गीतिका/ग़ज़ल

तुम साथ रहना

दिन हो चाहे रात, तुम साथ रहना बिगड़े कोई बात, तुम साथ रहना! जिंदगी की डोर है अब तेरे ही हाथ समझ मेरे जज्बात,तुम साथ रहना! दूरियों के दिन भी जैसे-तैसे गुजरेंगे रंग लाएगी मुलाकात,तुम साथ रहना! हमारा मिलना भी अखरेगा कुछ को उठते रहेंगे सवालात,तुम साथ रहना! हर पल खड़ा मिलूंगा मैं तुम्हारे साथ […]

गीतिका/ग़ज़ल

दोहरे किरदार

बाहर से खुश हैं अंदर गमों का बाजार लेके चलते हैं लोग चेहरे पे चेहरे और दोहरे किरदार लेके चलते हैं। रोटी,धोती,मकान की महती पूर्ति के लिए ही तो यहाँ हम अपने कंधों पे दुनिया भर का भार लेके चलते हैं। दिल में है हसरत स्वंय लिए बस फूल पाने की मगर दूसरों की खातिर […]

लघुकथा

कुलक्षणी औरत

मैं जब भी गाँव जाता तो देखता कि रामदास की घरवाली गृहस्थी के काम में हर पल उलझी ही रहती! बेचारी को पल भर की फुर्सत नहीं थी घर के काम से, शान-शौक तो जैसे सब कब के छूट चुके थे! सिर पर जिम्मेदारी का बोझ था, देखने में लगता जैसे बीमार हो बेचारी! वहीं […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – मक्खनबाजी और बेईमानी कम्पल्सरी है भाई! 

जी हाँ ! बिलकुल सही पढ़ा है आपने! खुद के द्वारा किए गए एक शोध से यह कहने में मुझे कोई गुरेज नही कि यह दुनिया सिर्फ और सिर्फ मक्खनबाजी और बेईमानी की बुनियाद पर टिकी हुई है! दुनिया में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति में मख्खनबाजी और बेईमानी का गुण विद्यमान है चाहे वह नर हो […]

गीतिका/ग़ज़ल

बीमार न कर

भले मुझसे इजहार न कर इकरार न कर, पर ऐ सनम तुझे कसम है,तकरार न कर! मैं पहले से हूँ बीमार बहुत ऐ जान जिगर, मंद-मंद मुस्काकर मुझे और बीमार न कर! मोहब्बत कर या नफरत कर जो भी कर, यूँ खबर सनसनी ना बना,अखबार न कर! खैरात कभी किसी से मैं लेता ही नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

साथ नहीं हो

साथ हो भी मगर तुम साथ नहीं हो पास हो भी मगर तुम पास नहीं हो! सबसे अपना कहती फिरती मुझको पर अपनेपन का, एहसास नहीं हो! तुमने स्वांग रचा था रिश्ते में इसीलिए बिछड़ के खुश हो तुम उदास नही हो! टूट के बिखरा हूँ मगर निखरा ही हूँ मैं अब तुम मेरी दुआ,अरदास […]

गीतिका/ग़ज़ल

तुम्हीं बताओ

उसकी बंदिश में कब तक रहता तुम्हीं बताओ, मैं उसके जुल्म कब तक सहता तुम्हीं बताओ! जहर पीता रहा मैं अब तक खामोशी से यारों, आखिर कब तक कुछ ना कहता तुम्हीं बताओ! जो छलती रही सदा अपना कह-कह के मुझको, मैं एक बार उसको क्यों ना छलता तुम्हीं बताओ! मेरी उन्नति से भी वो […]

भजन/भावगीत

वाह रे ठाकुर जी

तुम ने गज़ब रचा संसार, चहुंओर मचा है हाहाकार, वाह रे ठाकुर जी………..! बेबसी का लगा हुआ अंबार, खोया अपनापन और प्यार, वाह रे ठाकुर जी…………! छद्मश्री को पद्मश्री उपहार, सच्ची कला हो रही भंगार, वाह रे ठाकुर जी…………! खूब बढ़ा काला कारोबार, मौन देख रही है सरकार, वाह रे ठाकुर जी…………! नारियों पे जुल्मों,अत्याचार, […]

राजनीति

चाईनीज़ एप पर लगाम अर्थात आनलाइन मुजरा बंद

यूँ तो सत्तासीन पार्टी जब से सत्ता पर काबिज हुई है कुछ ना कुछ तूफानी ही करती आई है। लेकिन इस बार जो सरकार ने जो निर्णय लिया है,वो बेहद काबिलेतारीफ है। सरकार ने चाईना के साथ भारत के मौजूदा हालात को देखते हुए चाईना द्वारा निर्मित 59 चाईनीज़ एप पर सीधे सर्जिकल स्ट्राइक की […]

गीतिका/ग़ज़ल

पार्थिव शहीद का

आया पार्थिव शहीद का,दरो-दीवार खिड़कियाँ रोईं, सगे,संबधी,दोस्त,माँ,बहन,पत्नी और बेटियाँ रोईं। वतन पे मिटने वाले अपने लाल पर गर्वित थे सभी किंतु गले तक भर-भर के दर्द भरी सिसकियाँ रोईं। फेरे लेकर खाईं कस्में जीवन भर साथ निभाने की पत्नी की हथेली में अब अरमानों की मेहंदियाँ रोईं। होली,दिवाली,करवाचौथ सब हो गया है सूना-सूना सिंदूर,मंगलसूत्र,पायल संग […]