कविता

बुद्ध आ रहे हैं

बुद्ध आ रहे हैं द्वार पर भिक्षापात्र हाथ में लिए उनकी पदचाप की ध्वनि में समस्त सृष्टि का मौन गुंजायमान है शून्यता से भरे पात्र में स्वयं को दान करना चाहती हूं पर, हे बुद्ध मन लज्जाजनक दुविधा में कंपायमान है बनती हूं कभी सुजाता कभी प्रियंवदा और आम्रपाली अनंत जन्मों से आत्मा अनवरत यात्रा […]

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पिता का पता

पिता को पत्र लिखा था वह मृत्यु के नगर गए थे और अब पते की जरूरत थी सब भाषाओं को देखा अनंत धर्मग्रंथ खंगाले शब्दकोषों की धूल खाई पर पता नहीं मिला अपने बाल नोचती सारी पृथ्वी का भ्रमण करती एक दिन पहुंची चेतना के नगर ज्ञान की गली में ध्यान का द्वार और द्वार […]

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पिता का वृहत हस्त

सारा ब्रह्मांड समाया है पिता श्री के हस्त में कितना सार अवलंबित है विधिस्मंत इस तथ्य में। जिसने भी कहा है या तो उसने इस प्रत्यक्ष ज्ञान को जिया या मात्र बोध प्राप्त करने का उपाय भर किया। अन्तःकरण पर स्थापित चिंतन का अतिरेक पिता विस्तार है ब्रह्म का, समझ गई यह भेद। पिता श्री […]

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शरद पूर्णिमा में रास

शरद यामिनी प्रगटे निधिवन परमानंद गुण अद्वैत गोपाला शीश मुकुट श्रवण मीन कुंडल कंठ विभूषित वैजयंती माला पीतांबर धारे आभूषण सजीले कटि पर मधुर किंकिणि चंगी नख से शिख सब अति सुंदर वंशी लिए मुस्काये त्रिभंगी उन्मुक्त भयीं समस्त ब्रज नारी स्वामी, कुटुंब, भवन बिसारे रासभूमि में आईं सखियां श्याम विरह का क्षोभ निवारे मुदित […]

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दिव्यांग दोस्त के नाम

रात्रि के कालभुजंग तमस में जुगनू का क्या सामर्थ्य फिर भी जुगनू दमकते हैं वह जगमगाते हैं क्योंकि यह उनकी प्रकृति है जब असंख्य जुगनू टिमटिमाते हैं तो अंधेरे परास्त हो जाते हैं मैं तुमको सोचती हुई जाने कितने शब्दकोशों की सुनहरी जिल्दें खोलती हुई अन्वेषण कर रही हूं शब्दों का ताकि तुम्हारे अंदर द्वंद […]

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मैं पृथ्वी सी

जीवन चक्र के प्रस्फुटन के प्रमाण हुए हैं चिन्हित पृथ्वीमंडल के शैलखंड पर धरा पर अस्तित्व का हस्तलेख अंकित है किसी विस्मृत भाषा में और कई पृष्ठ अंतर्ध्यान हो गए निमर्म कालचक्र के हाथों में त्यक्त हुए भग्नावशेष हर दिशा में। जैसे मेरे होने के प्रमाण हुए हैं अंकित मेरे अवचेतन पर जीवन यह परम […]

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स्वयंप्रभा

निरर्थक साधनाओं में कैद होता संसार तुमको तलाशता सुदूर तीर्थों में और मैं लिखती हूं तुम्हारी विस्तृत हथेली पर वो तमाम प्रणय गीत जो मेरा ह्रदय गाता है। व्यर्थ कर्मकांडों के वशीभूत होता संसार तुम को ढूंढता बेमतलब क्रियाओं में और मैं निमग्न होती हूं उस चरमबिंदु पर जहां आसन-रत हो प्रेम ईश्वर हो जाता […]