कविता

छंद मुक्त रचना : सताती गर्मी

तपे जेठ दुपहरिया संझा गरम बयरिया। भोर ,शीतलता खोती रातें मुंह ढ़क के रोती। धरती का जलता सीना पशु पक्षियों का चैन छिना । बूंद बूंद को तरस रहे निस दिन नैना बरस रहे । सूरज अगन लगा रहा कानन उपवन जला रहा । हरित आंचल वसुधा का जला आई कहाँ से ये गरम बला। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जख्म पर मरहम रखकर गया, वही अक्सर जख्म देकर गया । रौशनियां जो करता फकत, अंधेरा वो खुद कर गया । हौसलों की उड़ान क्या? पंख वो ही क़तर कर गया । सितारे तोड़ लाने वाला, आसमां को लूटकर गया । कसम बुझे हुये चूल्हों की, रोटियाँ वो छीनकर गया । जिंदगी दुश्वार हो गई, […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जख्म पर मरहम रख कर गया , वही अक्सर जख्म दे कर गया । रौशनियां जो करता फकत , अंधेरा वो खुद कर गया । हौसलों की उड़ान क्या ? पंख वो ही क़तर कर गया । सितारे तोड़ लाने वाला , आसमां को लूट कर गया । कसम बुझे हुये चूल्हों की , रोटियाँ […]

बाल कविता

बाल गीत – आओ खेलें चिड़िया

आओ खेलें चिडिया फुदक फुदक ,कुछ कहती चिड़िया पंखों मे , दम भरती , चिड़िया मुन्ना बोला गीत सुनाओ मुन्नी बोली खेलें आओ दादी बोली दाने दे दो थोड़ा सा पानी पिलाओ होगी बड़ी ये भूखी चिड़िया फुदक फुदक, कुछ कहती चिड़िया बैठी थी ये अभी डाल पर गाती थी सुर औ ताल पर फिर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ये मौसम है खुशगवार सखी प्रीतम से मुझको प्यार सखी ।   मेरी  प्रीत  की  अदा निराली उसका मुझको इंतजार सखी ।   दिन रात उसका नाम पुकारू जीवन भर का व्यवहार सखी ।   मेरी साँसों मे वो बस रहा है मन मे सरगम सी झंकार सखी ।   सुन लो प्रीतम मन की […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल – ऐसी पिला 

  ऐसी पिला यारब कि जीने का सामान हो जाए ये मिरी जिंदगी भी मुझ पर मेहरबान हो जाए । उनके आने की खबर से दिल यूं मचलने लगा आकर के वो जिंदगी भर के मेहमान हो जाए । सोचा इक गजल लिखूँ तिरी मुहब्बत की जानिब ताउम्र की खातिर तू भी मिरी कद्र्दान हो […]

कविता

अंजुरी भर सपने

पोल के नीचे अक्सर वह दिखती पुरानी किताबों के कुछ पन्ने कुछ जोड़ तोड़ कर टूटे फूटे शब्द बोल बोल कर पढ़ने की कोशिश करती वह बड़ी अफसर बनना चाहती थी चुपके चुपके देखती अपने अधूरे रंगहीन सपने जिसे पूरा करना शायद उसके बस मे नहीं था फिर भी सपने देखती , हसरत थी विश्वास […]