कविता

श्री राम

श्री राम आदि हैं अनन्त हैं श्री राम प्रभात हैं साम हैं श्री राम ब्रह्म हैं तत्व हैं श्री राम चैतन्य हैं चिरन्तन हैं श्री राम अभिव्यक्ति हैं अभिवादन हैं श्री राम सम्बोधन हैं समष्टि हैं श्री राम ज्ञान हैं विज्ञान हैं श्री राम मर्यादा हैं मान हैं श्री राम प्रकृति हैं चेतन हैं श्री […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

भगवान श्री राम राष्ट्र के आधार सेतु हैं

५७० वर्षों के बाद आज वह पुण्य दिन आ रहा है जब भारतवर्ष के जन-जन के आराध्य भगवान श्री राम का भव्य मंदिर निर्माण का कार्य हो रहा है। यह भारत का स्वर्ण काल है। भगवान श्रीराम केवल मर्यादा पुरुषोत्तम ही नही अपितु राष्ट्र की संस्कृति, सभ्यता, सम्बोधन, समन्वय अभिव्यक्ति, अभिवादन के पर्याय हैं। भारतीय […]

राजनीति

पुनः मजदूरों का न हो पलायन

वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारत एक नए मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है। जहाँ उसे एक ओर इस महामारी से लड़ना है वहीं दूसरी ओर भारत की डगमगाती अर्थ व्यवस्था को सुधारने की जरूरत है। सभी प्रकार के कल कारखाने एक प्रकार से बंद की स्थिति में हैं। कारखानों को चलाने वाले मजदूर भारी […]

गीत/नवगीत

नववर्ष तुम्हारा स्वागत है

हे सृष्टि के प्रथम दिवस! नववर्ष तुम्हारा स्वागत है बीत गया है वर्ष पुराना नूतन की तैयारी है जो बीता जैसा बीता स्वर्ण समय की बारी है मातृभूमि हमारी भगवन, जग में निर्मल परिभाषित है नव वर्ष तुम्हारा……. मन को दृढ़ निश्चय कर आशाओं का संकल्प करें प्रथम दिवस की प्रथम किरण प्रगति मार्ग को […]

सामाजिक

प्रसिद्धि समाज को बना रही संवेदनाहीन

सद्कार्य, दान ,उपकार आदि हर कार्य में कई लोगों को एक ही नशा रहता है, वह है प्रसिद्धि का नशा। अभिमान, प्रसिद्धि का नशा समाज में चारों ओर देखने को मिलता है। परोपकारी कार्य में लगे लोग अपनी पहचान, उपस्थिति, सम्मान, मंच, स्वागत आदि पर विशेष ध्यान देते हैं। और इस कारण होने वाला सेवा […]

कविता

बहुत हो चुकी मनमानी

:-बहुत हो चुकी मनमानी-: बहुत हो चुकी राजनीति है, बहुत हो चुकी मनमानी अब नही चलेगी एक तुम्हारी, सुन लो पाक की नानी सीधे उठलो घर को जाओ, सैय्यद, जफर, गिलानी वरना तुमको खानी होगी, बेगम गोली की बिरयानी बहुत हो चुकी मनमानी…. मौज काट ली अब तक तुमने शाहीनबाग की लाली पत्थर फेंका आगजनी […]

गीत/नवगीत

राजनीति

मौन रहो विष पान करो, मत राजनीति पर बात करो जो होता है हो जाने दो, भारत जलता है जलने दो गूंगे बहरों की बस्ती है, जयचन्दों की बनती हस्ती है। यह अटल सत्य स्वीकार करो भारत मत बदनाम करो मौन रहो……. रोहिंग्या को भारत आने दो, सेना पर पत्थर पड़ने दो। शरीयत फरमान सुनाना […]

गीत/नवगीत

स्वातन्त्र्य वीर सावरकर

नमन तुम्हें हे राष्ट्रपुरुष,शत कोटि निवेदित प्रणाम तुम्हें भारत के हे मानबिंदु, जीवन से ऊंचा सम्मान तुम्हें। आजादी के अग्रदूत स्वातंत्रय वीर सावरकर हैं मातृभूमि के अमर सपूत स्वातंत्रय वीर सावरकर हैं कोटि कोटि हृदयों में बसते स्वातंत्रय वीर सावरकर हैं राष्ट्रभक्त की हर ज्वाला में स्वातंत्रय वीर सावरकर हैं। मातृभूमि की स्वतंत्रता हेतु, होम […]

गीत/नवगीत

हिंदी की बिंदी

हिंदी की बिंदी लगे बिना, पूरा श्रृंगार नही होगा। बिन हिंदी के भारत कभी वैभवसम्पन्न नही होगा। अंग्रेजियत को दूर करो, निज भाषा को अपनाओ, स्वाभिमान से उठो भरत पुत्र, हिंदी को अपनाओ। परतन्त्रता को दूर भगाओ, हिंदुस्थान की माटी से, हिंदी की वैज्ञानिकता लाओ भारत की परिपाटी से। तंत्र स्वदेशी, मन्त्र स्वदेशी, भाषा, भजन […]

गीत/नवगीत

चांद के पार चलो

चांद के पार चलो, चांद के पार चलो, चलो – चलो अब चांद के पार चलो। चांदनी मचल रही, चांद को निहार कर, यामिनी लहर रही, राग तान-तान कर। कीर्ति है बुला रही, इसरो को ताक कर, फिर उठो झूम झूम, चन्द्रयान टू चलो चांद के पार चलो, चांद के पार चलो, चलो – चलो […]