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  • शायद बेनाम हो

    शायद बेनाम हो

    तुम कहाँ हो? खोये खोये रहते हो क्या तुम्हारा कोई वजूद है? या हासिल करना चाहते हो कुछ नया। जिंदगी किसकी है किसके नाम कब बनती? कब सुधरती है? सब पता है तुम्हें किंतु वैसे ही...

  • चल दिया

    चल दिया

    खाया पिया चल दिया पूछा, क्यों भाई क्या हुआ? क्यों भोजन से मुँह फेर लिया? क्यों थाली को खिसका दिया। वह बोला, भोजन बेकार है इसे गधे भी नहीं खा सकते इंसान की क्या औकात है?...

  • मैं बीज हूँ

    मैं बीज हूँ

    मैं बीज हूँ दबा हूँ मिट्टी में ॉछुपा बैठा हूँ देखता इर्दगिर्द। मैं सदा सादा जीवन जीता हूँ भरता हूँ झोली गरीबों की सुधारता हूँ बिगड़े हालात घरों के मेरे रूप अनेक है आप जानते पहचानते...

  • बुझा बुझा जीवन है

    बुझा बुझा जीवन है

    बुझा बुझा जीवन है शायद अपना आशा निराशा है मन में कटु जटिलता पनपती है संघर्ष भरे दौर है दीप जलते बुझते है उगती है कठिनाई हर मोड़ पर राह पर मुसीबत ढपली बजाती है। क्या...

  • धन्य है

    धन्य है

    धन्य है जीवन अद्भुत रचना है अमूल्य हर इंसान है महारत्न है दुनिया में। इस रत्न की पहचान कौन करता है? जिसे ज्ञान हो वही परखता है वरना अज्ञानी बेकार समझता है नष्ट कर देता है...

  • क्या हुआ आपको

    क्या हुआ आपको

    क्या हुआ? क्यों सड़क पर? पैर फैलाये बैठे हो क्या कोई तकलीफ है? या दुख सिर पर सवार है बताओ शायद मैं कुछ मदद करूँ किंतु इंसान मुँह फेर रोने लगा हौले हौले सिसकने लगा खड़ा...

  • जाओ पहले आप सुधर लो

    जाओ पहले आप सुधर लो

    बेटा टाॅफी मत खा दाँत गल जाएंगे झड़ जाएंगे सड़ जाएंगे दर्द होगा कीड़ा लग जाएगा मुझे भी दुख होगा। बेटा तिलमिलाया बोला, अंकल आप ठीक कहते हो मुझे शिक्षा देते हो मगर भूल जाते हो...

  • हे!इंसान

    हे!इंसान

    हे! इंसान इंसान को मत लूट न कर सीना झपटी न अत्याचार! अच्छे गुण धारण कर भला सोच बुराई से परहेज कर मन संकोच मत रख बना खुद को महान ताकि चर्चा हो सके तेरी भी...

  • हाइकू

    हाइकू

    सूखी पत्तियाँ पेड़ पर लटकी शायद भूखी पेड़ विशाल पर खड़ा उदास खींचता बाल घास नुकीली खड़ी दीवार पर हवा सुरीली चेहरा लाल लगा हुआ गुलाल लगे कमाल परिचय - अशोक बाबू माहौर जन्म -10 /01...

  • राख हथेली पर

    राख हथेली पर

    क्यों? राख हथेली पर रखूँ सवाल करूँ हल्के फुल्के उलझे अपनों से अभी राख चंद मिनटों में उड़ जाएगी या घुल जाएगी पानी में, शराफत भरी बातें छोड़ विलुप्त हो जाएगी यूँहीं खामोश मुझे उलझाकर शायद...