Author :

  • गाँधी जी के बन्दर तीन

    गाँधी  जी  के  बन्दर  तीन, तीनों   बन्दर  बड़े  प्रवीन। खुश हो बोला पहला बन्दा, ना मैं  गूँगा, बहरा, अन्धा।   पर  मैं  अच्छा  ही  देखूँगा, मन को  गन्दा नहीं करूँगा। तभी उछल कर दूजा बोला, उसने...

  • अपना घर अपना होता है

    अपना घर अपना होता है

    अपना  घर  अपना  होता है, ये जीवन का सपना होता है।   बड़े शहर  में घर  का सपना, केवल  इक  सपना  होता है। बड़े   भाग्य   होते  हैं  उनके, जिनका घर अपना  होता है।   आवक-जावक...

  • *वाणी पर संयम*

    *वाणी पर संयम*

    उस दिन देवम की कक्षा में टीचर पढ़ा रहीं थीं, कोई गम्भीर विषय चल रहा था। लेकिन पीछे दो छात्र आपस में बात करने में इतने तल्लीन थे कि वे भूल ही गये कि वे कक्षा...

  • उजियार होगा या नहीं

    उजियार होगा या नहीं

    रवि किरण ने कर लिया रिस्ता तिमिर से, कौन जाने भोर को उजियार होगा या नहीं। हर तरफ छाई निराशा, आस की बस लाश बाकी। साँझ तो सिसकी अभी तक, भोर में फैली उदासी। तम सघन...

  • *फूल नहीं तोड़ेंगे हम*

    *फूल नहीं तोड़ेंगे हम*

      14 नवम्बर, बाल दिवस, बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू का जन्म-दिवस, देवम के स्कूल में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। सभी छात्र बड़े उत्साह और उमंग के साथ इस दिवस को मनाते हैं।...

  • छूमन्तर मैं कहूँ…

    छूमन्तर मैं कहूँ…

      छूमन्तर मैं कहूँ और फिर, जो चाहूँ बन जाऊँ। काश, कभी पाशा अंकल सा, जादू मैं कर पाऊँ।   हाथी को मैं कर दूँ गायब, चींटी उसे बनाऊँ। मछली में दो पंख लगाकर, नभ में...


  • गोबर, तुम केवल गोबर हो

    गोबर, तुम केवल गोबर हो

    गोबर, तुम केवल गोबर हो। या सारे जग की, सकल घरोहर हो। तुमसे ही निर्मित, जन-जन का जीवन, तुमसे ही निर्मित, अन्न फसल का हर कन। तुम आदि-अन्त, तुम दिग्-दिगन्त, तुम प्रकृति-नटी के प्राण, तुम्हारा अभिनन्दन।...