गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हुआ जा रहा इश्क़ तारी लगे। कि जी में अजब सी खुमारी लगे।। जरा ग़म के आते दफ़ा हो गई ख़ुशी दाँव हारी जुआरी लगे। बहुत देर रोया सुना जो मुझे, कहानी  है इक सी हमारी लगे। दुआ ओ दवा का असर भी हुआ, नज़र भी किसी ने उतारी लगे। हँसाता, रुलाता ,नचाता हमें, ख़ुदा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चौराहों पर चुप्पी बैठी, सड़कों पर सुनसान खड़ा। बेबस होकर माया बैठी, कोने में अभिमान खड़ा।। समय नहीं था पल भर हमको भागा दौड़ी इतनी थी, आज समय को काटें कैसे प्रश्न पकड़ कर कान खड़ा। मुरझाई है राहें तकती, कच्ची केरी पेड़ों पर सिसक रहा है खेतों में वो, अरसे से जो धान खड़ा। मंदिर […]

मुक्तक/दोहा

दोहे

निज घर क्यों वंचित रहे,ध्यान धरे सरकार। दिवस मनाने मात्र से,कैसे हो उद्धार।। हिंदी भाषा में सभी, प्रकट करें उद्गार। सीधी,सादी है सरल, विस्तृत है संसार।। आखर-आखर लाख के,मीठे इसके बोल। हिंदी जननी सम समझ,हिंदी है अनमोल।। तुलसी मीरा जायसी, बोले जो रसखान। रचती पीर कबीर की, हिंदी अपनी शान।। भारतेंदु का युग बना, लेकर जिसकी छांव। […]

कुण्डली/छंद

घनाक्षरी

निज पहचान हिंदी, मान अभिमान हिंदी, भाषाओं की शान हिंदी, मोल पहचानिए। एकता की भाषा हिंदी, उच्च परिभाषा हिंदी, जगती की है आशा हिंदी, बात मेरी मानिए। ध्यानियों का ध्यान हिंदी, ज्ञानियों का ज्ञान हिंदी, सहज विधान हिंदी, सारी भाषा छानिये। माता के समान हिंदी, भारती की जान हिंदी, बोले संविधान हिंदी, प्रण ऐसा ठानिये।

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

हमारी शान है हिंदी,हमारा मान है हिंदी। कई भाषा भले बोलें,मगर पहचान है हिंदी।। करें संकल्प दुनिया में,बढ़े हर दिन,चलन इसका। हमारे शौर्य की गाथा, विजय का गान है हिंदी।।

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कराके  वो बेटी विदा ले गए। लगा,पूँजी सारी जमा ले गए।। भले लाख दौलत हो तुम पे मगर क्या सोने के मुँह में निवाले गए। किनारे-किनारे चले साथ जो, हमें संग अपने बहा ले गए। सदा रहती  बोझल सी साँसे मिरी, हमें ग़म ये किसके दबा ले गए। पकड़ कर हथेली छुड़ा ली भले, कहाँ […]

मुक्तक/दोहा

दोहे : शिक्षक दिवस पर

शिक्षा मंदिर में जला,  सदा ज्ञान का दीप । मोती गढ़ते रात दिन, बना स्वयं को सीप बहते शिक्षक हर दिशा, बनकर,अमृत धार। ज्ञान सरिता निज बहा, हरित करे संसार कोरी मिट्टी को गढ़े,दे दे कर निज थाप। इनकी थपकी में लखें, इनकी ममता आप।। निज साँसों के दीप से,चमकाये संसार। ऐसे गुरुवर को नमन, ‘आशा’  बारम्बार।। माँ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जितना जी चाहे तेरा यार सता ले मुझको। अपने सीने से मगर आज लगा ले मुझको। बढ़ गया उसकी जफ़ाओं का सितम यूँ मुझ पर चैन दे अब तो ख़ुदाया या उठा ले मुझको । मन के सहरा में कहां से ये समंदर आया, मौजे-ग़म कौनसी हर रोज उछाले मुझको। मैं तुम्हारी हूँ तुम्हारी ही […]

कविता

सात वर्ण पिरामिड

1 वो फूंदी लँगड़ी कंचे,झूले आँख मिचौली छूट गए सब अपने हमझोली 2 लो फिर हमको घेर लिया उन यादों ने थी जो हमारे बचपन का हिस्सा 3 मैं तुम पीपल बरगद ऊँची छलाँगें सब छूट गए सिर्फ़ यादें उनकी 4 तू बता दोबारा मिला तुझे वो बचपन जो छूट गया था उम्र की चौखट […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इतराये बादल। छुप जाये बादल।। रो रो कर आँसू, ढलकाये बादल। प्यासी देख धरा झट छाये बादल। आज जुल्म इतना, क्यूँ ढाये बादल। कुछ यादों के हैं, ज्यूँ साये बादल। सावन झूले पे, बलखाये बादल। संग हवा के क्यों उड़ जाये बादल। धा धा धिर धिर धा, कुछ गाये बादल। झुक-झुक चलते हैं, शरमाये बादल। […]