गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका – 2

उम्र सीढ़ीयां चढ़ती जाये , यौवन भरे कुलांचे ! कैसे दिल का हाल बतायें , मन मयूर है नाचे !! रूप रंग तो बरसा ना है , दुख की छांव घनेरी ! काया मिली सलोनी ऐसी , कैसे इसे तराशें !! कारी कारी अँखियों में जो , उजले ख़्वाब बसे हैं ! न्यारे न्यारे लगते […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका – 1

मुस्कानों को सरल बनाना , सीखे कोई हमसे ! मर्यादा में रहना भी है , सचमुच हमें कसम से !! लम्हों को गुलज़ार बना दें , ऐसे जादूगर हैं ! आसपास परिहास सिमटता , आँचल लिपटे तन से !! उमड़ घुमड़ कर रूप सलोना , ऐसे छा जाता है ! नज़रें नहीं मिला पाते हैं […]