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  • कहानी : बटवारा

    कहानी : बटवारा

    अरुण जी की दूरदर्शिता का हर कोई कायल था ! कोई भी समस्या हो, कैसी भी समस्या हो, सब का समाधान होता था उनके पास ! पर कहते हैं ना, वक़्त कब करवट ले कोई नहीं...



  • वो मस्त दिन…

    वो मस्त दिन…

    तेरे ख्यालों में… गुजरने लगे हैं रात और दिन तू पास हो न हो, तू संग मेरे रहता है !! तेरे दीदार को… तरसने लगे हैं शामों – सहर तेरे इंतजार में, आँखों से मोती बहता...

  • अनजान मैं रही कि….

    अनजान मैं रही कि….

    अनजान मैं रही कि … क्या मंज़िल है मेरी पूरी शिद्दत से तेरी मंज़िल को अपना ही मानती रही ! अनजान मैं रही कि … ख्वाहिशें क्या होती हैं गुजरते वक़्त के संग तमन्नाएँ कम होती...

  • एकाकी पीपल

    एकाकी पीपल

    मेरे घर में भी था एक पीपल का पेड़! आस-पड़ोस, नाते-रिश्तेदार, सभी उसकी निर्मल छाया में ऐसे आकर बैठते थे, मानों उसका आशीर्वाद ले रहे हों ! पड़ोस के बच्चों को तो मानों उसके तले सारे...

  • इंतज़ार

    इंतज़ार

    कहते हैं प्यार किया नहीं जाता बस हो जाता है ! पर ना जाने क्यों, ये अक्सर वहीं क्यों हो जाता है, जहाँ कायदे से इसे नहीं होना चाहिए ! जमीं आसमान का फर्क था उन...

  • रिश्ते

    रिश्ते

    कुछ रिश्ते आदर, अपनापन, अनौपचारिकता और आकर्षण के रेशमी धागे इतनी कारीगरी से गुंथे होते हैं कि बिना नाम के ही इसकी खूबसूरती बनी रहती है ! ऐसे ही कुछ रिश्ते से बंधे थे जीनत और...

  • घाटे का सौदा

    घाटे का सौदा

    लाटरी लग गयी थी रानी की । एकदम खरा सौदा । कोई नीच काम भी नहीं था कि उसकी आत्मा उसको कोसती। करना ही क्या था… बस अपनी कोख किराए पर ही तो देनी थी, वो...