मुक्तक/दोहा

कुछ मुक्तक

:1: सुना है रोशनी के घर अंधेरों  ने बसाये हैं, सुना है चांद  तारे चांदनी से बौखलाए हैं, मुझे तुमसे मुहब्बत है यह मेरी हक़ीक़त है- हमारी आंख के आंसू तेरे गम में  नहाये हैं ।। :2: प्रीत का स्वप्न सजाना तो सरल होता है, गीत  से दिल को लुभाना  तो सरल होता है, मुग्ध […]

लघुकथा

झुग्गियों की आग

तड़के चार बजे झम्मो ने एक झुग्गी से उठती चिंगारी देखी और वह चीख पड़ी।उसकी चीख हवा से मिलकर जंगल की आग की तरह फैल गयी और सभी लोग अपनी-अपनी झुग्गियों से आँख मलते हुए निकले। बस्ती में आतंक छा गया।झुग्गी आग पकड़ चुकी थी।गबरू दौड़ता-हाँफता पास के दमकल केंद्र की ओर दौड़ा।सभी कर्मचारी सुख-चैन […]