कविता

वार्तालाप सत्तर के आस-पास

कितनी जिद्दी हो चले हो तुम आजकल मेरी तो कोई बात नहीं मानते, सुबह सवेरे ये सारे खिड़की दरवाजे खोल देते हो ठंडी हवा से दुश्मनी बेकार में मोल लेते हो, बीमार पड़ गए तो कौन करेगा तुम्हारी देखरेख बेटे बहू को भी दो-तीन दिन में वापस जाना है परदेस, लाठी के बिना दो कदम […]

कविता

काश….!

  गुलाबी ठंड का एहसास कराता अक्टूबर का माह आ गया है, मैं खुश हूं….. सूरज के रुख में थोड़ी नरमी है अब कम हो गयी गर्मी है, मैं खुश हूं…. प्रकृति में खिलने वाले फूलों ने अपनी छटा बिखेरने शुरू कर दी है, प्रकृति का मधुमास, खिले खिले एहसास कम हो गया बरसना ए […]

कहानी

तुमसा कोई नहीं

आज मान्या बहुत खुश थी। फेसबुक में एक पुरानी सहेली की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। उसने प्रारंभिक जांच पड़ताल के बाद आश्वस्त होने पर स्वीकार कर ली। फोन नंबर का आदान-प्रदान हुआ। फिर शुरू हुआ निरंतर बातों का सिलसिला। यह संयोग ही था कि प्रीति भी उसी शहर में रहती थी लेकिन पहले ना कभी […]

लघुकथा

राजा बाबू

” तू ये हर समय राजाबाबू राजाबाबू क्या कहती है… कैसा दिखता है वह एक दिन मुझे भी ले जा ना उसके घर….” “तू उससे अपनी बराबरी ना कर, करमजले। इत्ते बड़े साब का बेटा है। सेव जैसा लाल दमकता चेहरा, काले रेशमी घुंघराले बाल। सुंदर से कपड़ों में सजा धजा कोई राजकुमार।” “तो मुझे […]

कविता

कोविड आया है…

ड्राइंग रूम का बड़ा सा महंगा सोफा सेंट्रल टेबल पर सजा खूबसूरत गुलदस्ता उस पर भरा बासी पानी धूल के छोटे-छोटे कण लिए हुए सूखे हुए फूल और पत्ती लहराते शानदार पर्दे रूम फ्रेशनर की भीनी भीनी महक हवा के साथ बजती विंड चाइम की खनक रंग बिरंगी रोशनी से जगमगाते हुए झूमर पूछते हैं…….इतनी […]

जय विजय के अंक

चाहत-ए-हरियाली

  शहरों में जीने की ठान ली मैंने हां, गमलों में हरियाली पाल ली मैंने, गमले में बलखाती लता गिलोय की गमले में इठलाती कली अनार की…. गमले में पुदीना और बेल पान की तुलसी का पौधा संग छोटा सा देवस्थान भी…. कहीं गुलाब की सुगंध, कहीं खिलती अश्वगंध कहीं कद्दू करेला तो कहीं फूलों […]

कहानी

नज़रिया

“नमिता, तुम बार-बार उन लोगों के पास क्यों चली जाती हो? क्या बात करती रहती हो उनसे। देखो, मैंने पहले भी तुमसे कहा है कि वह लोग हमारे स्तर के नहीं है। उनका रहन-सहन देखो। गंदगी देखो। अपने घर में बैठो या फिर पड़ोस में और भी लोग हैं, उन से मेलजोल रखकर समय बिता […]

कविता

चिड़िया के आंसू

मत काटो इन टहनियों को मत उजाड़ो कई घरौंदे घरौंदा अपना बनाने को इन टहनियों में जीवन के साक्ष्य देखे हैं मैंने प्रेम और त्याग के कई निशान देखे हैं मैंने कण-कण कर, तिनका तिनका जुटाना चोंच में भर कर लाना फिर एक नन्हा सा नीड़ बनाना नन्हें प्राणियों का ये चमत्कार देखा है मैंने………. […]

कविता

साॅंस वादा करो

साॅंस तुम चलने लगी थी जब पहली बार मां की कोख में थी मैं बेखबर और बेकरार बाहर आने का कर रही थी इंतजार समय बीता और कोख से गोद तक आ गई मैं गदगद थी पाकर मां का असीम प्यार तुम चलती रही हर पल मेरे साथ तुम्हारी गति को महसूस करती हूॅं मैं […]

कविता

शहादत व्यर्थ ना जाए

  हिंदी चीनी भाई-भाई का नारा जाने क्या हुआ हम जिसे दोस्त समझे थे वह दुश्मनी का पर्याय हुआ…… शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की नींव तुमने हिला डाली गलवान घाटी में आज तो नदी खून की बहा डाली….. शूरवीर जो तुमने मारे थे किसी की आंख के तारे जान से प्यारे थे वो भाई देश की खातिर […]