लघुकथा

कोरे विचार

पंडाल खचाखच भरा था. आचार्य जी भागवत कथा कह रहे थे. कथा के बीच में ज्ञान से भरी बातें भी बता रहे थे. सभी ध्यान से सुन रहे थे. श्रोताओं में एक बुज़ुर्ग दंपति भी थे. अगले माह वह अपने वैवाहिक जीवन के पचासवें वर्ष में प्रवेश कर रहे थे. पत्नी के मन में विचार […]

लघुकथा

मार्गदर्शन

राहुल बहुत परेशान था. यहाँ भी कोई बात नही बन पाई. कितने सपने लेकर मुंबई आया था. सोंचा था फिल्म इंडस्ट्री में अपना नाम बनाएगा. उसमें प्रतिभा की कोई कमी नहीं थी. बस एक रोल मिल जाए तो वह स्वयं को साबित कर देगा. साल भर पहले जो जमा पूँजी लेकर आया था वह खत्म हो […]

लघुकथा

मोह पाश

वह जीतेंद्रिय था. कई साल पहले ही उसने सांसारिकता के समस्त बंधनों को तोड़ डाला था. अब तपस्या ही उसका संसार थी. कई वर्षों से वह पहाड़ की इस निर्जन गुफा में रह रहा था. केवल भिक्षा मांगने ही नीचे बसे ग्राम में जाता था. धम्म की शरण में आने से पूर्व वह वैद्य था. […]

लघुकथा

मेहनत की खुशबू

उसने पिता से विरासत में मिले जमीन के उस टुकड़े को देखा. ऊबड़ खाबड़. पत्थर ही पत्थर भरे थे. पत्नी ने व्यंग किया ‘जब किसी की किस्मत पर ही पत्थर पड़े हों तो क्या.’ किंतु उसने उसने व्यंग को अनसुना कर दिया. किस्मत से हार मानना तो उसने सीखा ही नहीं था. बहुत समय पहले […]

लघुकथा

लघुकथा : झेंप

जानी मानी समाज सेविका निर्मलाजी चाय की चुस्कियां ले रही थीं. उनका बारह साल का पोता बड़े उत्साह से समाचारपत्र में छपा उनका साक्षात्कार पढ़ कर सुना रहा था. सभी बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर उनके विचार पढ़ कर उसने सवाल किया “क्या बबलू अब घर के काम छोड़ कर पढ़ने जाएगा.” पास ही […]