लघुकथा

चेक का चक्कर

चेक का चक्कर आलोक अपनी रेडी मेड कपड़ों की खुदरा दुकान में बिक्री हेतु अलग – अलग थोक विक्रेताओं से माल मंगवाता। रुपयों की वसूली के लिए हर महीने आने वाले व्यापारियों को भुगतान नगद में करता। आलोक को हर महीने रुपयों की व्यवस्था करने में दिक्कत होती देख, शुभचिंतक होने के नाते उसे समझाते […]

संस्मरण

उस सहृदय सरदार जी को शत – शत नमन

जीवन रूपी यात्रा के दौरान मानव के रूप में कई ऐसे देवता स्वरूप मनुष्य भी मिलते हैं, जो कि हमारे मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। एक हादसे के दौरान ऐसे व्यक्ति से मुलाक़ात हुई। बदहवास की स्थिति में होने के कारण मैं उनका नाम, पता पूछ न सका। मैं जब भी कोई हादसा […]

लघुकथा

लघुकथा – सच्चा झूठ

                       आत्माराम अपने बेटे आलोक और पत्नी शांति के साथ लड़किवालों के घर पहुंचे। सभी ने लड़की देखी। बारी – बारी उससे कुछ सवाल पूछकर संतुष्ट हुए। लड़की की मां ने अपनी बेटी खुशबू का गुणगान गाते हुए कहा, “ मेरी बेटी दसवीं पास है। […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – कोरोना से डर नहीं लगता है साहब ! 

           एक फ़िल्मी गाने के बोल हैं , “ एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है ऽऽऽऽऽ। “ उसी तरह एक अदृश्य चीनी वायरस ने सारे संसार को नपुंसक बना कर रख दिया है। चीनी वायरस के चलते हमारे पी एम ने 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित किया है। जनता […]

लघुकथा

होली है !

आलोक राम सेवानिवृत्त विधुर हैं। कोई संतान नहीं। इसके बावजूद हमेशा हंसते – मुस्कुराते जिंदादिली से ज़िंदगी जीते हैं। सुबह होली खेलने के लिए घर से सफेद कुर्ता, पायजामा पहनकर निकले। गली में देखा, कोई बच्चा नहीं दिख रहा था, जिसके साथ होली खेल सकें। चल पड़े अपने छोटे भाई के घर की ओर, उनकी […]

लघुकथा

लघुकथा – आनंद आश्रम

आलोक वृद्धाश्रम में रहने वाले अपने रिश्तेदार आत्माराम से हर महीने मिलते थे। उनके बेटे द्वारा दिया गया वृद्धाश्रम का मासिक शुल्क भरते। महिने की दवाईयां देकर आत्माराम का हाल – चाल पूछते। वे हमेशा अपने बहू – बेटे की शिकायत करते कि ना ही मिलने आते हैं और ना ही फ़ोन करके स्वास्थ्य की […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग – बेंगलुरू में टच स्क्रीन वाले रेस्तराँ

बेंगलुरू में टच स्क्रीन वाले रेस्तराँ का शुभारंभ कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू ढ़ेर सारे सेल्फ सर्विस होटलों, बाग – बगीचों, पुराने विशाल पेड़ों के अलावा, शहर और गांव की मिली – जुली संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिलता है। यहां का मौसम 10 महिने सर्द, सुहाना, लुभावना रहता है। आईटी हब के अलावा इसकी […]

भाषा-साहित्य

मातृभाषा होती है महान !

मातृभाषा मिश्री सी मीठी होती है। महाभारत की तरह मधुर, रामायण की तरह रसीली, गीता की तरह गुनगनाने योग्य होती है। मातृभाषा में बोलना – सोचना – लिखना – पढ़ना सब कुछ सरल लगता है। मातृभाषा के बारे में महात्मा गांधी जी ने कहा है, “ जैसे बच्चों के विकास के लिए मां का दूध […]

लघुकथा

पापड़वाला

आलोक को निजी नौकरी की आमदनी से घर चलाने में अड़चनें आती देखकर, पत्नी खुशबू ने सुझाव दिया पापड़ बनाने का गृह उद्योग शुरु करने का। सलाह पसंद आने पर, तुरंत हामी भर दी। 100 / 200 ग्राम के छोटे – छोटे पैकेट बनाए और छुट्टी के दिन, सुबह – सुबह साइकिल पर पापड़ों से […]

कहानी

गृहिणी – गृहस्थी

आत्माराम का नागपुर शहर के जरीपट्‌का में मकान और सीताबर्डी इलाके में दुकान है। इकलौती संतान आलोक की शादी धूम – धाम से की। शादी की सुव्यवस्था से सभी रिश्तेदार, परीचित और पड़ौसी संतुष्ट हुए। आत्माराम की पत्नी कांतादेवी ने पिता – पुत्र को बंद कमरे में खुसर – पुसर करते सुना तो उनका माथा […]