कविता

गणतंत्र दिवस

गणतंत्र का सत्तरवाँ साल उमंग उत्सव वेमिशाल जोश से भरे चेहरे खिले तिरंगा देख मौज मस्ती करते मिले। जनतंत्र का यह गणतंत्र दिवस रखता है खास महत्व समरसता को संजोकर सपनो में खड़ा रहता है अड़िग आड़म्बर। कभी न डगमगाने देता कभी भी न बहकने देता जरा सी गुस्ताखी करने वालो की हमेशा औकात बता […]

कविता

पंछी

हम पंछी नील गगन के डाल डाल पर चूने दाना तिनका तिनका जोड़कर बनाते अपना ठिकाना। एक झोंका मस्त पवन का उड़ा ले जाता उसे फिर वारिश और सर्द रातों में इधर उधर भटकाता मुझे। चंचलता खो जाती चिल्लाहट आ जाती खीर अपनो को अपने ही बार बार सताती और रूला जाती। — आशुतोष

कहानी

कब आएँगे मुर्गे और बकरे के नववर्ष

राहुल राहुल कहाँ हो? देखो मै क्या लायी हूँ तुम्हारे लिए? आखिर तुम्हारी मम्मी हूँ राहुल ने एक नजर देखा और अपने ख्यालों में खो गया। नववर्ष का आरम्भ होने वाला था राहुल की मम्मी चाहती थी कि सभी खुश रहें लेकिन राहुल न जाने क्यों पिछले कुछ दिनों से कटा कटा सा रह रहा था। कोई […]

कविता

नववर्ष की बधाई

नये नये उमंग हैं नये नये तरंग नववर्ष की नवकिरण में हर तरफ लाये उमंग ही उमंग। अम्बर से आई किरण लेकर प्रकाश की लालिमा पीछे छुट गया काली रात और उसकी काली कलिमा। बीत गये एक वर्ष खट्टे मीठे अनुभव लाएगी आशा का संदेश ऐसा सोचे हर मानव। बनी रहे आचार विचार ऐसा रखना […]

कविता

विरोध क्यों

देखो हद हो चली वेशर्मी की भारतीय प्रमाणपत्र मिलने का विरोध भी उमर आया वोट की लालच में जहाँ-तहाँ बंद करवाया। पहले आया राशन कार्ड फिर आया वोटर कार्ड पुनः आया आधार कार्ड फिर आया पैन कार्ड किसी ने विरोध न जताया अब भारतीयता का प्रमाण मिलने पर क्यों शोर उमर आया? लोगो की आधी […]

कविता

तोल मोल के बोल

मै देने की बात करता तुम लेने कि बात करते लेने देने का फर्क न समझकर बस अकड़ जाते हो। थोडी सी हिन्दी पढी होती तो आज हिन्द को जख्म न देते जनसभाओ में यूँ उल्टा-पूल्टा कभी प्रवचन ना देते। थोडा सा इतिहास पढा करो इंदिरा और अटल का भाषण सुना करो जो भारतीय संस्कृति […]

राजनीति

जैसा कर्म वैसा फल – मृत्युदंड

सामाजिक व्यवसाथा में जुर्म का कोई स्थान नही है चाहे वह किसी प्रकार का क्यूँ न हो?सभी जुर्म के लिए संविधान में दंड का प्रावधान है जो विभिन्न संस्थाओ द्वारा जुटाये गये सबूत और रिपोर्टो के आधार पर किया जाता है, लेकिन हाल के वर्षों में जिस प्रकार से रेप की क्रूरतापूर्ण धटनाएँ का वीभत्स […]

कविता

गुफ्तगू

गुफ्तगू के समन्दर में नहाके देखो हर मसला सुलझ जाएगा यूं गुमशूम गुमशूम रहने से मसला और भी उलझ जाएगा। हसरत यदि हो पास आने की गूफ्तगू का जरिया बना के रखना मुश्किलों के दौर चलते रहेंगे आशा का दीप जला के रखना। वो सुबह जरूर आएगी एक दिन गूफ्तगू की महफिल सजा के रखना। […]

कविता

सजेगी दरबार

उदय हुआ नये पथ का जन जन में फैला संदेश सम्पूर्ण समाज का ख्याल कर देखो आया सुप्रीम उपदेश। भारत के आर्दश पात्र को मिला सर्वोच्च स्थान बढ़ रही है पूरे भारत में अब अयोध्या की शान। सभी के घरों में भारत के कण कण में बसते हैं श्रीराम कोई तनिक भी नही भटक सकता […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मन का अर्थशास्त्र

आवश्यकतायें अनंत है यह कथन प्रायः मशहूर है और सत्य भी।उसी तरह मनुष्य का “मन”चंचल और अनंत इच्छाओं की पूर्ति के लिए अनंत पथ पर चलता है।तरह तरह की इच्छा का नित जागरण होता है।और सभी लोग उसकी पूर्ति के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।मन को संयमित करना एक कठिन कार्य माना गया है।जिसका सीधा […]