कविता

मंजिल

संघर्षों का कोई तौल-मोल ही नही इससे बढ़कर कोई अनमोल नही। संघर्षों से मिलता है जरूर मंजिल कोई भी काम होता नही मुश्किल। अगर होंगे तुम्हारे इरादे मजबूत लक्ष्य पर लगेगा निशाना अचूक। करले बुलंद हौसलों के उड़ानों को और दिखादे तू हौसले जमानों को। बाजुओं में ताकत,इरादा हो अटल, मन में हो विश्वास,मन जाए […]

कविता

अपने अंदर को झाँकें

हो सके तो हम,अपने अंदर को झाँकें यहॉं-वहाँ हम,दूसरे को बाहर न ताकें। हम गौर करें अपना,करें स्वआँकलन स्वआत्मा के,आवाज का करें पालन। हम स्वयं है अपना,कुशल मार्गदर्शक यहॉं-वहाँ की बातें,करना है निरर्थक। हम स्वयं हैं स्वप्रेरक,बने अपनी प्रेरणा हम प्रकाशवान बने,न करें अवहेलना। हम अपने कर्म-फल,को बनाएँ महान इसी से मिलेगा,जगत में मान-सम्मान। बनाले […]

कविता

भोली-भाली चिड़िया हूँ

मैं घर आँगन की पहचान हूँ मैं पेड़-पौधों की मुस्कान हूँ। मैं भोर का सन्देशा लाती हूँ मैं सारे जगत को जगाती हूँ। मैं कलरव के गीत सुनाती हूँ मैं रवि का स्वागत करती हूँ। मैं भोली-भाली चिड़िया हूँ मैं जागरण मैं ही निंदिया हूँ। मैं नील-गगन का श्रृंगार हूँ मैं बादलों का पुष्प-हार हूँ। […]

सामाजिक

पुस्तकें हमारी मार्गदर्शिका

क्रिस्टोफर पाओलिनी ने कितनी अच्छी बात कही है- “किताबें मेरी दोस्त हैं, मेरी जीवनसाथी हैं। ये मुझे हंसाती हैं और रुलाती हैं और जीवन का अर्थ बताती हैं।” वास्तव में यह पुस्तकें हमारे लिए सच्ची आर्गदर्शिका हैं।और यह जीवन भर हमारा मार्गदर्शन भी करती हैं। हमारे जीवन का कष्ट,बाधा,समस्या,आदि का समाधान मात्र और मात्र यह पुस्तकें ही […]

लघुकथा

दादा जी की छड़ी

दादा जी आज सुबह-सुबह सैर के लिए निकल ही रहे थे कि अचानक उनके पाँव ठिठक गए।और वे किसी चीज की तलाश में इधर-उधर,यहाँ-वहाँ घूमने लगे। दादा जी कुछ परेशान लग रहे थे।उधर सैर में जाने के लिए देरी हो रही थी। तभी उनका आठ साल का नन्हा पोता आया।और कहने लगा- “दादा जी!दादा,जी!आप क्या […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

लगन है आध्यात्मिक लगाव

किसी ने ठीक ही कहा है- “लगन” एक छोटा सा शब्द है।जिसे लग जाती है उसका जीवन ही बदल जाता है। लगन का शाब्दिक अर्थ है- “लगने का भाव” या “ध्यान लगने से है।” अर्थात कहा जा सकता है कि- “एकाग्र भाव से ध्यान या मन लगाने की अवस्था या भाव से है।” बात सत्य […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

धर्म की स्थापना का पर्व राम नवमी

राम नवमी भारतीय हिंदुओं का प्रमुख पर्व है।जिसको भारतीय समाज श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते हैं।यह आस्था और  विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है।क्योंकि भगवान राम हिंदुओं का आराध्य देव भी हैं।राम नवमी के दिन ऐसे आराध्य देव भगवान राम का जन्म दिन है।इसी कारण हमारे हिन्दू वर्ग इसे खुशी,और उल्लास के साथ […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

नवसंवत्सर हिंदुओं का सबसे बड़ा पर्व

हमारे भारत मे हिंदुओ का सबसे बड़ा पर्व है “हिन्दू नववर्ष”।जिसको विक्रम संवत या नव-संवत्सर के नाम से जाना जाता है।इसकी शुरुवात अखंड भारत के महान प्रतापी और धर्म के रक्षक राजा विक्रमादित्य जी ने किया था।और इसीलिए इसका नाम पड़ा “विक्रम-संवत”।और इस संवत्सर को प्रति वर्ष चैत्र प्रतिप्रदा को मनाया जाता है।जिसको हिन्दू नव […]

बाल कहानी

मास्टर जी का सबक

आज मास्टर जी कक्ष् मे हाजरी ले रहे थे,तभी भोलू का नाम देखकर ठिठक गए। चुप्पी साधते हुए- भोलू! नाम पुकारते हैं।कोई हाजरी के लिए खड़ा नही होता। पुनःभोलू का नाम जोर से लेते हैं। पर कक्षा में सन्नाटा। तभी पीछे से एक लड़का कहता है- “मास्टर जी! उसकी तबियत खराब थी,कुछ दिन शाला आया, […]

बाल कहानी

रानी परी

आज बिरजू बहुत निराश मन लेकर बाजार से लौटा।जितनी मूर्तियाँ वह बेचने के लिए साथ ले गया था,वैसा का वैसा वापस ले आया।उसकी एक भी मूर्ति नही बिकी।इस कारण वह बहुत दुखी है। उसके बूढ़े पिता जी बिरजू को देखकर दबी जुबान में खाँसते हुए कहता है- “क्या हुआ बिरजू?” “आज तू इतना उदास क्यों […]