कविता

विरह कुंड में हुए हवन 

सब कुछ तुमको सौंप दिया मिला ना तुम से अपनापन। नेह का नीड़ उड़ा ले गयी स्वारथ की जो बही पवन। पागल करके हमको कहती इस पागल का करो जतन। खुश हैं हम ओस की बूंदों में सागर संग तुम, रहो मगन। प्रेम भाव जो उठे थे मन में अब विरह कुंड में हुए हवन। […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : कलयुग की छलयुग से खुसर-पुसर

आपका तो मुझे नहीं पता …! लेकिन हमें हमारे शिक्षकों ने बचपन में पढ़ाया था कि “रामचंद्र कह गये सिया से ऐसा कलयुग आयेगा,हंस चुगेगा दाना कौआ मोती खायेगा” शिक्षकों पर हमने भरोसा कर लिया।करना भी चाहिए था। उस समय लोग शिक्षकों पर भरोसा ही किया करते थे। हमें भी लगा कि चलो हम द्वापर,त्रेता,सतयुग […]

हास्य व्यंग्य

हम नंबर वन थे और हैं

दिल में आया कि आपको फोन करके नववर्ष की शुभकामना दूं। तभी दूसरा प्रश्न दक्ष हो गया कि आपने मुझे शुभकामना नहीं दी फिर मैं आपको शुभकामना क्यूँ दूं? वैसे भी नववर्ष की शुभकामना देना या लेना यह ढोंग हम ना जाने कब से करते आ रहे हैं। मार्डन युग में नया साल मुबारक हो […]

गीतिका/ग़ज़ल

जमाना जालिम है

बचकर रहना यार, जमाना जालिम है हो जाओ होशियार, जमाना जालिम है। अपनापन,भाईचारा खत्म हो चुका है है रिश्तों में व्यापार, जमाना जालिम है। दिन प्रति दिन देखो क्या खूब बढ़े हैं लुच्चे, टुच्चे, झपटमार, जमाना जालिम है। नारी सुरक्षा के दावे भी खोखले साबित होती तेजाबी बौछार, जमाना जालिम है। रपट लिखाने कभी जो […]

राजनीति

वो सीढ़ियों में क्या फिसले लोग तो ‘गिर’ ही गए

मित्रवर आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी कि चमड़े की जबान है साहब फ़िसल गई।अगर चमड़े की जबान  फ़िसल सकती है,तो फिर चमड़े का बना जूता जो पैर में था वह भी फ़िसल ही सकता है अब सवाल यह उठता है कि फिसलने वाला यह जूता था किन पैरों में ! यदि पैर आम […]

गीतिका/ग़ज़ल

हज़ल

चेहरे के हाव भाव, इनोसेंट चाहिए ब्वायफ्रेंड उनको डिफरेंट चाहिए। हसरतें भी यूँ शेष ना रहें कोई भी होनी डिमाण्ड पूरी, अर्जेंट चाहिए। हो रिच पर्सन ही ब्वॉयफ्रेंड उनका घूमने हेतु इनोवा-परमानेंट चाहिए। दारु संग सिगरेट भी पीती हैं मैडम दुर्गंध ना आए इसलिए, सेंट चाहिए। रोज तोड़ कर जोड़ रही हैं दिल को ऐसी […]

गीतिका/ग़ज़ल

नादान बहुत था

जिससे मिलने के लिए मैं परेशान बहुत था,, उसके मिलने का ढंग देख मैं हैरान बहुत था। चाहतों के भंवर में फंस के डूब ही जाता मैं,, मुझे डुबाने हेतु उसके पास सामान बहुत था। वो जब-जब मिला मतलब से ही मिला मुझसे, समझ ना पाया ये मेरा दिल नादान बहुत था। दिल से आखिर […]

गीतिका/ग़ज़ल

खुद को तबाह मत करना

मोहब्बत यदि गुनाह है तो गुनाह मत करना किसी के वास्ते खुद को तबाह मत करना। तुम उसको चाहो भले,वो तुम को भी चाहे भूलकर कभी भी तुम ऐसी चाह मत करना। जानकर यदि अंजान है वो तुम्हारे एहसासों से दर्द सह लेना मगर,मुंह से आह मत करना। आदत है उस पर हक जताना तो […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य शुकुलाईन का फेसबुकिया साहित्य प्रेम

यूँ तो शुकुलाईन अपने शहर की जानी पहचानी फेसबुक यूजर हैं,शुकुलाईन के शहर के बिगड़े नवाब,लफंगे लुच्चे, टुच्चे,पनवाड़ीे से लेकर धोबी तक सभी शुकुलाईन की फेसबुक मित्र सूची में हैं, शुकुलाईन की हर फेसबुक पोस्ट पर यह सभी लोग लव रियेक्ट कर खुद का जीवन सफल मानते हैं। वहीं शुकुलाईन भी इतनी संख्या में फेसबुक […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – चिंतक नियरे राखिए

चिंता सदा से चिता के समान रही है। ऐसा हमारे बुजुर्गों ने कहा, भगवान ही जाने बुजुर्गों ने कहा भी है या लोगों ने खुद ही सब कुछ कह सुन कर बुजुर्गों का नाम लगाकर पल्ला झाड़ लिया। समाज और देश को आगे बढ़ाने के लिए या मुख्य धारा में लाने के लिए चिंता नहीं […]