कविता

असहाय की हाय

जल थल नभ सब हुए विकल देख धरा पर हाहाकार अनदेखा भय भयभीत करे मानव अब मानव से ही डरे स्वच्छ चाँदनी फैली चहुँओर कवि हृदय विकल सब ओर क्यों कर ऐसी आफत आई सुझे नहीं जवाब किसी को भाई तन-मन अब सब थक रहा एकांत ही सुरक्षित कह रहा। कितनी भीषण आफत आई जान […]

कविता

शुभ नवरात्रि

नवरात्रि माँ के लिये श्रद्धा सुमन :— हे जगतजननी माँ  हे माँ तेरी मोहनी छवि निहारूं   सुधबुध बिसरा कर तेरे गुण गाऊं । ऐसी लगन लगाओ मैया तेरा नाम पुकारूं  मैया-मैया रटते अपनी सुधि बिसराऊँ।  ध्यान लगाओ ऐसी माता मैं बेटी बन जाऊं  हँसी उड़ायें दुनिया वाले मैं पगली कहलाऊं। तंत्र-मंत्र का ज्ञान नहीं सुमिरन […]

लघुकथा

जल है तो कल है

“पापा घर में बैठे बैठे बोर हो गया हूँ । पहले तो आपको ऑफिस वालों ने वर्क एट होम शुरू करवाया । बाद में मेरा इण्टनेशनल स्कूल वालों ने क्लास एट होम की व्यवस्था कर दी ।” “अब आप ही बताओ बिना घर से बाहर निकले पिछले पंन्द्रह दिनों से रह रहा हूँ । थक […]

लघुकथा

श्रद्धापुष्प (पूजन सामग्री)

“ए बहूरिया मैं मंदिर जा रही हूँ ,तुम भी पीछे से आ जइयो । साथ में पूजन सामग्री भी लेती अइयो ।” “मैं ले जाती , लेकिन तू हमसे ज्यादा पढ़ी लिखी है , हमसे बेहतर जानत हो , उनकी जरूरतों को ।” “अम्मा माना कि मैं पढ़ी लिखी हूँ पर मैं कैसे जानूँ कि […]

कविता

ज़हर (कविता )

प्रकृति को जननी हम कहते हैं फिर भी उसकी पीड़ा अनदेखी करते हैं। क्यों बेबस लाचार हुए शिक्षा का दंभ भरनेवाले सारे तंत्र बेकार हुए। प्रकृति अपना संतुलन स्वयं करती है। सदियों से प्लेग महामारी एवं दैवी प्रकोप से ऐसी बातें भूलकर हम बस जीये जा रहे हैं जहरीली हवाओं को रोकने की कोशिश में […]

लघुकथा

आखिरी मंजिल

आँखों से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था आँखों में मोतियाबिंद उतर आया था ।वे टटोलते हुए अपनी दवा टेबुल पर ढूँढ़ रहे थे। अचानक हाथ में तस्वीर आ गई ।आँखें भले ही धूँधली थीं मगर यादें आज भी तरोताजा बिल्कुल ओस की बूँदों के माफिक अपनी पत्नी  रचना की तस्वीर  मुन्ने के साथ उन्होंने […]

लघुकथा

ये कैसी प्यास

हर रोज इक प्यास है । होठ अक्सर शुष्क रहते हैं , कोल्डड्रिंक्स एवं स्नैक्स से फ्रिज भरा हुआ है , फिर भी मन बेचैन है क्यों ?  यह सवाल अक्सर उसे अतीत के द्वार खौलने पर विवश कर देता है । क्यों दिल के हाथों मजबूर हो जाता हूँ ? कल ही तो ढ़ेर […]

कविता

प्रीत की रीत ( कविता )

प्रीत की रीत काश सीख पाती  मीरा जैसी प्रीत जगाती तन-मन की सुधि बिसराऊँ  मीरा के रंग में मैं रंग जाऊँ इस जग की है रीत निराली प्रेम बिना जीवन पतझड़ है। भक्ति की रीत कैसे निभाऊँ कैसे कोमल मन बहलाऊँ। मीरा बनकर भजन मैं गाऊँ श्याम के रंग में मैं रंग जाऊँ। भक्ति-भाव में […]

लघुकथा

सरहद का साँवरा

प्रिया से फोन पर बातें करते हुए शौर्य बीच-बीच में कुछ पल के लिए बिल्कुल खामोश हो जाते थे । प्रिया से नहीं रहा गया वह पूछ बैठी; “क्या बात है शौर्य, लगता है आप परेशान हैं ? “अरे ! नहीं नहीं , मैं परेशान भी हूँ तो तुम्हारी वज़ह से एवं माँ पिताजी की […]

लघुकथा

नामकरण

सुदर्शन जी को चाय देकर शोभा बाग में आ गई , पीछे पीछे सुदर्शन जी भी आ गये। शोभा बाग के हर पेड़-पौधों से बातें कर अपना दिल बहलाती थी। शोभा को अपने साँवलेपन एवं छोटी नाक से कोई शिकायत नहीं थी । लेकिन अपनी तकदीर से अक्सर शिकायत कर रो पड़ती थी । विवशताओं […]