बाल कविता

बाल कविता – सयानी सी जल रानी

इठलाती  सी  बलखाती  सी लहराती  जल   में  रानी  सी जल ही जीवन जल ही जग है जल  में  रहती  महारानी  सी मेरे  घर  के  आंगन  में   इक छोटे   से   घर   में   रहती  है जिस पल देखे वो मुझे निकट यूं  उछल उछल कर कहती हैं गर बनी हो  रक्षक जीवन  की करने  दो  कुछ  मनमानी  […]

गीत/नवगीत

उद्धव गोपी संवाद

 सुनो उद्धव  सुनाते  हैं  हमें जो  तुम  बताते  हो ज्ञान की योग  की बातें हमें जो तुम सिखाते हो समझ हम कुछ ना पाते है व्यथा मन की सुनाते है हमारा  मन  नहीं  वश  में तुम्हे कारण बताते है हमारा मन तो बसता है कमल नयनों में उन्हीं  के उन्हीं की तिरछी चितवन में मीठे […]

कविता

श्री चरण

जब  से श्री चरण  पड़े  गोकुल बिसराय गई सुधि ब्रज बनिता किन्नर, सुर, नाग  भये मोहित उपवन महका बहकी सरिता सुनकर मुरली की  मधुर तान अविरल  यमुना  ठहराय गयी जो चली  सुगन्धित  मंद पवन हर कली  कली मुस्काय गयी सब खग,मृग,मीन,अधीर भये अरु  मगन  भये  गैया ग्वाले दर्शन  के  प्यासे  नयनन  सो अविरल गिरते जल […]

कविता

माँ भारती की लाज

चरणों   में  अर्पित  कर  देंगे तन,मन,धन,जीवन,आज सुनो…. हो  जाएं  प्राण आहूत  भले जाएं  ना  भारती  लाज  सुनो….. यह  शस्य  श्यामला  मातृभूमि कण कण हमको अति प्यारा है इसकी  आज़ादी  की  खातिर वीरों   ने   जीवन   वारा   है, डट  जाना   है   सीमांओं  पर हाँ ,छोड़ छाड़ के काज सुनो…. हो  जाएं  प्राण  आहूत  भले जाएं  ना  भारती  […]

भजन/भावगीत

कन्हैया आने वाले हैं

सजा दो पथ को पुष्पों से कन्हैया आने वाले हैं कन्हैया आने वाले हैं, कन्हैया आने वाले हैं, लगा है मास भादों का ,चमकती चंचला नभ में उफनती सारी नदियां है, श्याम से मेघ है नभ में बरस जा ओ मेघ छन छन छन ,कन्हैया आने वाले हैं सजा दो पथ को पुष्पों से कन्हैया […]

गीत/नवगीत

फिर से आएंगे राम अवध में

बरसों की अधूरी उर अभिलाषा अब पूरी है होने वाली फिर से आएंगे राम अवध में चहुं दिश होगी अब खुशहाली, नवनिर्मित चौखट पूजन होगा और द्वार बंधेंगे फिर तोरण आम्र और केले के पत्र से फिर महकेंगे वन उपवन चहुं दिश मंगल गान गवेंगे हर रोज मनेगी अब दीवाली फिर से आएंगे राम अवध […]

कविता

सबसे पावन बंधन -राखी

चार धागो से बंधा प्यारा सा ये बंधन सारे जग के बंधनों में सबसे ये पावन राखी का त्योहार प्यारा लेके आया है प्यारा सा ये सावन प्यारा सा ये सावन, तुमसे बंधा बंधन मेरा जबसे जनम लिया बचपन बिताया साथ में ही हर एक पल जिया तुम भाई हो,तुम हो सखा,साथी बचपन के तेरे […]

गीत/नवगीत

मन वृंदावन हो आता है

वर्ष के बारह मासों में सावन का मास जो आता है मन झूम झूम सा जाता है और वृंदावन हो आता है, वो वृंदावन जिसमें मेरे गिरधर ने रास रचाया था जिसे देख देख डाली डाली पत्ता पत्ता हरसाया था चाहे गैया हो या ग्वाल सब का ही गिरधर से नाता है मन झूम झूम […]

सामाजिक

घूंघट – एक कुप्रथा

कितने बरस लाड प्यार से अपने बाबा के आंगन में पली बढ़ी  संस्कारों से पूर्ण स्वरा जब ब्याह के ससुराल आती है तो सबसे पहला तोहफा उसे जो मिलता है वो था गज भर लंबा घूंघट…. बाईस बरस की उम्र,मायके में कभी ना देखा ऐसा नया माहौल , गहने,कपड़े, लाज ,शरम और घूंघट, घूंघट ,जिसके […]

गीत/नवगीत

बदला सावन

बदला बदला सा लगता है सावन का हर लम्हा मुझको इस बारी जो घर में कैद हुई जैसे भूल चुकी हूं जीवन को ना कोई उमंग ना कोई तरंग सब बिखरा बिखरा लगता है बदला सा लगता है सावन बदला बदला लगता है, ना पड़ेंगे झूले पेड़ो पर ना मिलना होगा सखियों से अब तो […]