Author :

  • गीतिका

    गीतिका

    धुआँ -ए- पराली पिए जा रहा हूँ। हूँ इन्सां,पशु – सा जिये जा रहा हूँ।। न डर है किसी को तबाही का अपनी, इसी ग़म का बोझा लिए जा रहा हूँ। मुझे देश के दुश्मनों से...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बेसुरे गीत इंसान गाने लगा। आदमी आदमी को खाने लगा।। दौलत के लिए अंधा बहरा बना, नीति को टाँग धन कमाने लगा। हवस का हर पुजारी दरिंदा हुआ, नारियों को दनुज -सा सताने लगा। किसका विश्वास...

  • बालगीत – चींटी 🐜🐜

    बालगीत – चींटी 🐜🐜

    चींटी जब पथ पर बढ़ती है। ऊँचे पर्वत पर चढ़ती है।। चढ़ती फिर नीचे गिर जाती। गिर गिर कर मंजिल को पाती जब चींटी जिद पर अड़ती है। ऊँचे पर्वत पर चढ़ती है।। थकती नहीं हारती...

  • गीत – छलिया आदमी

    गीत – छलिया आदमी

    आदमी ही आदमी को छल रहा है। आदमी से आदमी क्यों जल रहा है।। मान – मर्यादा हुई तार – तार इतनी! टूटी सरहद मान की लगातार कितनी?? आदमी को आदमी क्यों खल रहा है। आदमी...


  • बाल गीत – बच्चे वही सफलता पाते

    बाल गीत – बच्चे वही सफलता पाते

    सही समय विद्यालय जाते। बच्चे वही सफलता पाते।। जल्दी जगना जल्दी सोना। स्वस्थ देह दिमाग भी होना।। गुरु जी हमें नित्य समझाते। बच्चे वही सफलता पाते।। करते मात -पिता का आदर। शीश झुकाते गुरु को सादर।।...


  • जीवन का संगीत

    जीवन का संगीत

    जो मेरा मनमीत बन गया। जीवन का संगीत बन गया।। जीवन की राहें रपटीली। उबड़ – खाबड़ और कँटीली।। हर पल-पल संग्राम ठन गया। जीवन का संगीत बन गया।। अपना जैसा सबको माना। हृदय दे दिया...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मैं कहाँ से था चला कहाँ आ गया। तूफ़ान से रास्ता मेरा टकरा गया। टुकड़े – टुकड़े जी रहा था ज़िन्दगी वक़्ते – आख़िर में ज़माना भा गया। रोज सूरज कर रहा है रौशनी, ज़िंदगी में...

  • बाल गीत – कुकड़ कूँ गाता

    बाल गीत – कुकड़ कूँ गाता

    सुबह हुई तो बाँग लगाता। मुर्गा गीत कुकड़ कूँ गाता।। कहता हमसे जागो प्यारे। आलस छोड़ो सुबह सकारे।। अपने साथ मुर्गियाँ लाता। मुर्गा गीत कुकड़ कूँ गाता।। कलगी लाल शीश पर डोले। मस्त चाल चलकर नित...