मुक्तक/दोहा

दोहे : नारी

नारी तू नारायणी, तुझसे जग विस्तार । इस जग मे तेरा हुआ , क्यों जीना दुश्वार ॥ गर्भपात करवा रहे , जाना कन्या रूप । जीवन तेरा है कठिन, जैसे तपती धूप॥ देवी कहकर पूजते, यहाँ दोमुहे लोग । नारी की इज्जत नहीं, करते हैं बस भोग ॥ समय विकट है आ गया, अन्धकार चहु […]

कविता

धरा

मैं धरती हूँ मात तुम्हारी, गहना मेरा हरियाली । क्यों बालक होकर भी खुद, मां का श्रंगार मिटाते हो ।अनाज उगाकर ह्रदय मेरे, घर में खुशहाली लाते हो । जीवन बिन ब्रक्ष नहीं होगा, खुद लाते हो बदहाली । अगर चाहो सुंदर हो जीवन ब्रक्षारोपण यहाँ करो । ब्रक्ष नहीं होगे जो यहाँ पर, धरा […]

कविता

तेरी बाहो के झूले में

तेरी बाहो के झूलो में, कुछ ऐसे मैं खो जाऊं । प्यार की डोर से बँधकर मैं, दूर गगन मे उड जाऊं । रहे सुरक्षित सीप में मोती, तेरे संग खुद को पाऊ । तेरे लिए ही गीत लिखे सब, तेरे लिए उन्है गाऊ । मेरी खुशियां हैं तुझसे ही, पाऊ तुझको जनम जनम । […]

कविता

प्यारे पापा

उन्गली पकडकर चलते चलते, मैं जब भी गिर जाती थी । मुझे उठाकर लाड लडाते, मैं झट से हस जाती थी । हर छोटी सी जीत मुझे वो, जग जीता सा बतलाया । पाया जब जब मुझे अकेला, साथ खडा उनको पाया । मां मुझको जब डाट लगाती, मां की गलती ढूंढ रहे । जब […]

कविता

सावन

छाई है घनघोर घटा फिर, रिमझिम है बरसा सावन। दादुर मोर पपीहा बोले, अरु भीगा मेरा तन मन । जब बरसे सावन ओ साजन, बीते पल तडपाते हैं। नैन नीर होता है मेरे, आंसू झरते जाते हैं । ऐसी भी क्या मजबूरी है, मुझको भूले बैठे हो ? खता हुई है ऐसी भी क्या, जो […]

कविता

विष्णु पद छन्द : चांद रातें

जगमग जगमग चमक रही हैं , चाँद संग राते । कुछ सपने लेकर आयी हैं, लायी सौगाते । बडे सजीले थे वो सपने, तुमने दिखलाए । याद उन्हे अब कर रही हू, दिल को बहकाए । तेरे लिए ये गीत लिखे हैं , तुमको ही गाऊ । बस तुमको ही भजता मन , तुमको ही […]

कविता

अनबूझ पहेली

मैं अनबूझ पहेली हूँ खुद की ही सहेली हूँ होते हैं सभी संग मेरे लाखों में भी अकेली हूँ तेरी यादों को बुनती हर लम्हे को चुनती नहीं तूने साथ दिया ये सोच के हू घुनती । जब तुझको बुलाती हूँ मैं खुद को भुलाती हूँ तू फिर सपनों में आएगा यू खुदको बहलाती हूँ […]

कविता

मधुमास

सावन भादो मुझको अब कुछ तेरे बिना नहीं भाए पिया । छनछन कर बजती है तुमको पास बुलाए पायलिया । तुमसे जो मैं दूर हुई दिल मैं चुभी है ऐसी फांस । लौट के तुम जो आ जाओ पतझड बन जाएगा मधुमास । तुम बिन हूँ मैं कितनी अकेली जीवन तुम बिन ये सूना । […]

गीत/नवगीत

भारत मां के लाल

भारत माँ के लाल वतन पर हस कर जान लुटाते हैं। धरा धाम का कर्ज चुका कर ओढ तिरंगा आते हैं। जब भारत की ओर कोई नापाकी नजर उठाता है । जब भारत माता का सीना छलनी सा हो जाता है । तब भारत मां के लाल वतन पर अपनी जान लुटाते हैं । कतरा […]

गीत/नवगीत

श्रृंगार

आज के विषय पर लावणी छन्द पर आधारित मेरा प्रयास कैसे भाए चूडी कंगन अरू माथे की बिंदीया । बिन साजन में तडपू ऐसे जैसे पिंजडे में चिडिया । याद तुम्हें जब मैं करती वो हिचकी आती तो होगी । अश्रु संग बहती कजरे की धार बुलाती तो होगी । हार गले का ऐसे लगता […]