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  • नहीं बनूँगा

    नहीं बनूँगा

    मैं विद्रोही नहीं बनूँगा मै अवरोही नहीं बनूँगा। तुम उद्दंड भले हो जाओ, मैं निर्मोही नहीं बनूँगा। स्वप्न सदा देखा उन्नति का, सपनों को कभी नहीं मारा। पाव के छाले जख्म बन गये, फिर भी संकल्प...

  • उलाहना

    उलाहना

    वो थे तो क्या बदला था,ये हैं तो क्या बदला है, तब भी नारी शोषित थी, अब भी उनका दिल दहला है। लोकतंत्र की राजनीति पर, सबने सेकी रोटी है, वतन के हर गलियारों पर,बस गद्दारों...

  • भोजताल

    भोजताल

    पिछले कुछ वर्षों से अजनबी से लग रहे हो जबसे तुमने विकास का दामन थामा है। मेरे सारे यदगार पल तुममें ढूंढते है वो पहले से अपनापन वो चित्र जो तुमने अपने इन तटों की मोटी...

  • किसान

    किसान

    सत्ता से धरातल की दूरियाँ देख लें, चलो किसान की मजबूरियाँ देख लें। अतिवृष्टि,अनावृष्टि सी अनेक बाधाएँ हैं, गरीबी में सूखती मन की क्यारियाँ देख लें। दिल्ली की मदद देहरी तक आते-आते, कहाँ ठहर जाती है...

  • तेरे जाने से

    तेरे जाने से

    तेरे जाने से गमज़दा होगा, सारा आलम जु़दा-जु़दा होगा। मुद्दतो हुए कोई रहा ही नहीं , घर का धुँधला सा आइना होगा। एक ग़र हम न हुए तो सुनो, ये शहर फिर धुआँ-धुआँ होगा। वो जो...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ख़ुदी इस बात की उनको,कि अमीरों में रहते हैं। तो हम भी कहाँ किसी की, जागीरों मे रहते हैं। जिस राह पर चलते हो तुम,अपनी शान के ज़द पे, हम शौक से शामिल,उन्हीं राहगीरों में रहते...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सर्द रातों में माहताब भी काँपने लगा, सुबह सिकुड़ने लगी आफताब हाँपने लगा। कोहरे की फैली घनी चादरों के आगे, कुदरत का सारा हिसाब काँपने लगा। डंक सी मारती सर्द हवाओं की लहर, कलियों की हालत...