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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कितनी गहरी झीलें हैं कुछ ग़म की तफ़सीलें हैं छेड़ न उसके ज़ख़्मों को रूह में गहरी कीलें हैं बच्चों की हंसती आँखें या रौशन कंदीलें हैं दो पल तू भी हंस के देख सुख की...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    गुज़र जाएगी यह शब हौसला रख सुबह के वासते दर को खुला रख सज़ा दे-दे या खुद को माफ़ करदे अंधेरे में न तू यूँ फैसला रख वो मुंसिफ़ कुछ नहीं सुनता किसी की न उसके...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    क्या लेना है नाम कमाकर अच्छे हैं गुमनाम मियाँ नाम कमाने के चक्कर में हुए व्यर्थ बदनाम मियाँ कहाँ मुरादें मिलती हैं हरइक को दुनिया में आकर अक्सर जाने वालों को जाते देखा नाकाम मियाँ ताक...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बात दिल की जहाँ-जहाँ रखिए एक परदा भी दरम्याँ रखिए घोंसले जब बुने हैं काँटों से क्यों बचाकर हथेलियाँ रखिए हौसले अपने आज़माने को हर कदम साथ आँधियाँ रखिए मौसमों से नज़र मिलाने को सर पे...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मिरे मकान में हर सिम्त खिड़कियाँ रक्खीं हरेक ताक पे फिर उसने बिजलियाँ रक्खीं हुनर को उसके बार-बार मरहबा कहिए चमन की शाख़-शाख़ जिसने आँधियाँ रक्खीं बनाए जिस्म बशर के धड़कते दिल रक्खे न जाने उनमें...