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  • दोहे

    दोहे

    घर घर जा माँगे भीख, भीख मिले या मान मान भरे ना पेट को, भीख पेट की शान। आधी मटकी हाथ में, आधी करे सवाल आँधी आफत छोड़ दे, आँधी देत बवाल। मीठी बोली बोल के,...

  • मुझे घर जाना है

    मुझे घर जाना है

    सुबह रवि की लालिमा फूलों पर फुदकती तितलियाँ अँधेरी बोली – मुझे घर जाना है I पथ पर चहल पहल खिलखिला रही मानो आँगन में बच्चों की टोलियाँ भौरे उड़ बजा रहे मृदंग लग रहा जैसे...

  • दोहे

    दोहे

    पीपल पाती हाथ में,चुरमुर होती आज रख कलम पूछूँ अब रे,हवा दे गई ताज I दुखिया दुख को ढो रही,सुबह लगाती आस सुख सपना सा लग रहा,न सुख मिला है पास I परिचय - अशोक बाबू...

  • हम और किस्मत

    हम और किस्मत

    हम सोये सोई किस्मत हम जागे जागी किस्मत हम रोये रोई किस्मत हम हँसे खिलखिला उठी किस्मत क्या खूब ? सम्बन्ध किस्मत का हम से है , क्योंकि हम खड़े ? अपने बल पर किस्मत खड़ी...

  • हाइकू

    हाइकू

    घर बाहर हो रहा घमासान रो रहे बच्चे I भूखे है पेट माँग रहे है भीख खाते ठोकर I सड़क जाम आ गया अभिनेता दबते लोग I देश में पैसा फिर भी मरे लोग कैसा इंसाफ...


  • बाज के चंगुल में

    बाज के चंगुल में

    बाज के चंगुल में फँसी चिड़िया को सब व्यर्थ मृत्यु का झंझावात नजर आया किन्तु क्या ? फड़फड़ाने के सिवा मन विचलित उपाय में लिप्त धीरे से चिड़िया ने बाज के पंजे पर चौंच का नुकीला...

  • जब देखी

    जब देखी

    जब देखी मैंने रोती बिलखती माँ को लुढ़कते आँसू आँखों को I खून बौखला उठा मेरा ऑंखें क्रोधित उमड़ती ज्वाला काश ! धम्म उठा पटल दूँ उनको जो हर रहे चैन,अमन दे रहे पीड़ा माँ को...

  • तुम्हारी निशानी

    तुम्हारी निशानी

    माँ तुम नहीं पर तुम्हारी निशानी मुझे सदा याद दिलाती रहेगी I मैंने संभाल सजा ली है किताबों में जब अहसास, याद आती है माँ तुम्हारी निशानी देख अतीत में खोता चला जाता हूँ करता क्रीड़ाएँ...

  • शब्द बनकर रह गए हैं

    शब्द बनकर रह गए हैं

    मिटटी के चूल्हे  पर  हांड़ी चढ़ाना लकड़ी की आग पर  खाना पकाना  धुएँ से  माँ की आँखों से  आँसुओं का गिरना  खीजना,चिल्लाना, किताबों में  कहानियाँ बनकर, लोगों की जुबान पर  शब्द बनकर रह गए हैं  I ...