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  • हे शिव शंकर

    हे शिव शंकर

    हे ! शम्भू हे! शिव शंकर, हे! कैलाशी हे! महादेव। हे!श्रवण मास के शुभदेवता, है तुमको आज प्रणाम निवेदित। आओ हृदय में निवास करो, भारत का कुछ कल्याण करो। दूर हतासा अंधकार हो, सुंदर सुखमय जन...

  • स्वाभिमान

    स्वाभिमान

    मैं चारण और भाट नहीं हूं, जो दरबारों में शीश झुकाऊं। मैं सच को कहता लिखता हूँ, चाटुकारिता को न मैं अपनाऊँ। कभी नही मैं लिख सकता हूँ, झूंठी प्रसंसा को गीतों में। कभी नही मैं...


  • मेरी अभिव्यक्ति

    मेरी अभिव्यक्ति

    जो जनता को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं, देशभक्ति और संस्क्रति के परिचायक हैं। अब लगता है कि सत्ता के मद में डूब गए, एक सीट को पाने में दुश्मन से खेल गये। पापी कुटिल अनाचारी...

  • कविता – परिचय

    कविता – परिचय

    दिनकर का वंशज हूँ मैं श्रृंगार नहीं गा पाउँगा। चूड़ी कुमकुम बिंदिया वाले गीत नहीं लिख पाउँगा।। मैं तो केवल गीत लिखुँगा भारत माँ के वन्दन के। मैं तो केवल गीत पढूंगा भारत माँ के अभिनन्दन...



  • वसन्त

    वसन्त

    वसन्त ऋतु का हुआ आगमन, चहुँ ओर सुरम्य हरियाली है। पेड़ों पौध लताओं में सुमन खिले, खेतों खलिहानों में कोयल कूक निराली है।। फसलों में अन्न का अंकुर फूटा, घर- घर मे फागुन की बयार रसवाली...