गीतिका/ग़ज़ल

शुक्रिया

बीच राह में छोड़कर जाने के लिए शुक्रिया दर्द दे दे के मुझको रुलाने के लिए शुक्रिया। मंजिल मुझे मिल ही गई जैसे-तैसे ही सही मेरी राह में कांटे बिछाने के लिए शुक्रिया। समय से सीख रखी थी तैराकी मैंने कभी साजिशन मेरी नाव डुबाने के लिए शुक्रिया। मेरा सबकुछ लुटा हुआ है पहले से […]

गीतिका/ग़ज़ल

आम बजट 2021

लोक-लुभावन वादे जिसमें दाना,चारा नहीं , यह आम बजट तो आमजन का प्यारा नहीं । बजट के गजट का दिमागी बुखार तो उतरा , अन्नदाता के सिर का बोझ तुमने उतारा नहीं । छोड़ कर शीशमहल झुग्गियों में आओ साहब कोई दिन तुमने ऐसा अभी तक गुजारा नहीं । दुखों का सारा तूफान झेल रहा […]

गीतिका/ग़ज़ल

सिर्फ तेरे लिए लिखता हूँ मैं

अच्छा लिखता हूँ या खराब लिखता हूँ मैं एक तेरे हुस्न को शराब लिखता हूँ मैं। लिखने का होश भी अब तो रहा नहीं सिर्फ तेरे लिए मेरे जनाब लिखता हूँ मैं। खुद को छिपा के रखी तू सदा नक़ाबों ग़ज़लों में तुझको बेनकाब लिखता हूँ मैं। चाँद का टुकड़ा,मल्लिका-ए-हुस्न भी ना जाने देकर कितने […]

गीतिका/ग़ज़ल

विधाता की निगाह में

ये जिंदगी गुजर रही है आह में जाएगी एक दिन मौत की पनाह में। कर लो चाहे जितने पाप यहां हो हर पल विधाता की निगाह में। मेरी कमी मुझे गिनाने वाले सुन शामिल तो तू भी है हर गुनाह में। छल प्रपंच से भरे मिले हैं लोग दगाबाजी मुस्काती मिली गवाह में। खोने के […]

गीतिका/ग़ज़ल

पछतावा

किसी को सता कर जिये तो क्या जिये, किसी को रुला कर जिये तो क्या जिये। करता रहा तुम पर भरोसा अटूट हर पल, उसी को आजमां कर जिये तो क्या जिये। किया जिंदगी की जमा-पूंजी नाम तुम्हारे, उसे घटिया बता कर जिये तो क्या जिये। जिसके अश्रुधार बहे सिर्फ तुम्हारे ही लिए, उसे नजरों […]

लघुकथा

लघुकथा – बैंक एफडी

राजमोहन गांव के बड़े जमींदार थे।गांव वालों की नजर में उनकी छवि सदा ही एक सम्मानित एवं साफ सुथरी व्यक्ति की रही। राजमोहन हमेशा ही दीन, हीन, भिक्षु, विकलांग वा आमजन के प्रति उदार भावना रखते थे। खुशियां सबसे बांट लेते लेकिन दुख दर्द अकेले ही झेल जाते थे। इसके पीछे उनका निजी दृष्टिकोण था। […]

गीतिका/ग़ज़ल

हमें मोहब्बत सिखा रहे हैं

पानी में कागज का घर बना रहे हैं लोग सूरज को ही अब रोशनी दिखा रहे हैं लोग। हमीं से सीखकर मोहब्बत का ककहरा आज हमें ही मोहब्बत सिखा रहे हैं लोग। है पता जबकि की टांग की टूटेंगी हड्डियां फिर भी हर बात पर टांग अड़ा रहे हैं लोग। थी मांगी दुआएं जिनके लिए […]

सामाजिक

क्या हम क्या हमारा, सोचो साथ क्या जाएगा यारा

यह विचारणीय तथ्य है मित्रों कि जब हमारा जन्म होता है तब हम वस्त्र विहीन होते हैं और जब आखिरी समय पर लाश चिता पर लिटाई जाती है तब भी जिस कफ़न से शरीर ढका जाता है वह कफ़न आग की लपटों में पहले ही जल जाता है और इंसान का शरीर फिर बसन विहीन […]

गीतिका/ग़ज़ल

सुनो मेरे सनम

राज-ए-दिल तुम्हे बताता चला गया नजदीक मैं तुम्हारे आता चला गया। भूला ना कभी एक पल के लिए तुम्हे नित नये सपने मैं सजाता चला गया। यूँ बंदिशों में रहने की आदत नहीं रही बन्धनों में तेरे मैं यूँ समाता चला गया। मंजिल मिलेगी या नही ये पता भी नहीं कदमों को फिर भी मैं […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

सच्चे दिल से साथ निभाए उसे पागल समझा जाता है दंगा,बात-विवाद को ही समस्या का हल समझा जाता है। कड़वी हकीकत कहने में जरा भी देर नहीं करता हूँ मैं दुख है कि मेरी बातों को आज नही कल समझा जाता है। पर पीड़ा देख आखों से बहते गंगाजल जैसे पावन आंसू निर्मम लोगो द्वारा […]