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  • प्रेम कविता

    प्रेम कविता

    ये तन्हाईयाँ ढूंढ ही लेती है तेरा पता छा जाता तू मेरे मन पे इसतरह सांसों की आहट में जिंदगी बसती हो जिसतरह आता है जब तू मन के आंगन में मैं महफिल तू रौनक हो...

  • यादें…..

    यादें…..

    यादें कभी ठहरती नहीं वो बहती रहती है नदी की भांति कभी उफनती है तो कभी शीतलता का सुकून भी कराती है अन्तस् को कुछ आज की तो कुछ बीते दिनों के लम्हों को दोहराती है...

  • प्रेम

    प्रेम

    सुनो ! क्यों तुमसे पलभर की भी जुदाई सही नहीं जाती मुझसे। तुम्हारे जाते ही उदास मन अकेलेपन का लिबास ओढ़ लेता है। रूठने लग जाती हूँ खुद से ही मैं !! फिर ,एक बेरुखी मेरे...

  • शहीद….

    शहीद….

    आँखें नम है हर दिल मे गम है ये वक़्त जरा गमगीन है तिरंगे में लिपटे शहीद है शहीदों के शव रखे करीब है एक आँख से अश्रुधार बह रही दूसरी आंख दिल के आग उगल...

  • चौकीदार…..

    चौकीदार…..

    कौन है ये चौकीदार किसे कहते है चौकीदार यह सिर्फ एक नाम नहीं एक पहचान है आत्मसम्मान है देश की जान है हर मौसम में, हर आफत में दुख में तकलीफों में समाज के हर तबकों...

  • नदी का सफर

    नदी का सफर

    नदियां भी तो चलती है पिघलती है उद्गम से निकलती है पहाड़ों से गिरती है रास्ते ऊबड़ – खाबड़ है पत्थरों से टकराती है चोट खाती है तोड़ती है फोड़ती है कुछ को साथ बहा ले...

  • मौन

    मौन

    मन की अभिव्यक्ति अगर मौन हो जाएं तो दर्द बनकर चुभती है अन्तस् में मौन की प्रकृति साहस नहीं तोड़ती बल्कि अपना दम तोड़ती है नहीं लांघ पाती मर्यादाओं के घूंघट को अपने मन को घायल...

  • प्रेम

    प्रेम

    प्रेम नहीं समझता शब्दों का चलन ये तो व्यवहारों को महसूसता है दिल से पढ़ता है एहसासों को और जज्बातों से गढ़ता, प्रेम का ताजमहल खामोश मन की गहराई में तैरती उत्तेजनाओं की लहरों को हृदय...

  • स्वार्थ

    स्वार्थ

    आगे बढ़ने की होड़ में बेकाबू हो गए हैं हम दब गई कहीं मानवता स्वार्थ की बढ़ी कतार एकदूसरे के प्रति ईष्याभाव ने बढाया है अपना तेज कदम लाँघकर आदर, सम्मान का दायरा कटु स्वर से...

  • मन

    मन

    काश ये मन न होता तो तेरा ख्याल भी न होता कितना रोकती हूँ इसे फिरभी तेरी ओर चला जाता और फिर शुरू होता तेरी यादों का सिलसिला पन्ना दर-पन्ना खुलता है तुम्हारे साथ बिताए पलों...