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  • कविता….

    कविता….

    कविता किसी विधालय, महाविधालय में सिखाई-पढ़ाई नहीं जाती जब एक इंसान लेता है जन्म पैदा होता है तभी एक कवि- मन जैसे-जैसे बढ़ता है इंसान कविता भी कोपलित होती है पल्लवित होती है पुष्पित होती है...

  • वास्तविक कला

    वास्तविक कला

    भोग, विलास, आराम के साधन ये सब है आलस्य, आकर्षण के संसाधन सीमित साधनों संग है कलात्मक जीवन सुखद, सौहार्द्र, संतुष्टि होता है सफल जीवन विपरीत परिस्थितियों में भी, तटस्थ, पुरुषार्थ है जीवन सहज, सरल संतोष...

  • खेल….

    खेल….

    एक समय था जब जीवन बड़ा सरल था एक खेल सा था प्रैक्टिकल था हार जीत में जीवन का संगीत था रंग-बिरंगे जीवन, उतार-चढ़ाव था आज अहं का चढ़ रहा बुखार है किसी को स्वीकार नहीं...

  • तस्वीर…..

    तस्वीर…..

    बरसों से एक तस्वीर तेरी बसा रखी है दिल में बड़ी शोख, शरारत भरी सूरत आंखों में लम्हा-लम्हा बड़े जतन से सम्भाला है मैनें कतरा-कतरा जिंदगी में समेट रखा है मैनें यादों के करवा में खुद...

  • लिखती हूँ……

    लिखती हूँ……

    कुछ सोच कर कहाँ लिखती हूं मैं तो बस अपने जज्बात लिखती हूं आंखें बंद करती हूँ सोचती हूं पल दो पल आती है नजर जो बात वही बात लिखती हूँ कोई सच या झूठ कहाँ...

  • दृश्य

    दृश्य

    खूबसूरत सुंदर दृश्य आकर्षित करती है हर किसी को उगते सूरत की झलक सुनहरी किरणों से नहाया पर्वत शिखर मानो धधकती ज्वाला सोने की चमक का आभास कराता स्मृति पटल पर है छप जाता सूर्यास्त का...

  • आजादी….

    आजादी….

    बड़े संघर्षों की है ये आजादी वीर सपूत बलिदानों की है आजादी सत्य अहिंसा का एक पुजारी कस ली कमर, ठान ली हिन्दोस्तां को दिलानी है आजादी लंबा संघर्ष, रैलियां, अनसन और आंदोलन को बना हथियार...

  • अफवाह…..

    अफवाह…..

    अफवाहों का बाजार गर्म है रोटियां सेंकने वाले क्यूं नर्म हैं अरे भई! जा रही लोगों की जान है भीड़ बेकाबू है, जनता परेशान है ना ओर है, ना अंत है, बस शोर है, फिर मौत...

  • मिड डे मील

    मिड डे मील

    मिड डे मील की व्यवस्था चल रहा है पूरे देश में इसमें बच्चों को मिलता एक वक्त का पौष्टिक आहार दिन का भोजन पाठशाला में ताकि गरीब, जरूरतमंद बच्चे आ सकें प्रतिदिन विद्यालय में और पा...

  • गुजारिश….

    गुजारिश….

    आओ प्रिये! बैठो न पल दो पल साथ मेरे करनी है कुछ गुफ्तगू कुछ शिकवे हैं कुछ शिकायतें करनी है कुछ गुजारिशें सुनो न! कुछ लिखी हैं मैंने मन में उमड़ते घुमड़ते कितने ही भावों को...