राजनीति

चाईनीज़ एप पर लगाम अर्थात आनलाइन मुजरा बंद

यूँ तो सत्तासीन पार्टी जब से सत्ता पर काबिज हुई है कुछ ना कुछ तूफानी ही करती आई है। लेकिन इस बार जो सरकार ने जो निर्णय लिया है,वो बेहद काबिलेतारीफ है। सरकार ने चाईना के साथ भारत के मौजूदा हालात को देखते हुए चाईना द्वारा निर्मित 59 चाईनीज़ एप पर सीधे सर्जिकल स्ट्राइक की […]

गीतिका/ग़ज़ल

पार्थिव शहीद का

आया पार्थिव शहीद का,दरो-दीवार खिड़कियाँ रोईं, सगे,संबधी,दोस्त,माँ,बहन,पत्नी और बेटियाँ रोईं। वतन पे मिटने वाले अपने लाल पर गर्वित थे सभी किंतु गले तक भर-भर के दर्द भरी सिसकियाँ रोईं। फेरे लेकर खाईं कस्में जीवन भर साथ निभाने की पत्नी की हथेली में अब अरमानों की मेहंदियाँ रोईं। होली,दिवाली,करवाचौथ सब हो गया है सूना-सूना सिंदूर,मंगलसूत्र,पायल संग […]

गीतिका/ग़ज़ल

बेव़फाई का ख़िताब

अपनेपन का हिसाब भी वो बेहिसाब दे गयी चंद खुशियाँ दीं लेकिन गम लाज़वाब दे गयीI साथ-साथ जीने मरने के सजाए थे जो सपने तोड़कर के वो सारे के सारे ही ख्वाब दे गयीI सीखकर वो मुझ से इश्क़ की सब बारीकियाँ मुझे ही वो इश्क़ सिखाने वाली किताब दे गयीI मैं तो अब भी […]

सामाजिक

सुशांत जैसी शख्सियत का यूँ जाना अखरता है मानव जाति को

चिट्ठी ना कोई संदेश, इस दिल को लगा के ठेस कहाँ तुम चले गए….? हर दिल अजीज, उम्दा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत सर आज आप हमारे बीच नहीं हैं ख़बर सुनने के बाद ना जाने कितनी बार मेरी आँख नम हुई गला रुंध सा गया ! मेरी मन: स्थिति कुछ भी लिखने की नही है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – क्यों करते हो

जिंदगी जिंदाबाद है फिर मरने की बात क्यों करते हो ऐ! कायरों की तरह आसूं की बरसात क्यों करते हो! चंद बाजी हार जाने से ही तुम इतने गमज़दा हो बैठे मैं पूछता हूँ खुद के पैरों पर ही आघात क्यों करते हो! हारी शतरंज बाजी भी जीत सकते हो तुम हौसले से शह को […]

लघुकथा

लघुकथा : समय का चक्र

बात जून सन् 1999 की है जब देश में कारगिल की जंग छिड़ी हुई थी। उस समय डाकिया रामखेलावन काका का गाँव में चिट्ठी लेकर आना गाँव वालों को भयभीत कर देता था। अनहोनी का अंदेशा गाँव वालों को पहले ही लग जाता था।ऐसा होना स्वाभाविक भी था।क्योंकि गाँव के अधिकतम युवा भारतीय सेना में […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दोस्त ही दुश्मन निकला,मैं अंजान रहा आया वो फरेबी खुदा हो गया,मैं इंसान रहा आया! कलयुगी तहजीबी बयारों से होकर बेपरवा मैं तो केवल मिशाल-ए-ईमान रहा आया! शिकायत उसकी करता भी तो क्या करता  वह तो अपनेपन से भी बेजान रहा आया! निभा ना सको रफ़ाक़त तो दिखावा कैसा मेरे दिल में सवाल ये बड़ा […]

गीतिका/ग़ज़ल

सीने से लगा लीजिए

कुछ इस तरह से लाकडाउन का मजा लीजिए रुठी है यदि महबूबा तो चुपचाप मना लीजिए! घास मिलती है गले, ओस के मोतियों से जैसे यूँ प्रियतमा को आप भी सीने से लगा लीजिए! रंजोगम ना आए कभी हंसती सी जिंदगानी में खुद मीठे-मीठे सपनों की दुनिया सजा लीजिए! मक्कारी,ख़ुदफ़रेबी,बेईमानी रिश्तों में ठीक नहीं राज-ए-दिल […]

गीतिका/ग़ज़ल

सम्हल जाइये

वक्त बड़ा नाजुक है यार,सम्हल जाइये, बेदाग दामन को बचाके,निकल जाइये! कदम-कदम पर ठगी मिलेंगे दुनिया में उनकी मोहक अदा पे ना फिसल जाइये! जो खेला करते हैं किसी के जज्बातों से उनके लिए यूँ मोम सा ना,पिघल जाइये! ना जाने किस घड़ी बुझे जीवन का दीप छोटी-छोटी बातों पर ही ना उबल जाइये! सच्चाई […]

गीतिका/ग़ज़ल

किया कोरोना ने लाचार

चारो ओर सन्नाटा पसरा,सूने हुए बाजार,श्री राधे काम काज बंद हुए,घर अंदर है परिवार,श्री राधे | वाहनों के पहिये थमें,यातायात भी बंद हो गया चल नहीं रही रेल,हवाई,बस,मोटर,कार श्री राधे | बंद हो गए मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारे,और चर्च सभी भक्तों का तांता नही , सूना पड़ा दरबार श्री राधे | भाग कर जो शहर बसे थे छोड़ […]