कविता

कविता – आदमी की फ़ितरत

मेरे बदन से तू लिपट तो गया है इश्क का फरेबी जाल गूथकर अज़ीज दिलबर की तरह मगर मुझे पता है कि कुछ वक़्त गुज़रने पर तू वैसे ही मुझ को खुद से अलग कर देगा जैसे — सफ़र से वापसी के बाद कोई अपना लिबास उतारक फेंक देता है बिस्तर पर या फिर टांग […]

कविता

कविता : सुगन्ध किताबों की

अच्छी-सी किताब की सुगन्ध लुभा लेती है मेरे मन को और सुगन्ध तो नई किताब से भी आती है मगर वो अच्छी न हो तो याद दिला जाती है उस पर खर्च किये वो अपने थोड़े से पैसे जो उस वक़्त मेरे लिए अनमोल थे।

कविता

कविता – नन्हीं गौरैया

नन्हीं गौरैया उड़ते-उड़ते चली आई मेरे कमरे में मैंने तुरन्त लपककर बन्द कर दिया खिड़की और दरवाजा और पकड़ने लगा उसे। नन्हीं गौरैया अपने बचाव के लिए फुदुककर पहुँच गई पुरानी टँगी हुई तस्वीर पर फिर दीवार में गड़ी हुई कील पर फिर जंगले पर फिर मेज पर। उसे लगा अब वो कैद हो चुकी […]

कविता

कविता : जलकुंभी

जलकुंभी तालाब में बह आयी हाय रे किसी ने देखा नहीं देखा भी तो निकाला नहीं वह फैलती ही गई एक नाबालिग जलकुंभी पहले माँ बनी फिर दादी फिर पर दादी और भी रिश्तें जुड़ते गये तलाब का सारा बदन पूरी तरह से ढक गया जलकुंभी ने तालाब को कस के जकड़ लिया है और […]

कविता

मैं नास्तिक हूँ

ख़ुदा मुझे पता है तू सब कुछ कर सकता है फिर भी कुछ तो है जो तू नहीं कर सकता। तू भी मेरी तरह है जो सोचता है वही करता है फिर भी कुछ न कुछ बाकी रह जाता है जैसे मुझ से भी काफी कुछ छूट जाता है। मैं समझता था तू अन्जान है […]

कविता

कविता – सदी का ठहराव

मण्डेला का निधन या फिर सदीं का ठहराव क्या कहें इसे एक योद्धा जो रहा अपराजेय जिसने जीती हर बाजी जीवन के हर छोर पर संघर्षों का जमावड़ा पर विचलित नहीं हुआ चेहरे पर बच्चों-सी मासूम मुस्कान हर बाजी से पहले ही जीत का विश्वास मौत भी कईयों बार आई हारकर लौट गई लगभग एक […]

गीतिका/ग़ज़ल

कविता सिंह की ग़ज़ल

तुम्हारे प्यार की तासीर में बेचैन मेरा दिल, तुम्हे पाने की हर तदबीर में बेचैन मेरा दिल। अधूरी ख़्वाहिशें मेरी अधूरे ख़्वाब हैं मेरे, अधूरे ख़्वाब की तामीर में बेचैन मेरा दिल। अकेला सा खड़ा बरगद झुकी फैली हुई शाखें, अकेलेपन की इस तक़दीर में बेचैन मेरा दिल। बड़े बेचैन हैं अब लोग टूटी अब […]

पुस्तक समीक्षा

मानवीय संवेदनाओं एवं जीवन दर्शन से परिपूर्ण हाइकु संग्रह – अमन चाँदपुरी

हाइकु ‘हिन्दी साहित्य’ में एक बहुचर्चित एवं लोकप्रिय विधा के रूप में निरन्तर प्रगति कर रहा है। हिन्दी कवि, कवयित्रिओं एवं पाठकों के ह्रदय में यह अपना स्थान बना चुका है। ‘देखन में छोटे लगैं, घाव करैं गंभीर’ कुछ इसी तरह है 5-7-5 के वर्णक्रम से तीन पंक्तियों में लिखा जाने वाला यह लघु छंद […]

कुण्डली/छंद

खालीहांड़ी देख कर

मेरी पहली कुंडलिया :- खालीहांड़ी देख कर, बालक हुआ उदास। फिर भी माँ से कह रहा, भूख लगी ना प्यास।। भूख लगी ना प्यास, कह रहा सुन री माता। होती मुझको भूख, माँग खुद भोजन खाता।। कहे ‘अमन’ कविराय, न बालक है पाखंडी। घर की स्थिति है ज्ञात, सामने खालीहांडी।। – अमन चाँदपुरी (23 सितम्बर […]