Author :


  • क्षणिका

    क्षणिका

    मुर्दा ही तो थे अब तलक बन बैठे इन्सान लगाने इल्ज़ाम अंजु गुप्ता परिचय - अंजु गुप्ता Am Self Employed soft skills Trainer with more than 23 years of rich experience in Education field. Hindi is...

  • कहानी- समर्पण

    कहानी- समर्पण

    सुबह -सुबह चाय की चुस्कियों के बीच राहुल ने पत्नी सोना से अचानक पूछा – “क्या तुमने कभी किसी से प्यार किया है?“ यकायक ऐसा अटपटा प्रश्न सुन कर सोना घबरा सी गई कि कहीं उसके मुँह...

  • नववर्ष

    नववर्ष

    बस कुछ पल और… बदलेगा वक्त । यह वर्तमान… समय सीमा को लाँघ, बन भूतकाल, बढ़ आगे … कर रहा है स्वागत “नववर्ष का” । चलो हम सब भी, भूल कड़वी यादें, करें स्वागत.. अपनों का,...

  • उम्मीद

    उम्मीद

    अपने झड़ते बालों को देख सुनिधि बुझ सी गई थी। धीमी सी आवाज में जय से बोली – “सुनो!मैं सोच रही थी कि अपने बाल कटवा लूँ। देखो ना कितने झड़ रहे हैं।” जय उसका चेहरा...

  • धागे

    धागे

    रिश्तों को सहेजने की खातिर,,, देखो… कैसे जूझते हैं धागे । कभी अकेले, तो कभी.. ले सूई को संग, इत भागे, कभी उत भागे।। इक हिस्से से मिलें, तो कभी दूजे से, करने को उनको एकसार।...

  • भविष्य

    भविष्य

    लक्ष्मी की जिंदगी दूसरों के ताने और अपमान सुनने में ही बीती थी। हिम्मत ही न थी कि अपना सुर ऊँचा कर अन्याय के खिलाफ दो शब्द बोल पाए । आज वही लक्ष्मी भरी बिरादरी में...

  • भुला के वादे…

    भुला के वादे…

    भुला के वादे… भूला के कसमें लाए डोली किसी ओर की सजना। उतर के डोली, जब आँगन तेरे, उसने पायल छनकाई थी… सच कहना एे साजन मेरे, तुम्हें याद मेरी क्या आई थी ? कन्धे पर सर,...

  • ख्वाब अपनी पलकों पे…

    ख्वाब अपनी पलकों पे…

    ख्वाब अपनी पलकों पे, दिन – रात मैं सजाती हूँ ! देख हँसी लब पे तेरे, मैं पहरों मुस्कुराती हूँ !! जुस्तजू मेरी हो तुम, मंजिल नहीं तुम बन सकते ! फिर भी दिल की महफिल,...