बाल कविता

गर्मी की छुट्टी है आई

गर्मी की छुट्टी है आई, नानी मां की याद सताई। घूमे-फिरे, मौज मनाई, जलेबी, लड्डू,बर्फी खाई।। गर्मी की छुट्टी …… दोस्त मिले जब नए पुराने, लूडो, कैरम, सैर-सपाटे । धमाचौकड़ी खूब मचाई, पिकनिक की भी बारी आई।। गर्मी की छुट्टी…….. हुई शाम जब ढल गया सूरज, स्विमिंग पूल में तैर लगाई। रातें छोटी, दिन लंबे […]

गीतिका/ग़ज़ल

हमने तो ये सीखा है।

कभी किसी को ग़लत न बोलें, हमने तो ये सीखा है… सोंच समझकर बात करेंगे, हमनें तो ये सीखा है। कभी किसी की आंखों में, आँसू न आने देंगे हम… रोने वाले को है हँसाना, हमने तो ये सीखा है। अपनी ख़ातिर जो भी जीता, वो तो पशु समान है… किसी के काम ये आए […]

गीतिका/ग़ज़ल

दिल पर रंग

दिल पर रंग चढ़ा कर देखो, गीत लबों पर ला कर देखो। दुनियां दरी यूँ ही चलेगी , दिल अपना बहला कर देखो। पशोपेस में उम्र गुज़री , दिल तो ज़रा लगा कर देखो। मीत मिला जो मन का यारों , उस पर प्यार लुटा कर देखो। मौसम इतना हँसी हो गया है, पलकें ज़रा […]

सामाजिक

अपने लिये कब

कॅरोना संकट में अच्छे बड़े परिवार की आर्थिक स्थिति संकट में आ पड़ी तो गरीबों की दशा और भी अधिक बिगड़ी हुई थी। जहाँ हर तरफ़ काम धन्धे चौपट हो चले तो मालिको ने कम्पनियों से मज़दूरों को वेतन न देना पड़े इस चक्कर से बाहर निकाल दिया। निजी स्कूलों ने अपने शिक्षकों की संख्या […]

बाल कविता

अच्छी आदत

चीकू मीकू थे दो भाई , खाते चॉकलेट पीज़ा मिठाई। मम्मी उनको रोज़ बताती , तबीयत ख़राब इससे हो जाती। बात उन्हें ये समझ न आती , दिन भर खाते चॉकलेट टॉफ़ी। करते रहते अपनी मनमानी , मम्मी की एक बात न मानी । खाते खाते ये हुआ हाल , इस आदत से हुए बदहाल। […]

सामाजिक

कामकाजी महिलाएं कैसे रखें मानसिक संतुलन

भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति कमोबेस हमेशा से ही दयनीय रही है। पुरूष प्रधान समाज होने के कारण सभी नियम क़ायदे पुरुषों के हितों को ध्यान में रखकर बनाये जाते रहे हैं। सरकार ने तो महिलाओं के हितों पर समय- समय पर क़ानून बनाये हैं, शिक्षा के प्रसार को भी महत्व दिया है। कहीं-कहीं […]

बाल कविता

महक उठे जग सारा

नदियों सी मैं बहती जाऊं। घाट-घाट से कहती जाऊँ। बिना थके, बिना रुके हरदम, हर सीमा को तोड़ दिखाऊं।। उजले-उजले आसमान पर, अपनी एक पहचान बनाऊँ। भूखे प्यासे व्याकुल जन की, मैं ठंडे जल से प्यास बुझाऊं।। रुक जायें जो बीच सफर में, मंज़िल तक उनको ले जाऊं। बादल बनकर आसमान से, धरती पर मैं […]

राजनीति

देश के विकास में प्रत्येक नागरिक की समान भागीदारी

देश को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली और तिरंगा नीले आसमान में गौरव से लहराया। हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। हमारा संविधान विश्व का सबसे बड़ा सविधान है। स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद बने। संविधान सभा द्वारा भीम राव अम्बेडकर को प्रारूप समिति का अध्यक्ष चुना […]

बाल कविता

हम सब बोलें मीठे बोल

बात पते की सुन लो बच्चो जब भी खेलो मिलकर खेलो। जब भी बोलो हंसकर बोलो, बातों में मिसरी सी घोलो।। अच्छे और बुरे कामों को, मन की आंखों से तुम तोलो। जब बोलो तब सच-सच बोलो, कभी न बातें रच-रच बोलो।। हंसकर मन की गांठें खोलो, दिल से दिल का रिश्ता जोड़ो। जब बोलो […]

सामाजिक

औरत सदा महान

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः । यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः। एक औरत जिसे मर्यादा , प्रतिष्ठा, गरिमा , महिमा , इज़्ज़त , आबरू , हया , लज्जा , शर्म यातना , आदि पूरी जिम्मेदारी एक औरत के खाते में ही डाली गयी है। यू भी औरत को भारतीय संस्कृति में औरत का दर्जा दिया […]