कविता

सरहद के सपूत

हद से बढ़कर सरहद से प्यार है माँ की ममता सा दुलार है। कभी माँ का लाडला हुआ करता था अब तो बस माँ भारती से ही प्यार है। दंभ हमें छू ना पाये दुश्मन की क्या औकात है? मैं हूँ फौजी नहीं बन सकता मनमौजी सारी दुनिया जब सो जाती है मेरी आँखें दुश्मन […]

लघुकथा

लिखे जो खत तुझे

कामिनी जी बड़ी बेचैनी से डाकिये का इंतजार कर रही थी । आखिर क्यों ना इंतजार करे , गाँव में इण्टरनेट नहीं होने के कारण अपने पोते से चिट्ठी भेजकर ही संदेश और प्यार लुटाती थी ।और रवि भी अपनी दादी को कम से कम महीने में एक खत जरूर भेजता था । डाकिया जैसे […]

कविता

फूलों की जूबानी

फुल नहीं कहता किसी से आओ मुझसे प्यार करो मोहनी मुस्कान इसकी बरबस हमें लुभाती है। काँटों भरे दामन में रहकर मुस्कूराना सिखाती है। आकर्षण में मत उलझना कली हूँ फूल बनने दो जरा। मस्त यौवन पाकर खुबसूरत दुनिया को देखने दो जरा। सारे फुल मुरझाने से पहले खिलखिलाने लगे। मस्त पवन के झोंके उनकी […]

लघुकथा

तेरी बाहों में

रात के बारह बजने वाले थे और रसोईघर का काम खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था । कल की तैयारी में व्यस्त थी । तभी ऐसा लगा मानों किसी ने अपनी बाहों में भर लिया हो। अररे वाह स्पर्श में कशिश भी है और कुलबुलाहट भी ! सुखद स्पर्श से अभिभूत हो शनैः […]

कविता

प्रेमरंग

प्रीत की रीत काश सीख पाती मीरा जैसी प्रीत जगाती तन-मन की सुधि बिसराऊँ मीरा के रंग में मैं रंग जाऊँ इस जग की है रीत निराली प्रेम बिना जीवन पतझड़ है। भक्ति की रीत कैसे निभाऊँ कैसे कोमल मन बहलाऊँ। मीरा बनकर भजन मैं गाऊँ श्याम के रंग में मैं रंग जाऊँ। भक्ति-भाव में […]

लघुकथा

आदर्श सन्यासी (लघुकथा)

फूल ले लो…हाँक लगाता हुआ ठेलेवाला जैसे ही सोसायटी में आया महिलाएँ निकल पड़ीं अपने लिये फूल और गमले खरीदने ।“अररे ये क्या ! ओ ठेलावाले भैया अपना ठेला या तो आगे बढ़ा लो या पीछे कर लो ।”“क्यों मेमसाब?”“तुम्हें पता नहीं है तेरी हाँक से एवं हमारी गपसप से शर्मा दंपति का मूड खराब […]

लघुकथा

लघुकथा – अर्वाचीन

घर में कदम रखते ही बेटे को सरप्राइज देने  की इच्छा परी की धुमिल हो गई ।क्योंकि एक मैसेज मम्मी पापा के नाम किशोर ने भेजी थी ।मैसेज से कुछ स्पष्ट नहीं हो रहा था बस इतना ही लिखा था आप दोनों मुझे माफ कर देना। यात्रा की थकान भूल कर सबसे पहले किशोर के कमरे […]

कविता

अपनापन

तेरी मासूमियत तुझे मार डालेगी भटक मत जाना तू अंजान राहों में ऐसी नादानी किस काम की बाँहें फैली रह जाये किसी के इंतजार में सिमटी सिकुड़ी खामोश सी है तू झुलस मत जाना कभी गर्म सासों में तुझे अनदेखा कर कोई भला कैसे चैन पायेगा दूर जाना भूल आ जाये चंचल चितवन बाहों में […]