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  • एक और सूरज

    एक और सूरज

    सदियों पहले टकराए ग्रह कहते हैं उससे धरती बनी ! “आग का गोला” थी तब यह, फिर धीरे-धीरे शाँत हुई !! जल, वायु और हरियाली से फिर इसमें जीवन उभरा ! विकास हुआ, जीवन संवरा, विज्ञान...

  • वंशबेला

    वंशबेला

    बेटी बेटी रूप है लक्ष्मी का सरस्वती का दुर्गा का महाकाली का ! बेटी बांधती है परिवार को रिश्तों में बन बेटी, बहन और बन पत्नी ! बन माँ बेटी ही कुल को आगे बढ़ाती है...

  • बिरादरी

    बिरादरी

    “मार डालो इन कुत्तों को। कोई भी बचने न पाए!” “काट डालो इन सूअरों को ! कोई भी सूअर जिंदा ना रहा पाए !” चारों तरफ ऐसी ही आवाजों की गूंज सुन कर, शहर के सारे...

  • हिन्दी

    हिन्दी

    माथे पर तेज़, पर आँखें उदास ! इक तेजस्वी वृद्धा को, देखा है आसपास !! “कौन हो देवी?”, आशीष लेते मैं मुस्काई ! मायूस वो बोली, “पहचान तू भी ना पाई?” सुन… संस्कृत की पुत्री और...


  • कहानी : बटवारा

    कहानी : बटवारा

    अरुण जी की दूरदर्शिता का हर कोई कायल था ! कोई भी समस्या हो, कैसी भी समस्या हो, सब का समाधान होता था उनके पास ! पर कहते हैं ना, वक़्त कब करवट ले कोई नहीं...



  • वो मस्त दिन…

    वो मस्त दिन…

    तेरे ख्यालों में… गुजरने लगे हैं रात और दिन तू पास हो न हो, तू संग मेरे रहता है !! तेरे दीदार को… तरसने लगे हैं शामों – सहर तेरे इंतजार में, आँखों से मोती बहता...

  • अनजान मैं रही कि….

    अनजान मैं रही कि….

    अनजान मैं रही कि … क्या मंज़िल है मेरी पूरी शिद्दत से तेरी मंज़िल को अपना ही मानती रही ! अनजान मैं रही कि … ख्वाहिशें क्या होती हैं गुजरते वक़्त के संग तमन्नाएँ कम होती...