भाषा-साहित्य

लेखकों की “मन की बात” सुनिए सरकार

जबसे सोशल मीडिया का चलन बढ़ा है।हिन्दी लेखकों की बाढ़ सी आ गयी है ।यह एक अच्छी और सकारात्मक क्रेज के तौर पर उभर रहा है,  जिसमें कई अच्छे लेखक उभरे हैं।आज हर कोई सोशल साइट पर लिखने की कोशिश करता रहता  है।अखवारों ने अलग से पेज डाला है । कई रचनाकारों ने अपने जौहर […]

स्वास्थ्य

आयुर्वेद चिकित्सा को बढाना चाहिए

प्राकृतिक और आयुर्वेद चिकित्सा में सारे गुण और औषधि मौजूद है जरूरत है विश्वास करने की।यह हमारी परंपरागत औषधि है जिससे वोकल और लोकल को बढ़ावा देने के सारे गुण हैं।हमें तुरंत एक्शन की आदत हो गयी है जिसका वाहिष्कार किया जाना चाहिए। आज पूरा विश्व जहाँ एक दवा नहीं खोज पायी वही हमारे योग […]

कविता

बरखा बहार

आई है बरखा बहार लाई  बूदों की फूहार काली घटा उमर उमर खूब बरसे नगर नगर। काली- काली है बदली कड़क-कड़क गरजती धनघोर होके ये दखो कितनी जोर है बरसती। लबा लब हुए नदी नाले फैले चहुँ ओर हरियाली श्रृंगार कर धरती देखो चका-चक  है चमकती । मेधो की गर्जना और मेढक   की   […]

सामाजिक

कर्त्तव्य परायणता से जियो और जीने दो की राह

कर्तव्य कई तरह के होते हैं लेकिन आज जिस कर्तव्य की बात हो रही वह है नागरिको के कर्तव्य की।देश के नागरिक होने के नाते आपके कर्तव्य क्या है ? क्या पालन हो रहे है? शायद नहीं और हो भी रहे दोनो ही स्थिति है। गलत कामो के प्रति आवाज उठाना, घूसखोरो से सावधान रहना,आपदा […]

लघुकथा

बातुक-संवाद : आत्म हत्या का कारण 

बातुक और रोजकुमार की दोस्ती प्रगाढ़  हो चली थी। ऐसा लगता था,  मानो दो जिस्म एक जान हों।कोई भी समस्या होती तो राजकुमार बातुक से अवश्य पूछते।एक दिन राजकुमार ने बातुक से पूछा- बातुक!  लोग आत्म हत्या क्यों इतनी ज्यादा करने लगे हैं? बातुक कुछ समय तो सोच में पड़ गया जबाब तो देना था, वो […]

स्वास्थ्य

योग को दैनिक जीवन में अपनाकर मन मस्तिष्क को रखें स्वस्थ

16 वीं लोकसभा के गठन के बाद भारत के आह्वान पर संयुक्त राष्ट्र संध में योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया जिसे स्वीकार करते हुए 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय विश्व योग दिवस के रूप में मनाने के लिए घोषित किया गया। आज विश्व के लगभग190 देश इस दिवस को मनाने लगे है बल्कि इसकी […]

गीत/नवगीत

एक गीत – ओ यारा

ओ  यारा    ओ     यारा क्यूँ  क्यूँ  क्यूँ  ये  सितम इतना    तड़पाये       मुझे हर  घड़ी  ढाये       सितम ओ यारा•••••••••••••••• देख   के   तेरे    यौवन जले   मेरा   तन   बदन हसरते  हिलोर      मारे कब  आये   तुझे   रहम कैसे   […]

कविता

बासठ नहीं बीस-बीस

यह बासठ का हिन्द नहीं बीस बीस का भारत है।। सीमा पर गुस्ताखियों की फौज सुनो जरा यहाँ का हर बच्चा सौ सौ पर भारी है।। शुद्ध सनातनी है हम कभी नही तनातनी हम उठापटक यदि करोगे आ जाओ सामने से देखो कितना पराक्रमी हैं हम।। देखो लद्दाख हो या सियाचीन अपनी हद में रहो […]

सामाजिक

संत

वसुधैव कुटुम्बकम की जो पहचान हमारी  है वह हमारे संत महात्मा की देन है। सर्वसजन हिताय सर्व जन सुखाय की परम्परा जो संतो मनीषियो ने बनाई वो हमारी सभ्यता का मूल स्तम्भ है। जिसका वर्णन संत कबीर,  तुलसीदास रविदास,  महर्षि वाल्मिकी, वेदव्यास  ने अपने अपने समय में ज्ञान दिया है। जिससे प्रेरणा हमेशा मिलती रहेगी। […]

कविता

प्रकृति प्यारी

बड़ होता बड़ा, पीपल देती शीतल छाया नीम करता हवा शुद्ध आँवला औषधियुक्त। बबूल दंत की औषधि वेर खजूर मधूर तार  का  बुलंद  हौसला छूती गगन ।। आम,   लीची,  कटहल  तो देते वृद्धि देश विदेश सैर कर  लाते है  समृद्धि।। औषधियों  से  भरा हरे  भरे घनघोर वन इनके छाल,पत्ते जड़ और फल संवारे तन। इनसे […]