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  • पिता का वृहत हस्त

    पिता का वृहत हस्त

    सारा ब्रह्मांड समाया है पिता श्री के हस्त में कितना सार अवलंबित है विधिस्मंत इस तथ्य में। जिसने भी कहा है या तो उसने इस प्रत्यक्ष ज्ञान को जिया या मात्र बोध प्राप्त करने का उपाय...

  • शरद पूर्णिमा में रास

    शरद पूर्णिमा में रास

    शरद यामिनी प्रगटे निधिवन परमानंद गुण अद्वैत गोपाला शीश मुकुट श्रवण मीन कुंडल कंठ विभूषित वैजयंती माला पीतांबर धारे आभूषण सजीले कटि पर मधुर किंकिणि चंगी नख से शिख सब अति सुंदर वंशी लिए मुस्काये त्रिभंगी...

  • दिव्यांग दोस्त के नाम

    दिव्यांग दोस्त के नाम

    रात्रि के कालभुजंग तमस में जुगनू का क्या सामर्थ्य फिर भी जुगनू दमकते हैं वह जगमगाते हैं क्योंकि यह उनकी प्रकृति है जब असंख्य जुगनू टिमटिमाते हैं तो अंधेरे परास्त हो जाते हैं मैं तुमको सोचती...

  • मैं पृथ्वी सी

    मैं पृथ्वी सी

    जीवन चक्र के प्रस्फुटन के प्रमाण हुए हैं चिन्हित पृथ्वीमंडल के शैलखंड पर धरा पर अस्तित्व का हस्तलेख अंकित है किसी विस्मृत भाषा में और कई पृष्ठ अंतर्ध्यान हो गए निमर्म कालचक्र के हाथों में त्यक्त...

  • स्वयंप्रभा

    स्वयंप्रभा

    निरर्थक साधनाओं में कैद होता संसार तुमको तलाशता सुदूर तीर्थों में और मैं लिखती हूं तुम्हारी विस्तृत हथेली पर वो तमाम प्रणय गीत जो मेरा ह्रदय गाता है। व्यर्थ कर्मकांडों के वशीभूत होता संसार तुम को...