गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बनकर के आग तन-बदन में समाने के लिए मचल उठा है वो मेरे अंजुमन में आने के लिए रास आने लगी आरिज ओ गेसू की मस्तियाँ बढ़ने लगी तड़प ख़्वाब हकीकत बनाने के लिए महक उठा है मन का आँगन कुछ इस तरह बेताब है गुंचा ए गुल गुलदान सजाने के लिए चमकते हैं चाँद […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : बजती नहीं कोई झंकार जाते जाते

बजती नहीं कोई झंकार जाते जातेटूटते हैं दिल के अब तार जाते जातेवक़्त ए रुखसती हो चली अब तो यूँ बस हो जाता तेरा दीदार जाते जातेपिंजरे से पंछी पल भर में उड़ने को तैयारटूटती हैं साँसे होता न इंतज़ार जाते जातेसज़ जाती हिना गर महबूब के नाम की शमा पा लेती परवाने का प्यार जाते […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जिसके लिए मैंने अपनी हस्ती को मिटा दिया आज उसी ने मुझे जख्म दे दे कर तड़पा दिया अपने हसीं लम्हों को उस पर निसार किया उन्हीं लम्हों को उसने जिंदगी से हटा दिया कर दिया उसे जिंदगी से दरकिनार मैंने एक बेवफा से उम्र भर को पीछा छुड़ा दिया कभी कभी खुद से ही […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : ये कैसा शहर है…

सन्नाटों में हैं चींखें ,लुट जाने का डर है बताओ तो मेरे दोस्तों ये कैसा शहर है चारों तरफ हाहाकार चारों तरफ चीत्कार है मेरे अधूरे सपनो का ये कैसा नगर है कभी खुशियाँ अपार तो कभी गम के साए ये जिंदगी मेरे यारों बस एक मीठा सा जहर है उम्र गुजर जाएगी मेरी यूँ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : बजती नहीं कोई झंकार जाते जाते

बजती नहीं कोई झंकार जाते जातेटूटते हैं दिल के अब तार जाते जातेवक़्त ए रुखसती हो चली अब तो यूँ बस हो जाता तेरा दीदार जाते जातेपिंजरे से पंछी पल भर में उड़ने को तैयारटूटती हैं साँसे होता न इंतज़ार जाते जातेसज़ जाती हिना गर महबूब के नाम की शमा पा लेती परवाने का प्यार जाते […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : क़यामत होने को है

दिल से दर्द रुखसत होने को है हमें ग़मों से फुर्सत होने को है दुश्मनों के खेमे में दोस्ती के चर्चे कुछ जीने की मोहलत होने को है परतें  उठने लगीं जो हर किरदार से रुबरू जिंदगी से हकीकत होने को है इज़हार ए प्यार लबों की ख़ामोशी में  आज नज़रों की बदौलत होने को है हुए उनके दिल ए जागीर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : दिलों को मिला देती है

Rajiv Chaturvedi जी दादा का एक शेर पढ़ा और पढ़कर बहुत अच्छा लगा और शब्द उतरते चले गये“जिन हवाओं को हक़ नहीं मिलता है यहाँ ,आँधियाँ बन कर दरख्तों को हिला देती हैं .” —- राजीव चतुर्वेदीजलाती हैं तेज धूप में अंगारों पर चलाती हैं ,जख्म दर जख्म ये हमें कैसा सिला देती हैं .अंधेरों में […]