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  • गुफ्तगू

    गुफ्तगू

    गुफ्तगू के समन्दर में नहाके देखो हर मसला सुलझ जाएगा यूं गुमशूम गुमशूम रहने से मसला और भी उलझ जाएगा। हसरत यदि हो पास आने की गूफ्तगू का जरिया बना के रखना मुश्किलों के दौर चलते...

  • सजेगी दरबार

    सजेगी दरबार

    उदय हुआ नये पथ का जन जन में फैला संदेश सम्पूर्ण समाज का ख्याल कर देखो आया सुप्रीम उपदेश। भारत के आर्दश पात्र को मिला सर्वोच्च स्थान बढ़ रही है पूरे भारत में अब अयोध्या की...

  • मन का अर्थशास्त्र

    मन का अर्थशास्त्र

    आवश्यकतायें अनंत है यह कथन प्रायः मशहूर है और सत्य भी।उसी तरह मनुष्य का “मन”चंचल और अनंत इच्छाओं की पूर्ति के लिए अनंत पथ पर चलता है।तरह तरह की इच्छा का नित जागरण होता है।और सभी...

  • ऐतिहासिक फैसला

    ऐतिहासिक फैसला

    आस्था के दीप से जगमग अयोध्या नगरी मनवांछित फल पाए सज गई पुरूषोत्तम नगरी। साधु संत और फकीर के संग करोडो देशवासी सब के सब है मर्यादा पुरूषोत्तम के दासी। उसकी लीला वही जाने सबको राह...

  • कठिन उपासना

    कठिन उपासना

    आया पर्व उपासना का साफ होते घाट डाला दौड़ा सज रहे माताएँ करे उपवास।। आरोग निरोग मन्नतें का डूबते उगते सूर्य का गंगा के तटपर देखो दूध से हो रहा अभिषेक।। बज रही है हर तरफ...

  • लोक संस्कृति से मिलता है संस्कार

    लोक संस्कृति से मिलता है संस्कार

    छात्रों में गजब की संघर्ष करने,परिस्थति से लड़ने के साथ-साथ अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए जुझारूपन होता है। विशेषर ग्रामीण छात्रों में, इनका संघर्ष प्रायः बचपन से ही शूरू हो जाता है।बस निखारने के लिए...

  • शुभ दीपावली

    शुभ दीपावली

    दीप जले दीपावली पर मिटे दुष्ट और भ्रष्टाचार ऐसी प्रकाश लाना तुम कभी न आये जीवन में अंधकार। जोत जगाना प्रेम की फैले नेक विचार समन्दर से भी गहरा हो सम्बन्ध और शिष्टाचार। दिल की गहराइयों...

  • रामबदन की उलझनों का कर्ज

    रामबदन की उलझनों का कर्ज

    पथिक अपने पथ पर वेहिचक चला जा रहा था। काली सनसनाती रात सूनसान सडक विरानों की सन्नाटा के बीच वह निर्भीक चल रहा था। दरअसल उसे रात दो बजे तक मील में ड्यूटी पकड़नी थी।गाँव से...

  • कविता का रूप

    कविता का रूप

    कविता का रूप सरल मसले कुछ भी रहे मगर भाव, भाषा और विचार का सभी पर हो असर। कुछ आक्रमकता और कर्मठता पर्सनल हस्तक्षेप को न प्राथमिकता अच्छे शब्द और मौलिकता सही मायने में कविता की...

  • जलन

    जलन

    एक नही हजार लिखूँगा देश विदेश संसार लिखूँगा जिसका दिवाना है सारा जहाँ उसके लिए कविता हजार लिखूँगा। जलने की मिशाल भी नया नहीं बात लिखने की अदा नही हाथी देखा नहीं कि बन बैठा कुकुर...