कविता

बेटी हम शर्मिंदा हैं

बेटी हम शर्मिंदा हैं, कातिल तेरा जिन्दा है। किया कृत्य तेरे साथ है, दुःख कितना तुमने देखा है।।                  बेटी हम शर्मिंदा हैं………. नहीं शर्म आती दरिंदो को, ना देखें उम्र ना देखें मासूमियत। इन को तो अपने मतलब से मतलब, क्या इनके घर में नहीं है बेटी।। […]

कहानी

किसान हुकम सिंह

कंधे पर रखे हल धरती पुत्र हुकुम सिंह अपने खेतों की मेड़ पर चला जा रहा था | पीछे से उसका बेटा श्याम देख कर बोला कि पिताजी आपका  कुर्ता पीछे से कई जगह से फट रहा है | उसने कहा पिताजी इस बार आप अपने लिए नया कुर्ता खरीद लेना !  हुकम सिंह ने […]

कहानी

सहमी आंखों में इंतजार 

आंगन में बैठी केसर देवी सूरज की तपन ले रही थी | तभी बेटा लालचंद आता है | मां से कहता है, मां अगले महीने होली का त्यौहार आ रहा है | इस बार तुम हमारे लिए घर पर ही हिस्से-गूजे बनाना !  मां कहती है ठीक है | अगले दिन केसर देवी अपनी पड़ोसन […]

समाचार

मिस्टर जीरो मैन का हुआ प्रमोशन समारोह

वाराणसी | सिदव पब्लिक स्कूल में मिस्टर जीरो मैन  उपन्यास का प्रमोशन समारोह कार्यक्रम सम्पन्न हुआ | वाराणसी में ही नहीं बल्कि ताज नगरी आगरा, प्रयागराज, भदोही, फिरोजाबाद एवं पूरे भारतवर्ष में मिस्टर जीरो मैन  उपन्यास का प्रमोशन किया गया है | मिस्टर जीरो मैन के प्रमोशन समारोह में आए हुए अतिथि गणों के गले […]

लघुकथा

लघुकथा – मां होना कोई गुनाह नहीं

देवपुरा निवासी पुनीत ने पत्नी संध्या से कहा! देखो घर के बाहर कोई बैल बजा रहा है। संध्या ने दरवाज़ा खोला कर देखा तो एक 23 वर्षीय युवती थी l जिसके आंसू  रुक नहीं पा रहे थे। संध्या ने पूछा! क्या हुआ रो क्यों रही हो। चुप होकर बताओ क्या बात हुई है। और नाम क्या […]

राजनीति

किसान आंदोलन पर विरोध क्यों

                   विश्व भर में कृषि को देखते हुए सभी देशों में भारत एक कृषि प्रधान देश है। देश के विकास में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आजादी से पहले भी भारत की सत्तर फीसदी आबादी किसान हैं। देश में अन्नदाताओं की अहम भूमिका होने के कारण […]

संस्मरण

मां जैसा कोई और नहीं- संस्मरण

शरद ऋतु की रात में 8:00 बजे का समय रहा होगा। शांत वातावरण में दरवाजे के बाहर टुक-टुक की धीमी सी आवाज आती है। अचानक आवाज आना बंद हो जाती है। उस समय मैं अपनी लॉ की “महिला कानून” की किताब पढ़ रहा था। जब दरवाजा खोलकर देखा तो बाहर एक बुजुर्ग दंपत्ति थे। जिनकी […]

कविता

मां मेरी औकात नहीं

क्या लिखूं मैं जिसके बारे में, उस ने मुझे खुद लिखा है । होते हैं वो किस्मत वाले, जिन्हें मां की सेवा करने का मौका हैं।।                              मां मेरी औकात नहीं…….. मां मैं आज खुश हूं, ये सब तेरी बदौलत है। मां […]

लघुकथा

लघु कथा – काश बेटी होती

चूल्हे में आग फूंकते समय 77 साल की बूढ़ी आंखो में धुंआ तेजी से लग रहा था। रामधन की आवाज निकलती हैं। हाय राम काश बेटी होती! सुंदरपुर गांव में रास्ते में जाते हुए मुरली ने पूछा। क्या हुआ दादा जी ? आप ये सब क्या कर रहे हैं ? क्या आपके दोनों बेटों की […]