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  • मुक्तक : मरम्मत

    मुक्तक : मरम्मत

    सजदे में  ग़र हो सर तो  नेमत अता करे बुझते  हुए  दिए  की हिफाज़त हवा करे ईमान बांध  कर चलें जो उसकी राह पर बिगड़े  मुक़द्दरों  की  मरम्मत  ख़ुदा  करे

  • शहर की हालत

    शहर की हालत

    कोई   हंसती   हुई   सूरत   नहीं   देखी  जाती अब तो इस शहर की हालत नहीं  देखी जाती रश्क करते  हैं  सभी  मेरी  लिखी ग़ज़लों पर उनसे  ज़ख़्मों  की  इबारत  नहीं  देखी जाती दिल  में जलता  है पर...

  • चले गए- ग़ज़ल

    चले गए- ग़ज़ल

    इक पल को मुस्कुराये रुलाकर चले गए आये  ज़रा  सी  देर  को  आकर चले गए मुद्दत  से  बादलों  का  हमे  इंतज़ार  था बरसे मगर वो प्यास  बढाकर  चले  गए इस दर्जा तल्ख़ियों की वजह उनसे पूछली...

  • बे  – रूखी

    बे – रूखी

    शक़्ल दिल  की  गवाह  नहीं  होती रौशनी    हर   जगह   नहीं    होती कुछ ना  कुछ तो गलत हुआ होगा बे –  रूखी   बे – वजह  नहीं  होती

  • वक़्त

    वक़्त

    वक़्त   जैसा   भी  हो  वैसा  ही  काट  लेता  हूँ ग़ैर  का  दर्द   भी  अक्सर  में  बाँट   लेता   हूँ ज़िन्दगी तुझसे ये फुर्सत कभी मिले न  मिले सुकूँ  के  लम्हों  को  ग़म...

  • सवाल

    सवाल

    इक तो नज़र के तीर ने मुझको निढाल कर दिया उसपर अदा-ए-शोख़ ने कैसा  कमाल कर दिया मैंने  जो  अपने  प्यार  का  उनसे मुतालबा किया उसने जवाब-ए-इश्क़ में मुझसे सवाल कर दिया

  • प्यार हो जायेगा

    प्यार हो जायेगा

    मेरी आँखों में देखा तो खो जायेगा ये सितम ही सितमग़र पे हो जायेगा कोशिशें ग़र हमारी मुसलसल रहीं एक ना एक दिन प्यार हो जायेगा

  • ज़ख़्म

    ज़ख़्म

    ज़ख़्म अपने कुछ इस तरह तराशते हैं मकान बंद है हम फिर भी उसमे झांकते हैं चाँद है दूर बोहोत दूर हमारी ज़द से अजब जुनू है बा उम्मीद हो के ताकते हैं बात जिससे भी...

  • लम्हे

    लम्हे

    मेरे ख़्यालों की नरम चादर में उलझे लम्हे तरस रहे हैं जो तेरी ख़ुश्बू से तर थे पहले क्यों आज ख़ाली गुज़र रहे हैं यही वो दिन थे यही वो रातें यही थे मंज़र यही वो...