कविता

कविता

जब से मन के कोमल परतों को प्रेम की गुलाबी पंखुरियों ने स्पर्श किया है एहसासों की मनमोहक हवाएं हृदय को छूकर रोम -रोम में बहने लगी है शिराएं खुलने लगी है एक -एक कर मन की इच्छाओं की एक उजास प्रेम का प्रस्फुटित होने लगा है मन के संसार में भाव पलने लगे दिल […]

कविता

कविता

छूट जाते हैं समय की आंधी में कुछ सम्बन्धों से साथ पर जो नहीं छूट पाता वो है उसमें निहित मोह मन अकारण ही उसे याद करता और मौजूदा वक्त पराया सा लगने लगता मन अशान्त खोया-खोया सा रहता उसकी कमी वक्त के हर लम्हें में खालीपन भर देता कोई अर्थ नहीं उन सम्बन्धों के […]

कविता

कविता

वो वादे याद है न तुम्हें जिसके पूरे होने के इंतजार में समय का एक-एक लम्हा कितनी बेताबी से जिया है मैनें तुमसे मिलन की उम्मीदों को दिल के आईने में सजाकर किया श्रृंगार प्रेम के चटक रंगों से तन के पोर-पोर में समाई तेरे एहसासों की छोटी सी छोटी आहट नहीं था कोई बस […]

सामाजिक

महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण! आज इसी परिवेश के हिस्सा हैं हमसब.. आज से कई सालों पहले तक महिलाओं पर अनेक जुल्म किए जाते रहे थे… उन्हें उनके आजादी से वंचित रखा जाता था ताकि, महिलाएं अपनी मनमर्जी न कर सकें और सदैव पुरुषों के अधीन होकर रहने को विवश रहे. जिससे कि समाज में पुरुषों का वर्चस्व […]

कविता

यादें…..

सुनो ! तुम्हारी यादें कहाँ सहज होती है जो याद आएं और भूल जाएं ये तो तूफान और सुनामी लाती है और क्या ! असहज कर देती है मुझे टूटने लग जाता है फिर मेरा वास्तविकता से नाता…. भूल जाती हूँ पलभर के लिए सबकुछ बस तुम ही तुम होते नजर में भावनाएं जुड़ने लग […]

कविता

प्रेम….

प्रेम सुनो ! हरदिन तुम्हारा जल्दी जाना और देर से आना मुझे उदास कर देता है जानते हो ना ! तुम्हारे प्रेम में हूं मैं…. फिर मौसम का सुहाना भी जेठ की दोपहरी सा लगता है जब तुम होते हो साथ मेरा हर पल त्योहार सा लगता मेरा सजना-सवरना और तुम्हारे इर्द-गिर्द ही मेरी उपस्थिति […]

कविता

जिंदगी…..

जिंदगी एक अध्ययन है अपनेआप पर नियति के अनेक प्रयोग दिन प्रतिदिन होते रहते है हमपर झेलते है हम सभी कभी अचानक दुःख के जानलेवा तूफान बवंडर को तब कहीं जाकर बड़ी मुश्किल से वक्त के थपेड़ो से लड़कर खुद को डार्विन के सिद्धान्त से जोड़ते है जिसमें संघर्ष करने की शक्ति है वही इस […]

कविता

दर्द

कुछ दर्द अपवाद होते है इतना असहनीय की पल- पल आंखों में आंसू भर देते है बीमारी का दर्द तो दवाईयां असर कम कर देती है पर जब अपनों से मिलते है बेतहासा दर्द…. उम्मीद से परे तो जिंदगी अबाक कोमा में चले जाना सा लगता है टूट जाता है इंसान ढहते मकान सा जिसमें […]

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बचपन

बचपन का सफर कितना सुहाना होता है ना ! न कोई चिंता न कोई फिक्र हर उलझन से मुक्त जिंदगी बसंत की भांति इधर से उधर उन्मुक्त बहता रहता बेतहासा खुशियां खुद में समेटे गमों से दूर मासूम हसरतों को मुट्ठी में दवाएं नई कोशिशें नई उड़ाने मासूम मन इच्छाओं की एक-एक मोतियों को ख्वाबों […]

कविता

प्रेम

ये तन्हाईयाँ ढूंढ ही लेती है तेरा पता छा जाता तू मेरे मन पे इसतरह सांसों की आहट में जिंदगी बसती हो जिसतरह आता है जब तू मन के आंगन में मैं महफिल तू रौनक हो जाता है प्रेम की वीणा बजती है दिल में तू झंकृत कर उत्तेजित कर जाता है तेरे होने के […]