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  • दीवानगी

    दीवानगी

    पिकनिक का आनंद सभी ले रहे थे नाव हिचकोले खा रही थी और साथ ही मानस अपने उठती गिरती साँसों पर काबू पाने का असफल प्रयास कर रहे थे । मृदुल बच्चों के संग अंताक्षरी का...

  • कविता – मुस्कान

    कविता – मुस्कान

    कैसे हँसी विलुप्त हो रही  बेवजह जाने क्यों गूम हो रही दस्तक अब सुनाई नहीं देते कभी अब जो बिछड़े क्या मिलेंगे कभी। पूछती हूँ दिल से बार बार क्यों नहीं करते थोड़ा चमत्कार। जिंदगी ना...

  • लघुकथा – लौटते कदम

    लघुकथा – लौटते कदम

    कल कोर्ट में आखिरी फैसला होने वाला था । ऑफिस से थोड़ा पहले निकल कर अमृता वकील से मिलने चली गई। हे भगवान जिसका शक था वही हुआ ! सामने एडवोकेट मि.भूषण के दरवाजे से रवि...

  • कविता – गुनगुनी धूप

    कविता – गुनगुनी धूप

    सुनहरी धूप अंतस्तल में समाई बीते दिनों की यादें संग लाई । आँगन में कभी अपनों के संग मस्ती करते रहते थे हम संग संग। कहाँ गई वो धींगामस्ती  अम्मा की फटकार थी सस्ती। काश फिर...

  • लघुकथा – शुभस्य शीघ्रम्

    लघुकथा – शुभस्य शीघ्रम्

    “क्या सोच रही हो; मनुज के घर वालों से मिला जाये या नहीं ? सच में ! हमें शर्म आती है कि हमारी ही संतान विद्रोही बन कर हमें कड़वे घूँट पीने को पिछले चार सालों...

  • पीढ़ियों की मार.

    पीढ़ियों की मार.

    आज रसोई घर में बड़ी उठा पटक हो रही थी। नन्हा राहुल अपने खिलौने से खेलना छोड़ कर रसोई घर में आ गया और पूछा; “कमला ताई आप आज मेरे लिए डोसा भी नहीं बनायी दोपहर...

  • नम आँखें

    नम आँखें

    आज बिट्टू चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी । उसकी सारी सहेलियां अपने मम्मी पापा के साथ पूजा की छुट्टियों में घुमने जा रहे थे। प्रणय को समझ में नहीं आ रहा था...

  • कविता – जगतजननी

    कविता – जगतजननी

    हे माँ तेरी मोहनी छवि आँखों में बस जाये सुधबुध बिसरा कर मनवा तेरे ही गुण गाये कैसी लगन लगाई मैया दिल तुझको ही बुलाये मैया-मैया रटते रटते सुबहो-शाम बीत जाये कैसे ध्यान लगाऊँ तुझमें तन-मन...

  • छतरी

    छतरी

    “सुनों बेटा हो सके तो एक छतरी अपने दूधवाले भइया के लिए लेकर आना आज बाजार से । कई दिनों से बरसात की वज़ह से रामदास भींग रहा है। पूरे महीने जितनी आमदनी नहीं होगी उससे...

  • करनी का फल

    करनी का फल

    “माँ आपने छोटू भैया को अपने घर के अंदर क्यों नहीं आने दिया ?भैया आधी रात में कहाँ जायेंगें ।माँ आप कहती थी कजिन मत कहो , फिर अचानक आपने भैया को पराया क्यों कर दिया...