Author :

  • आंसू की बूंद…..

    आंसू की बूंद…..

    आज सोच रही थी तुम्हें उतने में चुपके से बाए आँख के पोर से एक आंसू की बूँद जैसे खुद रोते हुए मेरी हथेली पर आ गिरी जैसे कह रही हो मुझे मेरा ही दोष है...

  • गांव की औरतें….

    गांव की औरतें….

    गाँव की औरतें…. जितना चाहती हूँ उस बात को भूल जाना उतना ही याद आता गाँव की उन हमउम्र औरतों का रोना उनके दर्द उनके आँसू बार-बार मुझे खुरेदती है चारदीवारी में कैद उनकी जिंदगी जानवरों...

  • प्रेम

    प्रेम

    प्यार…… प्यार का दर्द क्या होता है ये तो वही जाने जिसने किया है कितनी तड़प होती है सीने में ये भला कोई आम दिल इंसान क्या जाने बदल जाता है सबकुछ देखते ही देखते जब...

  • झूठ……

    झूठ……

    बिगड़ती है बात तो आज बिगड़ जाने दो…. झूठ के पर्दे से सच को बाहर आ जाने दो…. कब तक दम घोटेगी भ्रष्टाचार ईमानदारी के स्वर का बेईमानों को आज बेनकाब हो जाने दो….. सफेदपोशी के...

  • मन…..

    मन…..

    ये मन भी न ! सुकून की साँस ही नहीं लेने देता हर वक़्त कोई न कोई “ऐसी बात” मन में चलता ही रहता जो कभी चैन से जीने ही नहीं देता इतना ही नहीं !...

  • कठपुतली

    कठपुतली

    हाँ ! मुझे कठपुतली ही कह लो तुम ! यही सही रहेगा ना कोई वजूद मेरा न कोई पहचान है बस, तुम्हारे इशारों पे नाचने डोलने वाली एक खिलौना हूँ मैं जिसके अनगिनत धागे फँस गए...

  • एक पल…

    एक पल…

    हाँ ! उस एक पल का ही दोष था जब तुम्हारी नजरों ने मुझे प्यार से देखा था उसी एक पल ने ! मेरे जीवन के न जाने कितने खूबसूरत पलों को चुरा लिया सच ही...

  • कुछ ऐसी बात…..

    कुछ ऐसी बात…..

    बातों ही बातों में कुछ ऐसी बात हो गई बन गया मन से मन का रिश्ता और हमें खबर तक न लगी कर लिया मेरे एहसासों ने मुझसे ही धोखा न जाने कब करके मुझे बेखबर...

  • बेटी का जन्म

    बेटी का जन्म

    एक तो प्रसव पीड़ा का दर्द उसपर घरवालों का डर कैसे रोक पाए वो माँ अपने झरझराते आंसुओं को खाए जा रहा था ये मर्म कि इसबार फिर उसने दिया है बेटी को जन्म न कर...

  • उसकी यादों में…..

    उसकी यादों में…..

    वो है इस बात से बेखबर जागती हूँ रातों को उसे याद कर सोने नहीं देती मुझे उसके एहसासों की छुअन खलबली मचाए रखती है उसके होने की सिहरन गुज़र जाती है रात मेरे बिस्तर से...