कविता

प्रकृति हमारी मां

देख ये जल-वन ,पवन  पर्वत, वृक्ष खग वृदं मन हो जाता प्रफुल्लित चहक उठता मेरा रोम रोम ये धरोहर है हमारी जिस के बिना जीवन असंभव है प्रकृति हमारी मां है स्वरूप  प्रभु का जीवन दायनी मां कदम कदम पर देती जीवन जीने मे सहयोग पर मानव कर बैठा नादानी जंगल काटे , देते जो […]

कविता

मौसम है सुहाना

आसाढ मे सखी . मनभावन है मौसम बादलों के  मखमली है रंग बरसाते रिमझिम फुहारें अमृत रस बरसातें बदरा  गर्जन करते दामिनी संग शीतल होती हिय की प्यास मंद मंद मुस्काती धरती खामोशी का आचँल ओढ़े सहेजती जल की बूंद -बूंद देती हमको संदेश जल की शक्ति पहचानो यही है जीवन ……..। इस की बर्बादी […]

कविता

कोरोना की पराजय 

कोरोना का शोर है सब तरफ फैला रहा है महामारी जूझ रहे  दुनिया के नर नारी  ये वायरस है संक्रमण का  तेज बुखार ,गला खराब होती खांसी भारी, सांस मे पीड़ा  लगे अगर सांस लेना मुश्किल तो तुरंत अपनी जांच करना जो करोगे शीघ्रता  से ईलाज  बच सकती है  जान,  सुरक्षित सभी नाते, रिश्तेदार इस […]

कविता

मैं स्त्री हूं

मैं स्त्री हूं ,मैं कठपुतली मां ,बहन बेटी ,पत्नी कितने किरदार निभाती हूं जीवन के रंग मंचके  धागों पर  नाचती  कठपुतली सी  परिवार के रंगों में कभी अच्छा तो कभी मुसीबत में नाचती ढाल बन कर   पत्नी बन सेवा करती पति ही मान परमेश्वर मन समर्पित तन समर्पित रहती अटूट विश्वास बन जो मन […]

लघुकथा

लघुकथा – पुस्तकें

“हिन्दी साहित्य का सम्मान उत्तम सृजन के लिये आपको मिला है! कैसा लग रहा हैं इस सम्मान को पाकर ? “मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा हैं इस  सम्मान को पाकर”! “मेरी माँ का बहुत बड़ा योगदान हैं! जब मैं सात साल की थी, तब स्कूल में गर्मी की छुट्टियाँ होने पर, माँ  मुझे शहर […]

कहानी

कहानी – बदलती पतवार 

अजीब सी कसमसाहट सी थी। आज ! कितने बरस बाद फिर मैं आयी थी उस गाँव में। बरस बाद! हाँ लगभग बीस बरस बाद ! यादें फिर भी अभी तक  धुधँली न हुई । वही खपरैल से बना घर था, जिस को कुछ रंग बिरंगे कागज़ की लड़ियों से सजा रखा था । उसके चारों ओर सुन्दर […]

लघुकथा

लघुकथा – आदत

“सिस्टर क्या वो बयान देने की हालत में है”? सिपाही ने अस्पताल मे सिस्टर से पूछा । “सर चोट तो बहुत आयी है हालत बहुत खराब है, पर अभी -अभी होश आया है “। “तुमको  ज़रा भी शर्म नहीं आयी ,एक चार साल की बच्ची के साथ इतनी घिनौनी हरकत करते हुए”? पुलिस वाले ने […]

लघुकथा

लघुकथा – तुलसी का बिरवा

“सुनीता कुछ पौधें मेरे  कार्यालय में भी लगाने है। जब मैनेजर को पता चला कि सुनीता  तुम्हारी नर्सरी  है, तो बहुत खुश हुए और बोले कि कुछ पौधें यहाँ कार्यालय मे भी लगवा दो और जल्दी ही उसके पैसे भी मिल जायेगें। समय रहते तुमने ये काम शुरू कर दिया ! वर्ना तो …..।” रवि ने उसको […]

भजन/भावगीत

जय माता दी

जगत जननी आदिशक्ति तुम अम्बे मैया  भवानी जय जयकार सदा  रहे घर मेंं बसेरा तुम्हारा रखना सदा सलामत घर परिवार रखना रोशनी, मिटाना अन्धेरे मनोकामनाएं पूर्ण करती  सदा खुशी का सवेरा रहेगा हो रही  तेरी  मां जय जयकार भक्त जब आए दर्शन  को  तेरे सदा तू बरसाती  परिवारों पर आशीर्वाद दुष्टो को ललकारती ,करती संहार […]

लघुकथा

संयुक्त परिवार

जरा सोचो मेघना अपनी नाजो से पली चिरैया जिसे हमने सब सुख सुविधाओं के साथ पाला ,और अभी आगे भी तो पढना चाहति है । इतने बढे संयुक्त परिवार मे रह पाएगी ।वो भी बड़ी बहू बन सोचा है ।कितनी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी । ना कर पायी तो … चिरैया से भी पूछो ! इतना अच्छा  […]