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  • कंगाली में आटा गीला

    कंगाली में आटा गीला

    वे भाग गए हैं। वे अपनी लुंगी धोती सब समेट के विदेश भाग गए हैं । आप कहते हैं कि अपनी एक एक पाई बसूल कर करेंगे । वे कहते हैं अपनी धोती भी न देंगे...


  • व्यंग्य : चोटी की प्रधानता

    व्यंग्य : चोटी की प्रधानता

    हमारे देश में आजकल धड़ाधड़ चोटियां काटी जा रही हैं ।अभी बिहार में लालू यादव की चोटी कट गई ।देश में कांग्रेस की चोटी प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति यहां तक की उपराष्ट्रपति पद तक कट गई।जी...


  • व्यंग्य

    व्यंग्य

    व्यंग्य में इतनी आपाधापी,अंतर्विरोध क्यो है ?हम आगे बढ़ने के बजाय कदमताल क्यों करने लगते हैं। ऐसा क्यों है ? ऐसा व्यंग्य में ही क्यों है ? आखिर व्यंग्य का सही विधान क्या है ? या...

  • चिन्दी चिन्दी हिन्दी (व्यंग्य)

    चिन्दी चिन्दी हिन्दी (व्यंग्य)

    चिन्दी चिन्दी दिन गुजरा चिन्दी चिन्दी रात गयी चिन्दी चिन्दी हिंदी में चिन्दी चिन्दी बात गयी । हमारे देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक हिंदी का सिर्फ नाश होता है मगर बिहार से बंगाल आते आते...

  • एक व्यंग्य, हे दलित श्रेष्ठ।

    एक व्यंग्य, हे दलित श्रेष्ठ।

    ज्योतिराव फुले द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द दलित आज राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है या यूँ कहूँ की ये राजनीति की धुरी है तो गलत नहीं होगा। सवाल उठता है दलित कौन हैं? क्या वर्ग...

  • ज़िन्दगी ।

    ज़िन्दगी ।

    शिकायतों और उम्मीदों के बीच कहीं एक पतला सा धागा है बस इतनी ही है ज़िन्दगी उम्मीदों की डोरियों से जब दूसरों के मन बंध जाते हैं तब शिकायतें सिरों पर टिकती नहीं हैं अक्सर फिसल...

  • नदी को मनुष्य का दर्जा

    नदी को मनुष्य का दर्जा

    नैनीताल हाइकोर्ट ने गंगा और यमुना को मनुष्य का दर्जा दिया है । क्या कोई ऐसी अदालत है जहां मनुष्य को नदी का दर्जा दिया जा सके । आप सोचेंगे ये क्या पागलपन है । हाँ...

  • एक कविता ……वेदी

    एक कविता ……वेदी

    प्रज्वलित कर मन की वेदीकर्मों की ले समिधा बना कुछ धृत अश्रु चढ़ा तभीएक हवन कुंड खुद में बना।। पत्त्थर पत्त्थर भगवान हैइंसान अब पत्थर बना राम का नाम जपतापाप से है मन सना।। खुद को...