लघुकथा

खाली हाथ

विभा ने कॉलबेल बजाई। कुछ देर बाद दरवाज़ा खुला। बहन ने एक फीकी मुस्काने से स्वागत किया। वह भीतर जाकर बैठ गई। बैग नीचे अपने पैर के पास रख लिया। बच्चे नहीं दिख रहे थे। पहले जब भी वह आती थी तो बच्चे दरवाज़े पर ही राह देखते मिलते थे। “दीदी बच्चे घर पर नहीं […]

लघुकथा

मैं भी एक दिन

रोज़ की तरह चेतन हवाई अड्डे के पास बनी टी स्टॉल पर चाय पीते हुए वहाँ काम करने वाले गुड्डू से बात कर रहा था। एक हवाई जहाज ऊपर से उड़ा तो गुड्डू बड़े चाव से उसे देखने लगा।  चेतन ने उससे पूँछा। “यहाँ तो दिन में कई बार हवाई जहाज निकलते हैं। फिर तुम […]

लघुकथा

पलटू

रंजन की गुप्ता जी पर नज़र पड़ी। उनके बेटे ने फाइव स्टार होटल की अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर अपना रेस्टोरेंट खोलने का निश्चय किया था। इस बात से गुप्ता जी नाराज़ थे। मुंह देखी बात करने के आदी रंजन ने उन्हें देखते ही संवेदना दिखानी शुरू कर दी। “अब क्या कहा जाए आज की […]

लघुकथा

विरासत

विधायक प्रमिला सिंह अपने क्षेत्र के दौरे पर आई थीं। मंच पर से अपनी जनता को सम्बोधित  कर वह बोलीं। “आज बहुत दिनों के बाद अपने घर आई हूँ। पर इस बार अकेली नहीं आई हूँ। आपके बेटे और बहू को भी साथ लाई हूँ।” मंच पर बैठे उनके बेटे ने खड़े होकर सबका अभिवादन […]

लघुकथा

तसल्ली

नर्स ऑपरेशन से पहले कुछ दवाएं देने आई तो देखा कि मि. दत्त कुछ परेशान हैं। “घबराइए नहीं सर डॉ. खान माने हुए सर्जन हैं।” मि. दत्त को ऑपरेशन की चिंता नहीं थी। उनकी निगाहें दरवाज़े पर लगी थीं। तभी घर से कुछ आवश्यक सामान लेकर लौटी पत्नी के साथ ही उनके चेहरे पर मुस्कान […]

लघुकथा

कोच सर

मेहुल पिछले कुछ दिनों से प्रैक्टिस में ध्यान नहीं दे पा रहा था। इस बात से उसके कोच नाराज़ थे। आज उसके क्लब का मैच था। उसके टीम की स्थिति अच्छी नहीं थी। पर उसने अच्छी गेंदबाज़ी करके अपनी टीम को मैच जिता दिया। सब उसकी तारीफ कर रहे थे। पर मेहुल की निगाह अपने […]

लघुकथा

अंजान खतरा

एस. पी. चंदा सिंह ने इंस्पेक्टर मूलचंद से पूँछा। “अब तो तुम्हारी बेटी साल भर की होने वाली होगी।” “हाँ मैडम बहुत शरारती भी हो गई है। अपनी मासूम हरकतों से सबका मन मोह लेती है। सबका खिलौना बनी रहती है।” एस. पी. चंदा ने सोंचते हुए कहा। “वो तो मासूम है पर उसका खयाल […]

लघुकथा

आत्मिक सुख

विभूति बाबू के रिटायरमेंट को करीब छह महीने बीत गए थे। उनके कमरे में चारों तरफ साहित्यिक किताबें रखी थीं। वह कागज़ कलम लेकर कुछ लिख रहे थे। तभी उनके चचेरे भाई उनसे मिलने आए। “अभी तक तक कलम घिसने से जी नहीं भरा ?” अपने भाई के प्रश्न के जवाब में विभूति बाबू बोले। […]

लघुकथा

स्वागत

जीत के ढोल नगाड़े बजाते हुए वह लोग दरवाज़े पर आ गए। “बेदाग छुड़ा लाया तुम्हारे बेटे को। स्वागत करो इसका।” दरवाज़े पर थाली लिए खड़ी रुक्मणी ने अपने पति की आज्ञा का पालन करते हुए बेटे को तिलक लगाया। स्वागत के बाद वह अपने कमरे में आ गई। घुसते ही आदम कद आईने में […]

लघुकथा

जीवन और श्वास

आलाप और रागिनी छोटे से शहर के बड़े गायक थे। दोनों की म्यूज़िकल नाइट्स शहर में धमाल मचा रही थीं। दोनों का रिश्ता ऐसा था जैसे कि जीवन का श्वास से। अपना शहर जीत लेने के बाद इच्छा मुंबई की मायानगरी में किस्मत आज़माने की हुई। दोनों फिल्मों के लिए गाने लगे। पहले साथ साथ […]