कविता

मां मेरी औकात नहीं

क्या लिखूं मैं जिसके बारे में, उस ने मुझे खुद लिखा है । होते हैं वो किस्मत वाले, जिन्हें मां की सेवा करने का मौका हैं।।                              मां मेरी औकात नहीं…….. मां मैं आज खुश हूं, ये सब तेरी बदौलत है। मां […]

लघुकथा

लघु कथा – काश बेटी होती

चूल्हे में आग फूंकते समय 77 साल की बूढ़ी आंखो में धुंआ तेजी से लग रहा था। रामधन की आवाज निकलती हैं। हाय राम काश बेटी होती! सुंदरपुर गांव में रास्ते में जाते हुए मुरली ने पूछा। क्या हुआ दादा जी ? आप ये सब क्या कर रहे हैं ? क्या आपके दोनों बेटों की […]