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  • यादें…..

    यादें…..

    सुनो ! तुम्हारी यादें कहाँ सहज होती है जो याद आएं और भूल जाएं ये तो तूफान और सुनामी लाती है और क्या ! असहज कर देती है मुझे टूटने लग जाता है फिर मेरा वास्तविकता...

  • प्रेम….

    प्रेम….

    प्रेम सुनो ! हरदिन तुम्हारा जल्दी जाना और देर से आना मुझे उदास कर देता है जानते हो ना ! तुम्हारे प्रेम में हूं मैं…. फिर मौसम का सुहाना भी जेठ की दोपहरी सा लगता है...

  • जिंदगी…..

    जिंदगी…..

    जिंदगी एक अध्ययन है अपनेआप पर नियति के अनेक प्रयोग दिन प्रतिदिन होते रहते है हमपर झेलते है हम सभी कभी अचानक दुःख के जानलेवा तूफान बवंडर को तब कहीं जाकर बड़ी मुश्किल से वक्त के...

  • दर्द

    दर्द

    कुछ दर्द अपवाद होते है इतना असहनीय की पल- पल आंखों में आंसू भर देते है बीमारी का दर्द तो दवाईयां असर कम कर देती है पर जब अपनों से मिलते है बेतहासा दर्द…. उम्मीद से...

  • बचपन

    बचपन

    बचपन का सफर कितना सुहाना होता है ना ! न कोई चिंता न कोई फिक्र हर उलझन से मुक्त जिंदगी बसंत की भांति इधर से उधर उन्मुक्त बहता रहता बेतहासा खुशियां खुद में समेटे गमों से...

  • प्रेम

    प्रेम

    ये तन्हाईयाँ ढूंढ ही लेती है तेरा पता छा जाता तू मेरे मन पे इसतरह सांसों की आहट में जिंदगी बसती हो जिसतरह आता है जब तू मन के आंगन में मैं महफिल तू रौनक हो...

  • खामोशी….

    खामोशी….

    जुबां  खामोश पर कहने को बात बहुत है गुमसुम का लिबास ओढ़े लब पर खलबली बहुत है बयां  हो रही आंखों से जज्बात पढ़ने वाले शातिर बहुत है चेहरे की मासूमियत में दिल के एहसास छुपाएं...

  • प्रेम कविता

    प्रेम कविता

    ये तन्हाईयाँ ढूंढ ही लेती है तेरा पता छा जाता तू मेरे मन पे इसतरह सांसों की आहट में जिंदगी बसती हो जिसतरह आता है जब तू मन के आंगन में मैं महफिल तू रौनक हो...

  • यादें…..

    यादें…..

    यादें कभी ठहरती नहीं वो बहती रहती है नदी की भांति कभी उफनती है तो कभी शीतलता का सुकून भी कराती है अन्तस् को कुछ आज की तो कुछ बीते दिनों के लम्हों को दोहराती है...

  • प्रेम

    प्रेम

    सुनो ! क्यों तुमसे पलभर की भी जुदाई सही नहीं जाती मुझसे। तुम्हारे जाते ही उदास मन अकेलेपन का लिबास ओढ़ लेता है। रूठने लग जाती हूँ खुद से ही मैं !! फिर ,एक बेरुखी मेरे...