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  • यक्ष प्रश्न

    यक्ष प्रश्न

    दिन-रात की भागदौड़, व्यस्तता की मारधाड़ और अधिक से अधिक पा लेने की चाह में, लगता है रिश्ते कहीं खो से गए हैं ! एक छोटे से कमरे में अपने पति और बच्चों के साथ रहने...

  • लघुकथा : लक्ष्मणरेखा

    लघुकथा : लक्ष्मणरेखा

    लक्ष्मणरेखा “हद होती है बेशर्मी की ! कम से कम बच्चों की तो शर्म की होती !” विछिप्त सा सोहम चिल्लाया ! “कहाँ कमी रह गई मुझसे? कौन सा ऐसा सुख था जो मैंने तुम्हें नहीं...


  • पॉलीथिन : लघुकथा

    पॉलीथिन : लघुकथा

    “कल किसने देखा? यूँ ही कल की फिक्र में यह ना खाओ, पानी ना बहाओ और तो और… अब बेवकूफों की तरह थैला ले कर बाजार जाओ!अरे पॉलीथिन बैग के कितने फायदे हैं, ज़रा गंदा हुआ,...

  • एक और सूरज

    एक और सूरज

    सदियों पहले टकराए ग्रह कहते हैं उससे धरती बनी ! “आग का गोला” थी तब यह, फिर धीरे-धीरे शाँत हुई !! जल, वायु और हरियाली से फिर इसमें जीवन उभरा ! विकास हुआ, जीवन संवरा, विज्ञान...

  • वंशबेला

    वंशबेला

    बेटी बेटी रूप है लक्ष्मी का सरस्वती का दुर्गा का महाकाली का ! बेटी बांधती है परिवार को रिश्तों में बन बेटी, बहन और बन पत्नी ! बन माँ बेटी ही कुल को आगे बढ़ाती है...

  • बिरादरी

    बिरादरी

    “मार डालो इन कुत्तों को। कोई भी बचने न पाए!” “काट डालो इन सूअरों को ! कोई भी सूअर जिंदा ना रहा पाए !” चारों तरफ ऐसी ही आवाजों की गूंज सुन कर, शहर के सारे...

  • हिन्दी

    हिन्दी

    माथे पर तेज़, पर आँखें उदास ! इक तेजस्वी वृद्धा को, देखा है आसपास !! “कौन हो देवी?”, आशीष लेते मैं मुस्काई ! मायूस वो बोली, “पहचान तू भी ना पाई?” सुन… संस्कृत की पुत्री और...


  • कहानी : बटवारा

    कहानी : बटवारा

    अरुण जी की दूरदर्शिता का हर कोई कायल था ! कोई भी समस्या हो, कैसी भी समस्या हो, सब का समाधान होता था उनके पास ! पर कहते हैं ना, वक़्त कब करवट ले कोई नहीं...