कविता

गंगा मां के विभिन्न नाम

  भागीरथ के तप का प्रतिफल, *जटाशंकरी* कहलाई *शिवाया*। जहृनु ऋषि की पुत्री *जाह्नवी* ने, *देवनदी* का रुप अपनाया।। *उत्तरवाहिनी* ने करके कल-कल, जड़ी-बूटियों का अमृत बिखराया । *देवनदी* का पहन के चोला, *मंदाकिनी* ने भूमि पर धन उपजाया।। *मुख्या* की निर्मल – अविरल धारा ने, मानव को दुष्कृत्यों से मुक्त कराया। *मुक्तिदायिनी* है पावन […]

कविता

आओ करें हम जल का दान

महाज्ञानी थे ऋषि मनीषी जल की महिमा का था उनको ज्ञान । जरूरत को जोड़ कर व्रतोपासना से हमें करना सिखाया जल का सम्मान ।। निर्जला एकादशी को रह कर प्यासा समझे मानव पुरखों का ज्ञान। बूंद- बूंद को रखो सहेज कर जल में बसते हैं हम सबके प्राण ।। भीषण गरमी में जल करके […]

लघुकथा

मानवता

रोते बच्चे को गोद में उठाए वो मजदूर सी औरत जैसे ही डिस्पेंसरी में पहुंची तो उसकी वेशभूषा और हड़बड़ी से अनायास ही सबका ध्यान उसकी ओर चला गया। “डाक्टर साहिब,‘मेरे बच्चे को चोट लग गई है, बहुत खून निकल रहा है, जरा देख लीजिए” , पसीने से लथपथ वो औरत हांफती हुई बोली डाक्टर […]

हाइकु/सेदोका

हाइकु

सर्द हवाएँ सियासत की भेंट रिश्ते भी चढ़े ! ***************************************** चारदीवारी हुई असुरक्षित रिश्ते विक्षिप्त ***************************************** पिसी जिंदगी मर्यादा-अमर्यादा है अंतर्द्वन्द ***************************************** रिश्तों में छल, पलभर का सुख, अकेलापन ! ***************************************** देखा दर्पण देख खुद की छवि सहमा अहं। ***************************************** छाई है धुंध, सवाल बने रिश्ते, कसैले हुए ! ***************************************** दुर्गम पथ रख मन संबल […]

लघुकथा

डायरी

बहुत प्यार करती थी नेहा अपनी भाभी से। उनके न रहने की ख़बर सुन सुध बुध खो, अपने भैया के घर दौड़ पड़ी।  सबका रो – रो कर बुरा हाल था। भाभी का प्रिय सामान उनके साथ ही जलाने के विचार से नेहा ने उनकी अलमारी खोली, सामने ही भाभी की डायरी पड़ी थी । […]

कविता

मजदूर

गुरु हथौड़ा हाथ में इनके और श्रम की महिमा है मशहूर कहीं बन जाते हैं ये मछुआरे कहीं कहलाएं खेतिहर मजदूर नदियों को बांध कर हैं बांध बनाते रेल पटरियों का ये जाल बिछाते अपने हाथों की ताकत से निर्माण कार्य हैं, सिद्ध कर जाते अज्ञानता और गरीबी के मायाजाल में पिसते दिखतें हैं मजदूर […]

कविता

मजदूर

हुनर है इनमें… वेगवती – अभिमानिनी नदियों को बांधने का ताजमहल सदृश्य बहुमंजिली इमारतें बनाने का कर अथक परिश्रम खेतों को हरियाली से सजाने का हाँ ! मेहनतकश मजदूर वर्ग करता है निर्माण कार्य फिर भी जीता है अभावग्रस्त जीवन शोषित जीवन । विषम परिस्थितियों में भी नारकीय जीवन । । कृशकाय धूप से झुलसे […]

लघुकथा

ब्रांड

सोनाली वैसे तो मध्यमवर्गीय परिवार से ही थी, पर शादी के बाद ससुराल में ब्रांड के बिना बात करना उसे अपनी तौहीन लगता था । कहीं न कहीं उसकी हीनभावना ही उसे ऐसा करने को प्रेरित करती थी । पर वह खुश थी कि वह सभी को अपना स्टैण्डर्ड दिखने में कामयाब हो पाई है […]

कविता

आओ थोड़ा जी लेते हैं

भूल प्रतिस्पर्धा और परीक्षाओं का आतंक फिर से इक बार… उधार ही सही, पर किसी से, उन्मुक्त हंसी ले लेते हैं । आओ जीवन का जी लेते हैं ।। सिमटा है बचपन आजकल वीडियो, कंप्यूटर की स्क्रीनों में छोड़ के आधुनिकता के यह बंधन… खेत खलिहानो में, माटी की गोद में, जीवन की सीख़ ले […]

कविता

कोरोना युद्ध

घातक कोरोना … बन वैश्विक आपदा विश्व भर में लील चुका है… लाखों जिंदगियां। और चपेट में है सारी दुनिया ।। इस कोरोना युद्ध में, कलयुग में भी छिड़ी है भारत में फिर महाभारत… जहां अपने ही लोग बन फिर शत्रु … खड़े हैं दोनों ओर।। इक तरफ हैं… कुछ मूढ़ लोग, घूम इधर उधर, […]