कविता

कैसे हैं तुम्हारे हाल?

भई और सुनाओ सुन्दर लाल कैसे हैं तुम्हारे हाल? मैं क्या बताऊँ भाई मेरे बस हाल तो हैं बेहाल! हमें तोड़ रही गरीबी है, कुछ लोग हैं मालामाल मैं क्या बताऊँ भाई मेरे बस हाल तो हैं बेहाल! आ रही योजना नई नई पर क्या बदला है अब तक पहले थे जैसे आज भी वैसे […]

कहानी

यौन कर्मी

दिल्ली का चांदनी चौक रोज की तरह आज भी कुछ सनसनीखेज करने के चाह अपने अंतस में छिपाए अनिल कुमार निकल पड़े अपने दफ्तर की राह पर… दफ्तर उनके घर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर था. तो रोजाना पैदल ही वहां तक का सफ़र तय किया करते थे. इसी दौरान अपने पत्रकारों वाले […]

गीतिका/ग़ज़ल

हाँ मुझे दर्द होता है.

हाँ मुझे दर्द होता है. मैं जब भी खुद से तेरे बारे में कुछ जिक्र करता हूँ हाँ मुझे दर्द होता है. हाँ मुझे दर्द होता है मैं जब भी सांस लेता हूँ हाँ मुझे दर्द होता है. वो छत भी याद है मुझको, पतंगे उड़ती हुईं खतों में जब तेरे, मैं खुद को ढूंढता […]

गीतिका/ग़ज़ल

इंतज़ार बाक़ी है

इंतज़ार… इंतज़ार इंतज़ार बाक़ी है. तुझे मिलने की ललक और खुमार बाक़ी है. यूँ तो बीती हैं सदियाँ तेरी झलक पाए हुए. जो होने को था वो ही करार बाक़ी है.   खाने को दौड़ रहा है जमाना आज हमें. *1यहाँ पे एक नहीं कितने ही जबार बाक़ी है. वोही दुश्मन है, है ख़ास वोही […]

कहानी

गिरवी

कॉलेज ख़त्म होने का आखिरी दिन, सभी लोग एक दूसरे से विदा ले रहे हैं. गले मिल रहे हैं. अपना फ़ोन नंबर बदल रहे हैं. एक दूसरे को भविष्य में न भूल जाने का प्रण ले रहे हैं. कहीं खुशियों के मारे लोग उछल कूद कर रहे हैं, तो कहीं आखों से आंसूं रुक नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

वो हलकी हलकी बारिशें

वो हलकी हलकी बारिशें मुझे अब भी याद है न साथ होके भी तू मेरे ही साथ है. हर बात कर ली मैंने जब दूर जा रही वो अब भी अधूरी है जो असली बात है. झरना सा झर रहा था आँखों से मोती का मैं चुन न पाया उनको, मलाल आज है. उसकी रजा […]

लेख

भारतीय सेना को सलाम…

बचपन से हम सुनते आ रहे हैं कि धरती का स्वर्ग है, कश्मीर. अपने सौन्दर्य के लिए विश्वविख्यात है, कश्मीर. जहां जिस नज़ारे को देखकर फिर कुछ याद नहीं रहता वो मनमोहक स्थान है, कश्मीर. पहाड़ों से ढकी वादियों में बसा जन्नत-ए-ख़ास है, कश्मीर. चारों ओर से हरियाली से सराबोर अपने में खास है, कश्मीर. […]

कहानी

दिमागी उपज…या कुछ और…!!

बंगलौर… सुबह के लगभग 8 बज रहे होंगे… शर्मा जी रोज़ की ही तरह आज भी अपने बैंक की ओर अपनी गाडी लेकर चल पड़े… शर्मा जी एक सरकारी बैंक में मैनेजर के तौर पर कार्यरत हैं. बैंक 9 बजे के आसपास खुलना था आम लोगों के लिए, तो वह बैठकर अपने साथ मित्र से […]

लेख

दुराचार के बाद की सच्चाई

दुनिया भर में महिलाओं कि स्थिति को देखकर आज राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त द्वारा लिखी गई कविता “अबला जीवन तेरी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी” याद आ गयी, कितनी प्रासंगिक लगती है ये कविता आज भी, जिस समय लिखी गयी थी उस समय कि बात तो समझ में आती है कि […]

गीतिका/ग़ज़ल

मोहब्बत इक खजाना है!

  के अक्सर सोचते है हम, मोहब्बत इक खजाना है. खजाना जब था मोहब्बत, जमाना वो पुराना है.   बदल रही है चाहतें, बदल रही है मोहब्बत. आज हर कोई दुनिया में, खुद में ही सयाना है.   जिसे गाते थे याद करके, सुकून मिलता था हमें. सीने पर लोबान रखकर भुलाया वो तराना है. […]