कविता

कविता

मुझ में भी… इक सागर हां! सिमटा है मुझमें भी,,, … इक सागर। जो रह कर मौन करता है समाहित खुद में,,, अनगिनत … तर्कों- वितर्कों को। नदियों समान लोग लाते हैं संग अपने मीठे पानी की तरलता और कभी …गरल और कचरा । कुतर्कों से हो उत्पन्न “वेग – द्वेष” जब सुलगता है मुझको, […]

बाल कविता

प्रकृति से खिलवाड़ कर…

प्रकृति से खिलवाड़ कर पहाड़ों जंगलों को काट कर विकास का दीप जलाया है ..पर यह हमने क्या पाया है।   ढांचागत विकास कर फैक्ट्रियों- मशीनों का निर्माण कर धरती के तापमान को बढ़ाया है ..पर यह हमने क्या पाया है।   गरम हो रही है धरती नदियों ने बदली है धारा यह खतरनाक रसायनिक […]

कविता

मां की स्तुति में धनुषाकार पिरामिड

दे माता आशीष हो कल्याण भवतारिणी दुष्ट संहारिणी जय मां जगदम्बे मैं ज्योति जलाऊं आरती गाऊं पुजूं तुझे नमन दुर्गा मां   है तुझे नमन मैया काली मनोहारिणी संकटनाशिनी सर्वविद्या दायनी ये कोरोना काल बना जंजाल वनदुर्गा विपदा हर लो   अंजु गुप्ता

कविता

मुझमें भी… इक सागर

  हां! सिमटा है मुझमें भी… इक सागर। जो रह कर मौन करता है समाहित खुद में,,, अनगिनत … तर्कों- वितर्कों को।   नदियों समान लोग लाते हैं संग अपने मीठे पानी की तरलता और कभी …गरल और कचरा ।   कुतर्कों से उत्पन्न “वेग – द्वेष” से जब सुलगता है मन, और खौलने लगता […]

लघुकथा

थप्पड़

  भरे पूरे परिवार वाली अम्मा का जीवन वैसे तो खुशहाल था, पर बड़े बहू – बेटे के पराएपन ने उनको अंदर तक तोड़ दिया था। पत्नी धर्म के आगे बड़े बेटे का मातृधर्म कहीं दब गया था। सीधे मुंह बात करना तो दूर, उनका हालचाल पूछना भी उसे भारी लगता था। आज वही अम्मा […]

कविता

मुखर लेखनी

हां! मुखर हो गई है,,, मेरी लेखनी लिखना नहीं चाहती… यह कविता! कैसे लिखे सुंदरता पर यह जब रोज मरे… “दरिंदगी” से सुता!! मुर्दों में तलाशें जो मुद्दे ऐसे “गिद्ध” चहुं ओर इसे दिखते हैं! देखके वादी प्रतिवादी का जाति-धर्म शिकार अपना,,, जो चुनते हैं! सत्ता – सियासत और टीआरपी वाले शतरंज की बिसात… बिछाते […]

कविता

बच्चे समझदार हो गए हैं..

बच्चे समझदार हो गए हैं… जब तक थे छोटे, थे हर बात पे लड़ते पल भर में खुश होते, थे पल भर में बिगड़ते ! थक जाती थी, झगड़े सुलझाते पर अब वही बच्चे… हैं मिलने भी न आते फोन पर भी हैं नहीं बतियाते क्या उम्र बढ़ने के संग, उनके जज़्बात कहीं खो गए […]

कहानी

रिहाई

आकाश में काले बादल घिर रहे थे और बिजली चमक रही थी, लगता था जैसे भयानक तूफान आने वाला है । पर उससे कहीं अधिक तेज़ तूफान देवप्रिया के भीतर चल रहा था ।” मैं गलत थी राजन कि मैंने तुमसे प्यार किया । तुमसे प्यार करना ही मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी […]

लघुकथा

लघकथा : धर्मनिरपेक्ष

धर्मनिरपेक्ष (कहानी में मुहावरों का प्रयोग) *नफरत की आग* से सारा शहर *धू-धू करके जल* रहा था और *गिरगिट की तरह रंग बदलने* वाला विपक्ष एक जुट हो सत्तारूढ़ पार्टी को *पानी पी पी कर कोस* रहा था। आखिरकार सौहार्द की कमान *दो धारी तलवार* वाले आपके नेता जी ने संभाली और *एड़ी चोटी का […]

कविता

कवि और कविता

कौन है रचनाकार यहां, है कौन रचे… यहां कविता रचे है कवि… खुद कविता को या कविता करती है …खुद कवि का चयन। कभी रमणी रूप से… हर्षित करे कभी बौधिक क्षमता से… मुग्ध करे, कभी मद्धम शांत सी बहे कविता कभी तोड़ दे तटबंध… बन कर सरिता। घटनाओं के वेग से,,, जब व्यक्ति, उत्तेजित […]