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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जख्म पर मरहम रखकर गया, वही अक्सर जख्म देकर गया । रौशनियां जो करता फकत, अंधेरा वो खुद कर गया । हौसलों की उड़ान क्या? पंख वो ही क़तर कर गया । सितारे तोड़ लाने वाला,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जख्म पर मरहम रख कर गया , वही अक्सर जख्म दे कर गया । रौशनियां जो करता फकत , अंधेरा वो खुद कर गया । हौसलों की उड़ान क्या ? पंख वो ही क़तर कर गया...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ये मौसम है खुशगवार सखी प्रीतम से मुझको प्यार सखी ।   मेरी  प्रीत  की  अदा निराली उसका मुझको इंतजार सखी ।   दिन रात उसका नाम पुकारू जीवन भर का व्यवहार सखी ।   मेरी...


  • अंजुरी भर सपने

    अंजुरी भर सपने

    पोल के नीचे अक्सर वह दिखती पुरानी किताबों के कुछ पन्ने कुछ जोड़ तोड़ कर टूटे फूटे शब्द बोल बोल कर पढ़ने की कोशिश करती वह बड़ी अफसर बनना चाहती थी चुपके चुपके देखती अपने अधूरे...