लघुकथा

लघुकथा – ज़रूरत 

चौराहे पर भीड़ नहीं है आज। आसमान पर काले बादल छाए हैं- बारिश की भी संभावना है। गुमटा भी बैठा है वहाँ। लाॅकडाउन खुले तीन दिन हो गये, उसे काम नहीं मिल पाया। आज उसे उम्मीद है। उसने अपने एक साथी को फोन लगाया तो पता चला वह बीमार है। आज नहीं आयेगा। ” अरे, […]

लघुकथा

लघुकथा भूख

दरवाजे पर दस्तक हुई। वह नींद में था।  दस्तक फिर हुई। वह उठा और दरवाजा खोला। भूख खड़ी थी। वह भौंचक्का क्षणभर उसे देखता रहा। ” अंदर आने को नहीं कहोगे?” ” नहीं।” ” क्यों?” ” मुझे तुम्हारी आवश्यकता नहीं है।” ” अरे! तुम इस युग के आदमी नहीं हो क्या?” ” हुँ, उससे क्या?” […]

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक चर्चा – सात्विक प्रेम का सरस चित्रांकन

कवि कथाकार विष्णु सक्सेना के दूसरे खंडकाव्य “ सुनो राधिके सुनो “ का शीर्षक जितनी मधुरता लिए है , वहीं उसका कथ्य भी उतनी ही सजीवता व गंभीरता से श्री राधा-कृष्ण के सात्विक प्रेम रस की अनुभूति करवाता है ।गौलोक से लेकर वृन्दावन तक सर्वत्र प्रसृत प्रेम को बहुत ही ख़ूबसूरती से उन्होंने अपने इस […]

कुण्डली/छंद

कुण्डलियाँ

:1: खाली करिए राजपथ, जनता है बेहाल । घर में सब ही कैद हैं, जीना हुआ मुहाल ।। जीना हुआ मुहाल, जाम सड़कों पर पाएं । ये सब ढलती शाम, टेन्ट में पिज्ज़ा खाएं । कहे जैन कविराय, ये धरने वाले जाली । सख़्ती करके आप, कराओ जन-पथ खाली ।। :2: सच की हर इक […]

मुक्तक/दोहा

कुछ मुक्तक

:1: सुना है रोशनी के घर अंधेरों  ने बसाये हैं, सुना है चांद  तारे चांदनी से बौखलाए हैं, मुझे तुमसे मुहब्बत है यह मेरी हक़ीक़त है- हमारी आंख के आंसू तेरे गम में  नहाये हैं ।। :2: प्रीत का स्वप्न सजाना तो सरल होता है, गीत  से दिल को लुभाना  तो सरल होता है, मुग्ध […]

लघुकथा

झुग्गियों की आग

तड़के चार बजे झम्मो ने एक झुग्गी से उठती चिंगारी देखी और वह चीख पड़ी।उसकी चीख हवा से मिलकर जंगल की आग की तरह फैल गयी और सभी लोग अपनी-अपनी झुग्गियों से आँख मलते हुए निकले। बस्ती में आतंक छा गया।झुग्गी आग पकड़ चुकी थी।गबरू दौड़ता-हाँफता पास के दमकल केंद्र की ओर दौड़ा।सभी कर्मचारी सुख-चैन […]