर तो देखो बढ़ जाएगा एक और दुश्मन किसी को आईना दिखाकर तो देखो सीख जाओगे दलाली भी करना तुम पत्रकार बनकर तो देखो हो जाएगी मोहब्बत मिट्टी से कुल्हड़ में चाय पीकर तो देखो […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

उत्तरायण उत्सव (मकर संक्रांति)

यह सत्य है कि मनुष्य के जीवन की दिशा और दशा में परिस्थितियों का बहुत बड़ा योगदान होता है। लेकिन खुशियों का संबंध मनुष्य की प्रकृति और उसके दृष्टिकोण से होता है। जीवन प्रतिपल परिवर्तित होता है। प्रत्येक दिन नवीन चीजें घटित होती हैं। नवीनता का बोध होना आवश्यक है। उससे भी आवश्यक है वर्तमान […]

कविता

सरस्वती वंदना

हम मानुष जड़मति तू मां हमारी भारती आशीष से अपने प्रज्ञा संतति का संवारती तिमिर अज्ञान का दूर करो मां वागीश्वरी आत्मा संगीत की निहित तुझमें रागेश्वरी वाणी तू ही तू ही चक्षु मां वीणा-पुस्तक-धारिणी तू ही चित्त बुद्धि तू ही कृपा करो जगतारिणी विराजो जिह्वा पे धात्री हे देवी श्वेतपद्मासना क्षमा करो अपराधों को […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेबसी की आख़िरी रात कभी तो होगी रहमतों की बरसात कभी तो होगी जो खो गया था कभी राह-ए-सफ़र में उस राही से मुलाक़ात कभी तो होगी हो मुझ पर निगाह-ए-करम तेरी इबादत में ऐसी बात कभी तो होगी आऊंगा तेरी चौखट पे मेरे मालिक मेरे कदमों की बिसात कभी तो होगी लगेगा ना दिल […]