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  • लघुकथा – लेखन

    लघुकथा – लेखन

    “ये क्या लिखा है तुमने? न सिर है, न पैर। वाह-वाही लूटने के लिए अश्लील शब्दों की भरमार… पता नहीं ये नवागंतुक अपने आपको क्या समझते हैं । छोड़ जाओ इसे यहीं। अभी दूसरों को पढ़ो,...

  • सुरक्षित स्थान

    सुरक्षित स्थान

    गुण्डों से बचते-बचाते, इधर से उधर भागते, सुमन अधमरी सी हो गई थी । हिम्मत जबाब देने लगी थी। उसे श्वास लेने में भी परेशानी महसूस हो रही थी। तभी सामने से पुलिस की जीप गश्त...

  • लघुकथा – देशप्रेम

    लघुकथा – देशप्रेम

    चुनाव के आसपास होने वाली रैली किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होती । कार्यक्रम से घर लौटे नेताजी बहुत खुश थे। आज की रैली में बहुत भीड़ थी। राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के समक्ष, उनका...

  • तन्हा दिल की दीवारों पर

    तन्हा दिल की दीवारों पर

    तन्हा दिल की दीवारों पर कुछ परछाइयां मंडराती हैं ! कभी छेड़ें दिल के तारों को, कभी एकाँकी कर जाती हैं ! ! कभी पंख लगा के हसरतें, अल्हड़पन में पहुंच जाती हैं ! खुशियों भरी...

  • परिन्दों सी निकली

    परिन्दों सी निकली

    परिन्दों सी निकली मुहब्बत भी तेरी ! बदला जब मौसम बदल लिया फिर ठिकाना !! मिलने की चाहत हरदम रहती थी तुमको ! अब गुजर जाते हो गली से कर मशरूफियत का बहाना !! बेदर्दी इस...

  • वर्ण पिरामिड – माता रानी

    वर्ण पिरामिड – माता रानी

    दो माता आशीष भाग्य जगे शरण तेरी अहंकार मिटे दर्शन अभिलाषी माँ कृपा बरसे ज्ञान बढ़े समृद्धि बढ़े करे बेड़ा पार विपदा दूर करे माँ चिंता हरती फलदायी आरोग्य करे वरदानी मैया भक्तों की पीर हरे...

  • कब बरसोगे ?

    कब बरसोगे ?

    डबडबी आँखों से… कृषक निहारे कर दे मेघा तू … अब तो बौछारें कब बरसोगे ? सूखी हैं फसलें… सूखे हैं खेत मिट्टी भी मुझको… दिखती है रेत कब बरसोगे ? उपजाऊ धरती… बन जाये न...

  • भ्रष्टाचार

    भ्रष्टाचार

    भ्रष्टाचार के विरोध में नेता जी का अनशन जारी था और भ्र्ष्टाचार से त्रस्त जनता तन-मन-धन से उनके साथ खड़ी थी । मन में नेता जी से मिलने की आस लिए और एक अदद फोटो खिचवाने...

  • हाइकु

    हाइकु

    घात लगाए कुटिल पाकिस्तान बाज न आए ! आकार लघु गंभीरता समेटे होते हाइकु ! गर्भ में कली डरती क्या करती की भ्रूणहत्या ! चारदीवारी हुई असुरक्षित रिश्ते विक्षिप्त पहाड़ कर्ज मौत का आलिंगन धरतीपुत्र पिसी...