कविता

मैं क्या करूँ

मैं क्या करुँ? कहाँ जाऊँ? कहाँ नहीं? पता नहीं चलता अब क्या करुँ? काम काज ठप्प पडे हैं मन दुखी है परेशान है घर का चूल्हा तक नहीं जला भूखे हैं पेट करुँ भी क्या? भगवान रुठ गए रुठ गयी मेरी अपनी किस्मत अब बस रोना है रोकर जीना है जो होना है सो होना […]

कविता

बडा घर

बड़ा घर परिवार बड़ा बडे़ लोग मोटी मोटी तोंद हँसते रहते बेवजह यूँहीं जैसे चमकते रहते भाग्य इनके हरदम. दान करते खिलाते खूब खाना भूखे जीवों को और आनंदमय हो जाते पल पल खूब, बहुत खूब.

कविता

चलो कोरोना को हराते हैं

चलो, आज कोरोना को हराते हैं उठाते हैं कुछ मजबूरियाँ बंद हो जाते हैं कमरों में कुछ दिनों तक ताकि तोड़ सकें श्रंखला कोरोना की और हरा सकें उसे, भगा सकें अपने देश से शहर से अपने आप से हो सकें हम विजयी लहरा सकें परचम अपना दुनिया में!

कविता

पर हम पागल है

हम खेलते मिट्टी में और उछालते कूड़ा ये न समझो शरारत है पर हम पागल है! कभी नाचते सड़क पर और दौड़ते कीचड़ में ये न समझो आदत है पर हम पागल है! कभी घूमते काँटों पर खाना खाते कचरे का ये न समझो लालच है पर हम पागल है! आप मुझे समझाते डंडा खूब […]

कविता

नहीं चलना

अंधेरे में सनसनाते सन्नाटे में मुझे नहीं चलना दौड़ना मैं व्याकुल, परेशान ड़रता हूँ खनखती पत्तियों से झींगुरों की झीं झीं से हवा की चाल से शायद अपने आप से भी। मैं उजड़े में समाहित रहता हूँ चलता हूँ घूमता हूँ अंधेरे से कोसों दूर ताकि निड़र रह सकूँ सुबह शाम आज कल हर समय […]

कविता

ईमान

क्यों डिगाऊं? ईमान अपना चंद पैसे लेकर मैं हिंद का पुजारी हूँ हिंदुस्तानी हूँ! मेरे ईमान पर मुझे सौपा है लड़ना दुश्मनों से डटे रहना सख्त सीमा पर! मेरे ईमान पर मुझे मिला है सम्मान प्यार लोगों का चूँकि मेरे अंदर बसा है शूरवीर,खून ईमान का! मेरे ईमान पर कांपते थरथराते दुश्मन रोते विलविलाते दुश्मन […]