क्षणिका

क्षणिका – बात मानो

राम मंदिर बनाओ तुम्हें रोकता कौन है? बहती जल धारा को छेड़ता कौन है ? विपक्ष हो या पक्ष आपस में युद्ध करता कौन है ? सत्य के आगेसभी मौन हैं । — अनिल कुमार सोनी

कविता

घोषणा

आज फिर वो घोषणाएं करेंगें भारत देश की तकदीर बदलेंगे आईना में सूरत दिखे जनता की मुस्कुराती हुई एक सेल्फी तो बनती है कसम खाते है वायदों को हरदम पूरा करने की संकल्प लेकर भूल जाते है वो आज फिर वो घोषणाएं करेंगे तिरंगा झंडा की जय हो राष्ट्रपिता महत्मा गांधी की जय हो गणतंत्र […]

कविता

हुंकार

हाथ ले तिरंगा हुंकार भर दो भारत की अब तुम कतदीर बदल दो । बदला है तुमने चमन को अपना समझ कर स्वच्छ भारत को अब उज्ज्वल कर दो । २६ जनवरी आई कुछ राहत की घोषणा कर दो भाईयों बहिनों जोर से बोले गणतंत्र दिवस अमर रहे जय हिन्द जय भारत ।    

क्षणिका

सिर्फ मोदी जी

प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ सिर्फ मोदी जी हैं । क्योंकि तीनों स्तंभ दिखाई नहीं दे रहे है आप कहीं से भी गिनना शुरु करें प्रजातंत्र का चौथा स्तंभ सिर्फ मोदी जी हैं ।    

क्षणिका

स्तीफों की झड़ी ही आखिर इलाज

बीमारी कुछ एसी हो बताने लायक न हो परेशानियों का सामना हो उगलत बनत न लीलत ऐसी अवस्था में स्तीफों की झड़ी लगजानी चाहिए बस एक ही इलाज है स्वच्छ भारत

हाइकु/सेदोका

चंद हाइकु

सूर्य का ताप लाजवाब लहर बेअसर सी   चालीस वा है नोट करें सफर दस दिन हैं   तुम तो जाओ हम घड़ी कांटे  है नूतन वर्ष   तुम तो जाओ हम घड़ी कांटे  है नूतन वर्ष   अरमान से करेला की तरह बिताया साल   सूर्य का ताप धरातल गरम गलती बर्फ

सामाजिक

जीवन जीना है तो हो कुछ नया नया पुराना भी

 जीवन जीना है तो हो कुछ नया नया पुराना भी। जन्म से ही शुरुआत करते है माँ मिलती है अमृत पिलाती है लोरियां सुना कर हम को सुलाती है कठिनाइयों के समय भी हमें खुशियाँ देती है बड़े होने पर हाँ हम माँ को भूल जाते है नये नये की चकाचौंध में पुराने भी भूल जाते […]

क्षणिका

मुवाईल और नोट बदली

हो सकता है नोट बदली में मुवाईल की भूमिका अहम रही हो तब तो जखिरे मिल रहे है क्यों न आफिस में मुवाईल वर्जित करें सभी के मुवाईल लाकर में रखने का आदेश देदें धन्यवाद