राजनीति लेख

बीटिंग रिट्रीट समारोह से ” अबाइड विथ मी ” धुन हटाने का मामला

देश का 73 वा गणतंत्र दिवस सदैव पारम्परिक बदलाव के लिए याद भी किया जाएगा , चाहे अमर जवान ज्योति की लौ का स्थानांतरित होकर राष्ट्रीय समर स्मारक के मशाल में विलय किए जाने की बात हो , इंडिया गेट पर नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा स्थापना की बात हो , गणतंत्र दिवस […]

राजनीति

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022: क्या कहते हैं ओपिनियन पोल ?

उत्तर प्रदेश 18 वी विधानसभा सभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है , मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा के अनुसार सात चरणों में चुनाव संपन्न होंगें , उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधान सभा सीटों पर मतदान के परिणाम की घोषणा 10 मार्च को होगी , ऐसे में सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का […]

बाल कहानी बाल साहित्य

पतंग का धागा और चींची चिड़िया

सोनू की तीसरी पतंग काटते हुए राहुल जोर से चीखा काई पो चे , सोनू की मकर संक्रांति पर्व की खुशी तो जैसे कही खो गयी, बिल्कुल उदास हो गया सोनू , सोनू को इस बात की भी चिंता थी कि अब उसके सभी दोस्त उसे चिढ़ाएंगे, राहुल और सोनू एक ही अपार्टमेंट में रहते […]

राजनीति लेख

तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीतिक महत्वाकांक्षा के मायने

विगत विधानसभा चुनाव में जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस का आत्मविश्वास आसमान पर है , पश्चिम बंगाल में भाजपा के विधायक लगातार पार्टी छोड़ तृणमूल कांग्रेस में वापस आ रहें है , तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त कई और राज्यों में अपनी सक्रियता बढा दी है , पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी […]

कविता

धुआँ

धुआँ का जो है कारोबार तेरा तेरा कोई मज़हब हो नहीं सकता तुम चाहे मंदिरों में बैठो या मस्जिदों में सजदा कर लो जहाँ तुम जैसे नाखुदा हो मौजूद वह ख़ुदा का घर हो नहीं सकता अमित कुमार अम्बष्ट ” आमिली ”

कविता पद्य साहित्य

वो जो खुदको ..

वो जो खुद को रियासत का राजा समझता है नावाक़िफ़ है लेकिन वो भी साज़िशों का हिस्सा है अकड़ उसकी औकात से बढ गयी हो भले लेकिन है और कुछ नहीं फक़त तलवे चाटने का किस्सा है औरों की बर्बादी की उसकी जो ख़्वाहिश है समझता नहीं बचपना है , बेवकुफाना आज़माइश है खुदा जब […]

राजनीति लेख

दिल्ली दंगा: गुलेल कहते हैं गुनाह की कहानी

On Sun, 1 Mar 2020, 07:12 Amit Ambashtha, wrote: दिल्ली दंगा : गुलेल कहते हैं गुनाह की कहानी ………………………………………………… नागरिकता संशोधन कानून पर जिस तरह से विपक्ष देश के कुछ प्रतिशत मुसलमानों को भ्रमित करने में सफल रहा , देखते देखते माहौल खराब होने लगा , जे एन यू से जामिया तक विपक्ष की भड़काई […]

लेख सामाजिक

क्या सर्वोच्च न्यायालय के विश्वसनीयता पर लग गया प्रश्न चिन्ह ?

लोकतंत्र के चार स्तंभ विधायिका , कार्यपालिका , मीडिया और न्यायपालिका है , जिनमे पहले तीन स्तंभों पर यदा कदा सवाल उठाए जाते रहें हैं या सवाल उठते रहें हैं । लेकिन लोकतंत्र का चौथा महत्वपूर्ण स्तंभ न्यायपालिका सदैव इससे अछूता रहा है । क्योंकि जहाँ एक ओर आज भी देश में न्यायपालिका पर जनता […]

कविता

स्वर्ण सिक्के

चंद स्वर्ण सिक्के  जो शायद धरोहर हो  हमारे पूर्वजों के  सोचता हूँ अगर ये  कभी संग्रहित करने के बदले  गरीब मजलूमों पर  व्यय कर दिए गए होते  भारत कभी सोने का चिड़ियाँ था  यह इतिहास नहीं होता         अमित कु अम्बष्ट ” आमिली “

कविता

प्राण छूटे ते छूटे

उम्र तो हर दिन बढे मोह का बंधन छूटे ना कर्म से सब फल मिले भाग्य अगर जो फूटे ना लाखों हो चाहे चोर उच्कके  विधा धन कोई लुटे ना जीवन बस संघर्ष कथा मालिक बस दम घुटे ना सुख में संग सब बंधु बांधव दुख में फिर कोई जुटे ना दीन अमीर सब हिय […]