कविता

नहीं चलना

अंधेरे में सनसनाते सन्नाटे में मुझे नहीं चलना दौड़ना मैं व्याकुल, परेशान ड़रता हूँ खनखती पत्तियों से झींगुरों की झीं झीं से हवा की चाल से शायद अपने आप से भी। मैं उजड़े में समाहित रहता हूँ चलता हूँ घूमता हूँ अंधेरे से कोसों दूर ताकि निड़र रह सकूँ सुबह शाम आज कल हर समय […]

कविता

ईमान

क्यों डिगाऊं? ईमान अपना चंद पैसे लेकर मैं हिंद का पुजारी हूँ हिंदुस्तानी हूँ! मेरे ईमान पर मुझे सौपा है लड़ना दुश्मनों से डटे रहना सख्त सीमा पर! मेरे ईमान पर मुझे मिला है सम्मान प्यार लोगों का चूँकि मेरे अंदर बसा है शूरवीर,खून ईमान का! मेरे ईमान पर कांपते थरथराते दुश्मन रोते विलविलाते दुश्मन […]

कविता

राख हथेली पर

क्यों? राख हथेली पर रखूँ सवाल करूँ  हल्के फुल्के उलझे अपनों से,  अभी राख चंद मिनटों में  उड़ जायेगी  या घुल जायेगी  पानी में शराफत भरी बातें  छोड़ विलुप्त हो जायेगी  यूँही  खामोश,  मुझे उलझाकर  शायद आज या अभी अभी। 

कविता

पानी नहीं है

प्यासा गला रूठा बर्तन खाली पानी नहीं है तमन्ना जगी है पी लूँ दो घूँट पर उदासीनता सामने हाथ पसारती मुँह बनाती खड़ी है जैसे लिए लोटा पहले से। क्या करूँ? क्या सोचूँ? किसे बोलूँ? यहाँ सारे प्यासे है सड़क पर बैठे हैं हाँफते, चेहरा लटकाऐ। मैं खामोश मन साधे सो गया यूँही सपना समझकर […]

कविता

शायद बेनाम हो

तुम कहाँ हो? खोये खोये रहते हो क्या तुम्हारा कोई वजूद है? या हासिल करना चाहते हो कुछ नया। जिंदगी किसकी है किसके नाम कब बनती? कब सुधरती है? सब पता है तुम्हें किंतु वैसे ही झल्लाते हो अपनी ही तानते हो। वक्त को मुट्ठी में दबाकर बतियाना चाहते हो पता नहीं तुम कौन हो? […]

कविता

चल दिया

खाया पिया चल दिया पूछा, क्यों भाई क्या हुआ? क्यों भोजन से मुँह फेर लिया? क्यों थाली को खिसका दिया। वह बोला, भोजन बेकार है इसे गधे भी नहीं खा सकते इंसान की क्या औकात है? आप फिर भी इसे खाते हो कैसे इंसान हो। मन में कुछ विचारों ने उथल पुथल की सच कहते […]