लघुकथा

ज़िद्दी बीज

दीप्ती ने अपनी दादी के मेकअप को अंतिम टच देकर कहा। “वॉओ…दादी…यू आर गोइंग टू रॉक इट..” सपना ने भी खुद को आईने में देखा तो सोलह साल की वह सपना दिखी जिसका स्टेज पर जाने का ख्वाब अधूरा रह गया था। लेकिन आज पोती बासठ बरस की सपना की वह ख्वाहिश पूरा करने जा […]

कहानी

ना का मतलब ना

शिल्पा का मन क्लास में जो पढ़ाया जा रहा था उसमें नहीं था। वह परेशान थी। क्लास खत्म होने के बाद फिर उसका सामना करना पड़ेगा। पिछले कई दिनों से फिर वह कोचिंग के बाहर खड़े होकर उसका इंतज़ार करता था। जब वह घर जाने के लिए निकलती थी तो उसका पीछा करता था। एकांत […]

लघुकथा

प्रतीक्षा

रीमा सामने बैठे सचिन को ताक रही थी। अचानक सचिन की निगाह पड़ी तो आँखों ही आँखों में उसने पूँछा ‘ऐसे क्यों ताक रही हो?’ रीमा ने अपनी आँखें झुका लीं। तभी अंदर जाने का बुलावा आया। भीतर पहुँच कर दोनों ने रजिस्ट्रार के सामने दस्तखत किए। गवाहों ने भी दस्तखत किए। दोनों ने एक […]

लघुकथा

बदलाव

सारिका दस साल बाद अपनी बड़ी बहन के घर आई थी। विदेश में अपने बच्चों के पास रहने के कारण अपने बहनोई की मृत्यु पर भी नहीं आ सकी थी। सारिका महसूस कर रही थी कि उसकी बड़ी बहन मे बहुत से बदलाव आ गए थे। पहले वह हफ्ते में चार दिन उपवास रखती थी। […]

लघुकथा

पराए बच्चे

दयाल बाबू आज फिर चोटिल होकर घर आए। घावों पर दवा लगाती हुई पत्नी बड़बड़ाने लगी। “क्यों जाते हैं उस बस्ती में नशे के खिलाफ प्रचार करने के लिए। अभी तो थोड़ा बहुत पीट कर छोड़ दिया। कल को जान से मार दिया तो ?” “जो भी हो इस डर से मैं चुप होकर नहीं […]

लघुकथा

भीड़ से अलग

पापा का फोन आया देख मयंक समझ गया कि आज भी वही बातें सुनने को मिलेंगी। उसे मुंबई में संघर्ष करते पाँच साल हो गए थे। नौकरी के अच्छे अवसर को छोड़ कर वह यहाँ अपना सपना पूरा करने आया था। इस बीच उसके दोस्त और चचेरे भाई बहन अपने जीवन में व्यवस्थित हो गए […]

लघुकथा

निकट का लक्ष्य

बारहवीं कक्षा के अब कुछ ही महीने शेष थे पर विनय समझ नहीं पा रहा था कि वह किस दिशा में जाए। अपनी समस्या ले कर वह अपने चचेरे भाई के पास गया। उसकी बात सुन कर वह बोले। “देखो यह तो सही है कि तुम्हें कोई ना कोई राह चुननी पड़ेगी। यह चुनाव तुम्हें […]

लघुकथा

डूबा हुआ शहर

दो दिनों से लगातार पानी बरस रहा था। चारों तरफ पानी ने त्राहि त्राहि मचा रखी थी। घर में पानी भर गया तो मरियम छत पर आकर मदद की राह देखने लगी। “हे प्रभू ये कैसी विपदा आ गई। मेहनत से संजोई हुई गृहस्ती बर्बाद हो गई। अब तो रहम करो।” तभी छत के ऊपर […]

लघुकथा

वीर का बलिदान

रत्ना भाग कर अपने खेत पहुँची तो देखा कि उसके पति का चचेरा भाई मंगलू उस पर कब्ज़ा कर रहा है। रत्ना ने रोका तो वह बोला। “खेत गिरवी रख कर कर्ज़ा लिया था। अभी तक चुकाया नहीं है।” “अबकी फसल पर चुका देंगे।” मंगलू कुटिल हंसी हंसते हुए बोला। “तुम क्या चुकाओगी। जिसने लिया […]

लघुकथा

आने वाला समय

तरुण को परेशान देख उसके चाचा ने पूँछा। “क्या बात है? किस सोंच में हो?” “अरे चाचा क्या बताएं। बड़ा बुरा वक्त आ गया है। अच्छाई तो जैसे रही ही नहीं।” चाचा ने पूँछा। “क्यों ऐसा क्या हो गया?” “अब देखिए ना वर्मा जी जैसे भले आदमी को उनके अपनों ने धोखा दिया। आज गैर […]