Author :

  • गृहिणी – गृहस्थी

    गृहिणी – गृहस्थी

    गृहिणि – गृहस्थी आत्माराम का नागपुर शहर के जरीपट्‌का में मकान और सीताबर्डी इलाके में दुकान है। इकलौती संतान आलोक की शादी धूम – धाम से की। शादी की सुव्यवस्था से सभी रिश्तेदार, परीचित और पड़ौसी...


  • लघुकथा – देने का सुख

    लघुकथा – देने का सुख

    अय्यान आज जिद पर अड़ा था कि उसे 20 रुपए वाला चाकलेट चाहिए। उसके पिताजी आलोक ने चाकलेट खरीदने के लिए रुपए देने से साफ मना किया। उसके रोने , चीखने – चिल्लाने पर भी आलोक...

  • चीन चाय और चालाकी

    चीन चाय और चालाकी

    आलोक की आदत है समाचार पत्र पढ़ते हुए सुबह की पहली चाय पीना। समाचार पत्र गिरने की खनक सुन, दरवाज़ा खोलकर उसे उठाया। गरमा गरम चाय की चुस्कियों के साथ पेपर में देश – विदेश की...


  • हिंदी हैं हम!

    हिंदी हैं हम!

    १. हर तरफ हमारी हिन्दी धूम मचाकर छू रही है बुलंद आसमान दूसरी ओर देश का दुर्भाग्य देखें आज भी कई हिंदुस्तानी हैं हिन्दी भाषा से बिलकुल अनजान। २. बोलीवुड ने अपनी फ़िल्मों की बदौलत हिन्दी...

  • झंडा ऊंचा रहे हमारा !

    बच्चों के कोमल हाथों ने सम्भाला है तिरंगा न्यारा जो है सभी देशवासियों को अपनी जान से भी है प्यारा झंडा हर हिंदुस्तानी की आन, बान,शान व पहचान तिरंगे के रक्षा की खातिर शहीदों ने दिया...


  • आदत के अधीन

    आदत के अधीन

    आलोक को शराब की बुरी लत लगी। माता-पिता ने उसे प्यार से समझाया, आदत छोड़ने के लिए। वो नहीं सुधरा तो फिर डराया-धमकाया। इसके बावजूद शराब नहीं छूटी। थक-हारकर माता- पिता ने आलोक को मारा-पीटा भी।...