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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कहते हैं कि तू ज़र्रे-ज़र्रे में रहता है। सदियों से जमाना यही कहता है।। लगता है कि मेरे रगो-रेशे में तू है, तू जो कहलवाता है वही कहता है। मेरा वजूद ही तू है तुझसे मैं,...

  • बालगीत – मैं पुस्तक कहलाती

    बालगीत – मैं पुस्तक कहलाती

    अपनी  सारी  कथा  सुनाती। कहती ‘मैं पुस्तक कहलाती।।’ ‘मेरे  अन्दर    गीत    कहानी। मेढक मछली   नाना  नानी।। रंग – बिरंगे   चित्र    सजे  हैं। देखो   उनको   बड़े  मजे हैं।।’ सपनों   में  मेरे    आ  जाती।...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    आस्तीनों में  छुपे  साँप  दग़ा देते हैं। खून अपनों का ज़माने में बहा देते हैं।। घर बनाने  में बड़ी   उम्र ख़र्च होती है, लोग उस घर को  बिना बात जला देते हैं। हरेक लम्हा जो फिरते...


  • प्रकृति और योग

    प्रकृति और योग

    प्रकृति से दूर विकृति भरपूर, प्रकृति का साथ जीवनी -शक्ति का हाथ, प्रकृति की विकृति ही जगत, जगती सृजन सृष्टि, प्रकृति और पुरुष का योग नवीन सर्जना का सुयोग।  प्रकृति क्या है? ब्रह्मांड की ज्या है,...

  • सात सुर

    सात सुर

    स र ग म के सात सुर, साथ -साथ सात सुर, सुर में सुर मिलाते, नया संगीत सजाते, श्रवण से हृदय  में- उतर -उतर जाते, कभी मेघ मल्हार बन- धरा पर मेघ बरसाते, कभी राग दीपक...

  • बालगीत : वर्षा आई

    बालगीत : वर्षा आई

    अम्मा    देखो     वर्षा   आई। रिमझिम रिमझिम बुँदियाँ लाई। हम  नहाएँगे   बाहर   जाकर, सड़क खेत गलियों में आकर, दौड़  भाग  कर  धूम   मचायें, नाचें    कूदें       गाने      गाएँ, लगती   वर्षाऋतु   ...


  • हमारी मानसिकता

    हमारी मानसिकता

    मानव जीवन मन से संचालित है। वही इस शरीर रूपी रथ का सारथी है। इस तथ्य को भगवान श्रीकृष्ण ने श्री मद्भगवत गीता में विस्तार से समझाया है। इन्द्रयों रूपी दस घोड़े उसे अपनी -अपनी दिशा...