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  • धरती माँ है

    धरती माँ है

    खोद रहा है आदमी विकास के नाम पर कर रहा है धरती का सीना छलनी ! फिर भी चुपचाप सह रही है इसकी चुप्पी कुछ कह रही है माँ हूँ तुम्हारी रक्षा करो विकास चाहिए या...

  • मेरी माँ

    मेरी माँ

    प्यारी-प्यारी मेरी माँ सबसे न्यारी मेरी माँ मुझे बिठाती गोदी माँ सुन्दर बनाती चोटी माँ होम वर्क करवाए माँ वीडियो गेम खिलाए माँ लंच बनाकर देती माँ बैग सजाकर देती माँ कहानी अच्छी सुनाती माँ मेंहदी...

  • मैं चाहता हूँ

    मैं चाहता हूँ

    मैं चाहता हूँ इंसान ,इंसान बने छोड़ दे लड़ना – झगड़ना ईश्वर का वरदान बने l कोई भूखा भी ना सोए रोटी के बिन जीवन ना अपना खोए l प्रेम से भरा संसार हो रंग नस्ल,...



  • अनंत प्रेम दो

    अनंत प्रेम दो

    मैं अधीर हूँ शाँत करो अनंत प्रेम दो हृदय मे धरो स्वप्न मे तुम रहो जीवन मे तुम रहो मेरी जिव्हा मेरे नेत्र मेरे हाथ और कलम बनो मेरी कविताओं मे गीतों मे तुम ही रहो...

  • मुस्कुराता चल

    मुस्कुराता चल

    राहें कठिन हैं किन्तु मुस्कुराता चल अपने दृढ संकल्प से काँटों को कुचल तारों को देखना है रातों को जाग कदम बढ़ा आगे संघर्ष से न भाग पुरुषार्थ में छुपा है मुसीबतों का हल सिन्धु में...

  • कविता : विकास

    कविता : विकास

    गगनचुम्बी ईमारते संगमरमरी सड़कें आरामदायक वाहन बड़ी बड़ी सुरंगें वायुयान, ,जलयान विद्युत्, दूरभाष दूरदर्शन, कंप्यूटर से आरामदायक जीवन जीने की कल्पना मंगल पर खोज रोगों पर विजय जैव प्रौद्योगिकी हर क्षेत्र में ‘विकास’ मन अशांत तन...