गीतिका/ग़ज़ल

नए एहसास …

छाने लगा फिर है, ख्वाहिशों का मौसम सरूर मुहब्बत का, सताने लगा है ! आलम क्या बताऊँ, दिल का मैं तुझको, वक़्त-बेवक़्त तू याद आने लगा है !! सपनों का आशियां, है फिर से सजाया बेवक़्त बारिशों का, डर सताने लगा है! ये सपने – ये रिश्ते, कहीं टूट न जाएँ इस डर से ही […]

लघुकथा

लघुकथा : धर्मनिरपेक्ष

नफरत की आग से सारा शहर धू-धू करके जल रहा था और विपक्ष एक जुट होकर सत्तारूढ़ पार्टी को पानी पी पी कर कोस रहा था। आखिरकार सौहार्द की कमान आपके प्रिय नेता जी ने संभाली और रैली में आए लोगों को बताया कि कैसे साम्प्रदायिक ताकतें धर्म के नाम पर नफरत फैला, इस देश का […]

कहानी

कहानी : परिवर्तन की लहर

मुक्ता लगभग 25 वर्ष की थी और शहर के नामी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग में लेक्चरर थी l विभाग में ज्यादातर लोग बड़ी उम्र के थे , इसलिए उसका मन अभी तक कॉलेज में रम नहीं पाया था । नए सत्र में कुछ नई नियुक्तियां हुईं थीं, उसी के चलते अनुभा ने अंग्रेजी विभाग में […]

कहानी

कहानी : नियति

हरफनमौला निर्मिति हर महफ़िल की जान हुआ करती थीं । शादी-ब्याह हो या कोई पार्टी, रौनक तो निर्मिति के आने के बाद ही आती थी। गाना-बजाना हो, शॉपिंग हो, मेहमानों की खातिरदारी या लेनदेन का मामला, उनके पास हर चीज का अच्छा खासा अनुभव था । छोटे से लेकर बड़े, सभी उनका बहुत मान करते […]

कहानी

कहानी: आपरेशन

निर्मला ने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों की सेवा में ही लगाई थी ! सबकी प्यारी और दुलारी निर्मला अम्मा की, घर में ही नहीं बाहर भी तूती बोलती थी । पर किसी ने सच ही कहा है कि समय एक सा नहीं रहता । बुढ़ापा अपने आप में एक बीमारी है । जो निर्मला अम्मा […]

लघुकथा

लघुकथा: विकलांग कौन ?

कुशाग्र बुद्धि का विक्रम बचपन से ही हर किसी का चहेता था। वह हर कक्षा में प्रथम आता था । उसके माता पिता ने भी उसके लिए अनगिनत सपने देख रखे थे । पर कहते हैं न कि भविष्य में क्या लिखा है यह किसने देखा ? एक दिन स्कूल से आते हुए वह दुर्घटना […]

संस्मरण

संस्मरण : जयमाला

बात उन दिनों की है जब मैं कालेज में पढ़ती थी ! हम आठ लोगों का एक बढ़िया सा ग्रुप था ! वैसे तो हम सब ही बहुत अच्छे थे, पर हमारी एक फ्रेंड “निशा” हमेशा ही दूसरों की मदद के लिए तैयार रहती थी ! कॉलेज खत्म होते ही हमारे दो दोस्तों “गायत्री और […]

सामाजिक

यक्ष प्रश्न

दिन-रात की भागदौड़, व्यस्तता की मारधाड़ और अधिक से अधिक पा लेने की चाह में, लगता है रिश्ते कहीं खो से गए हैं ! एक छोटे से कमरे में अपने पति और बच्चों के साथ रहने वाले माँ-बाप के लिए, आज बच्चों के चार बेडरूम वाले फ्लैट में जगह नहीं है क्योंकि घर छोटा है […]

लघुकथा

लघुकथा : लक्ष्मणरेखा

लक्ष्मणरेखा “हद होती है बेशर्मी की ! कम से कम बच्चों की तो शर्म की होती !” विछिप्त सा सोहम चिल्लाया ! “कहाँ कमी रह गई मुझसे? कौन सा ऐसा सुख था जो मैंने तुम्हें नहीं दिया, बोलो?” सोहम लगभग चिल्लाते हुए बोला ! क्या बोलती शुभी ! देखने में सच में कोई कमी ना […]

लघुकथा

संवेदनशील या संवेदनहीन? : लघुकथा

बहुत ही संवेदनशील थी वो ! खून देखते ही उसे उबकाई आनी शुरु हो जाती थी ! आज उसके घर के सामने एक गाय तड़प रही थी ! गाय के आप्रेशन पर उसके पेट से बहुत से पॉलीथिन बैग निकले ! उसे याद आया कि वह “सफाई पसंद” भी तो रोज़ गाय के लिए खाना […]