गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ये मुनासिब नहीं हर किसी से मिलें, जो मुहब्बत करे बस उसी से मिलें। नूर  पैदा  करें  जुगनुओं  की  तरह, उम्र भर  के  लिये  रोशनी  से मिलें। हो  गए  आज हिन्दू-मुसलमां सभी, ऐ  ख़ुदा  हम कहाँ आदमी से मिलें। एक दिन आप-हम क्या न होंगे फ़ना, दुश्मनी   छोड़िये,   दोस्ती  से   मिलें। हमसफ़र […]