गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

सच कहता हूं तेरे पास रहा मैं, पर कभी न तेरा खास रहा मैं। बाहर से हँसता ही रहता हरदम, अंदर ही अंदर उदास रहा मैं। ख़ामोश हो गया हूं अब तो ऐसे, जैैसे मरघट में कोई लाश रहा मैं । मेरी भावनाओं की कोई कद्र न की तेरे लिए महज़ टाइमपास रहा मैं । […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – अथ श्री बुलडोजर कथा

इस समय हमारे देश सहित विदेशों में भी मोदी जी से भी ज्यादा लोकप्रियता बुलडोजर की है वैसे बुलडोजर को इतना फेमस यूपी वाले बाबा ने किया है। चहुंओर बुलडोजर का डंका बज रहा है। हालांकि मोदी सरकार ने बुलडोजर का ही नहीं, अपितु भांति-भांति की करनियों-अकरनियों, सब का डंका बजाया है। बुलडोजर के संग-संग हिजाब […]

समाचार

अखिल भारतीय साहित्यकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष बने कवि आशीष तिवारी

रीवा – अखिल भारतीय साहित्यकार संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष देेश के सुप्रसिद्ध ओजकवि कमलकांत तिवारी ने रीवा जिले के युवा साहित्यकार आशीष तिवारी निर्मल को अखिल भारतीय साहित्यकार संघ युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया है। आशीष तिवारी निर्मल प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर जिले के समस्त साहित्यकारों ने पत्रकारों ने बधाई प्रेषित […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – घबरायी होगी

ख़त मेरा वो पायी होगी। जी भर वो इतरायी होगी।। घर लगता है घर सा मुझको। शायद  घर वो  आयी होगी।। देख दरीचे से फिर मुझको। मन ही मन शरमायी होगी।। दी होगी  द्वारे पर दस्तक। पर थोड़ा घबरायी होगी।। मुझे  देखकर  तस्वीरों  में। अपना मन बहलायी होगी।। — आशीष तिवारी निर्मल 

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सीख ले दुनियादारी निर्मल जंग पड़ी है सारी निर्मल। दुनिया वालों से क्या बतलाना अपनी हर लाचारी निर्मल। संभल के रहना पल-प्रतिपल दुनिया है तलवार दुधारी निर्मल। मन में है विश्वास तो इक दिन जीतेगा तू बाजी हारी निर्मल । नोच खाने को सब आतुर हैं मत रख सबसे यारी निर्मल। खा जाएगी तुझको इक […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सीख ले दुनियादारी निर्मल जंग पड़ी है सारी निर्मल। दुनिया वालों से क्या बतलाना अपनी हर लाचारी निर्मल। संभल के रहना पल-प्रतिपल दुनिया है तलवार दुधारी निर्मल। मन में है विश्वास तो इक दिन जीतेगा तू बाजी हारी निर्मल । नोच खाने को सब आतुर हैं मत रख सबसे यारी निर्मल। खा जाएगी तुझको इक […]

गीतिका/ग़ज़ल

इश्क बेहिसाब

सारे काम वो लाजवाब कर बैठी इश्क हमसे वो बेहिसाब कर बैठी । सब देखते रहे मुुझे अखबार की तरह वो मेरे चेहरे को किताब कर बैठी। ना पीना कभी भी यह देके कसम खुद की आँखों को शराब कर बैठी। वफाओं का मिला यह सिला उसे कई रातों की नींद खराब कर बैठी। लिपट […]

कविता

दहेज़ एक कुप्रथा

लिखा नही इस विषय में निर्मल, लिखना बहुत ज़रूरी है सच बोलो ऐ दहेज़ लोभियों क्या दहेज़ लेना मजबूरी है? न जाने कितने ही घर बर्बाद हो रहे दहेज़ की बोली में बेमौत मर रही कितनी ही बेटियाँ,बैठ न पाईं डोली में। पिता के नयनों में आंसू है,बेटी के हाथ पीले कराने में कितनों के […]

गीत/नवगीत

कैसे कोई गीत सुनाये

कैसे कोई गीत सुनाये कितने साथी छूट गए सब रिश्ते नाते टूट गए पल-पल मरती आशाएं जब अपने ही लगें पराये कैसे कोई गीत सुनाये ? बचपन बीता अठखेली में यौवन बीता रंगरेली में भूले सब वह जो करना था खोये रहे एक पहेली में समय चक्र आगे निकला संग आने की टेर लगाये कैसे […]

गीतिका/ग़ज़ल

हे नववर्ष! तुम कोई दग़ा न करना

आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी कोई ख़ता न करना। पहले के ज़ख्म़ों से ही चाक शहर का सीना है नये साल में दर्द मिलें किसी को ख़ुदा न करना। मेरी इल्तज़ा तुझसे बस इतनी है हे नववर्ष अपनों को यूँ अपनो से तुम ज़ुदा न करना। संकट […]