गीतिका/ग़ज़ल

किया कोरोना ने लाचार

चारो ओर सन्नाटा पसरा,सूने हुए बाजार,श्री राधे काम काज बंद हुए,घर अंदर है परिवार,श्री राधे | वाहनों के पहिये थमें,यातायात भी बंद हो गया चल नहीं रही रेल,हवाई,बस,मोटर,कार श्री राधे | बंद हो गए मंदिर,मस्जिद,गुरुद्वारे,और चर्च सभी भक्तों का तांता नही , सूना पड़ा दरबार श्री राधे | भाग कर जो शहर बसे थे छोड़ […]

गीतिका/ग़ज़ल

तू मेरी मैं तेरा रहूँ..

ख्यालों में पल – पल तुझे सोचता हूँ मैं ख्वाबों में भी अब तुझे ही देखता हूँ मैं। सुकूँ मिलता है अब तुझे महसूस करके इस दिलो जां में समेटे तुझे घूमता हूँ मैं। बस यही आरजू है तू मेरी मैं तेरा ही रहूँ तेरे दिल की हर धड़कन में गूंजता हूँ मैं। लोग कहते […]

गीतिका/ग़ज़ल

होली आई

गीत खुशी के गाओ की होली आई हंसो और हंसाओ की होली आई! मौज मस्तियों का आलम है ऋतुओं, गम सभी भुलाओ की होली आई। बुरा ना मानो रंगों के इस त्योहार में रुठे हुये को मनाओ की होली आई! मिटाकर बीज नफरत बैर द्वेष के सब खुशी के दीप जलाओ की होली आई! भाईचारा […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : मेरे होते हुये तू दूसरा मुर्गा न फंसा।

इन दिनों शायर प्यारेलाल बड़े उदास से रहते हैं।मायूसी से भरे दिन एवं खोयी-खोयी रातें जैसे-तैसे कट रहीं हैं।लगातार आ रही नयी फिल्मों के दर्द भरे गीत उन्हें रोने पर विवश कर रहे हैं।दरसल ये सब शायर प्यारेलाल की जिंदगी में पहली बार हो रहा है।जिस कमनीय चतुर कन्या के ‘मोहब्बत नामक भ्रमजाल’ में शायर […]

गीत/नवगीत

किस पर गर्व करूँ

घर का चिराग जब घर को जलाये क्या उस पर गर्व करूँ घर का भेदी ही जब लंका ढ़हाए क्या उस पर गर्व करूँ। देश बांटने वाले को अपना बताये क्या उस पर गर्व करूँ जो कौमी एकता का नारा न लगाए क्या उस पर गर्व करूँ। जो पड़ोसी दंगा,झड़प पर तमाशा देखे उस पर […]

कविता

विरह कुंड में हुए हवन 

सब कुछ तुमको सौंप दिया मिला ना तुम से अपनापन। नेह का नीड़ उड़ा ले गयी स्वारथ की जो बही पवन। पागल करके हमको कहती इस पागल का करो जतन। खुश हैं हम ओस की बूंदों में सागर संग तुम, रहो मगन। प्रेम भाव जो उठे थे मन में अब विरह कुंड में हुए हवन। […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य : कलयुग की छलयुग से खुसर-पुसर

आपका तो मुझे नहीं पता …! लेकिन हमें हमारे शिक्षकों ने बचपन में पढ़ाया था कि “रामचंद्र कह गये सिया से ऐसा कलयुग आयेगा,हंस चुगेगा दाना कौआ मोती खायेगा” शिक्षकों पर हमने भरोसा कर लिया।करना भी चाहिए था। उस समय लोग शिक्षकों पर भरोसा ही किया करते थे। हमें भी लगा कि चलो हम द्वापर,त्रेता,सतयुग […]

हास्य व्यंग्य

हम नंबर वन थे और हैं

दिल में आया कि आपको फोन करके नववर्ष की शुभकामना दूं। तभी दूसरा प्रश्न दक्ष हो गया कि आपने मुझे शुभकामना नहीं दी फिर मैं आपको शुभकामना क्यूँ दूं? वैसे भी नववर्ष की शुभकामना देना या लेना यह ढोंग हम ना जाने कब से करते आ रहे हैं। मार्डन युग में नया साल मुबारक हो […]

गीतिका/ग़ज़ल

जमाना जालिम है

बचकर रहना यार, जमाना जालिम है हो जाओ होशियार, जमाना जालिम है। अपनापन,भाईचारा खत्म हो चुका है है रिश्तों में व्यापार, जमाना जालिम है। दिन प्रति दिन देखो क्या खूब बढ़े हैं लुच्चे, टुच्चे, झपटमार, जमाना जालिम है। नारी सुरक्षा के दावे भी खोखले साबित होती तेजाबी बौछार, जमाना जालिम है। रपट लिखाने कभी जो […]

राजनीति

वो सीढ़ियों में क्या फिसले लोग तो ‘गिर’ ही गए

मित्रवर आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी कि चमड़े की जबान है साहब फ़िसल गई।अगर चमड़े की जबान  फ़िसल सकती है,तो फिर चमड़े का बना जूता जो पैर में था वह भी फ़िसल ही सकता है अब सवाल यह उठता है कि फिसलने वाला यह जूता था किन पैरों में ! यदि पैर आम […]