कुण्डली/छंद

कुण्डलिया- गौ माँ

-1- गौ माँ!गौ माँ!!कर रहे, सुलभ न चारा घास। मारी-मारी फिर रहीं,गौ माँ आज निराश।। गौ माँ आज निराश, सड़क पर भटकें सारी। गली – गली में रोज, नरक झेलें बेचारी।। ‘शुभम’ खोखला नेह, झूठ वे कहते हैं माँ। खाती सभी अखाद्य,आज वे अपनी गौ माँ। -2- माता के सम्मान से, वंचित सारी गाय। दूध […]

बाल कविता

बालगीत – पिल्ला

मोटा जी ने पिल्ला पाला। लंबे भूरे बालों वाला।। रोज सैर को पिल्ला जाता। तनकर चलता शान दिखाता। पट्टा गले पड़ा रँग वाला। मोटा जी ने पिल्ला पाला।। कुत्ते गली मोहल्ले वाले। देख भौंकते भूरे काले।। पिल्ला वह जंजीरों वाला। मोटा जी ने पिल्ला पाला।। बिस्कुट,ब्रेड ,दूध वह पीता। नहलाती नित बाला नीता।। महके साबुन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

उन्हें क़ातिल बताया जा रहा है। लहू जिनका बहाया जा रहा है।। समंदर से चला दरिया पलट कर, पहाड़ों पर चढ़ाया जा रहा है। नियत खोटी हुई है आदमी की, मुहब्बत को सताया जा रहा है। नहीं मालूम हैं जीवन के मानी, उसे तो बस बिताया जा रहा है । फ़क़त इंसान अंधा इस कदर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कर्ता का खेल निराला है। बालू से तेल निकाला है।। तू समझ रहा मैं कर्ता हूँ, घड़ियों ने तुझको ढाला है। सीमा का भंजन किया सदा, वह आफ़त का परकाला है। करनी अपनी देखता नहीं, आँखों पर उसके जाला है। गुर्गों को पाल झूमता है, गर्दन में मोटी माला है। है देर मगर अंधेर नहीं, […]

बाल कविता

बालगीत – सावन आया

सावन आया वर्षा लाया। देखो काला बादल छाया।। लू गर्मी से मुक्ति मिली है। ठंडी – ठंडी हवा चली है।। मौसम प्यारा बहुत सुहाया। सावन आया वर्षा लाया।। रिमझिम बरस रही हैं बूँदें। हम पानी में नाचें – कूदें।। वर्षा का यह गीत सुनाया। सावन आया वर्षा लाया।। छाएगी हरियाली भारी। धरती हरी – भरी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर बुरे काम का अंजाम बुरा है। बद से ज्यादा यहाँ बदनाम बुरा है।। किसी चेहरे के पार नीम अँधेरा, दिल बुरा है तो उसका चाम बुरा है। आदमी की तरह,आदमी नहीं रहता, कैसे कह दूँ कि हरिक गाम बुरा है। जिसको मालूम नहीं वक्त की कीमत, उसकी खातिर तो ये आराम बुरा है। जो […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य – कवि जी !

वे अपने को कवि कहते हैं।कहते ही नहीं अपने नाम से पहले लिखते भी हैं। जब वे कवि हैं तो भला किसकी जुर्रत है कि उन्हें कोई कवि न कहे , कवि की मान्यता न दे।अपने पूरे मोहल्ले में तो कवि जी कवि जी का हल्ला मचा ही रहता है , पूरे शहर में भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दूषित न कर इस गंगा नदी को। बहाती जो अमृत नमन जिंदगी को। सूखे पहाड़ों से जो बह रही हैं, भुला मत प्रकृति की परम वंदगी को। ये झरने ये नदियाँ ये झीलें हजारों, हैं जीवंत कविता औ’शायरी को। अभागा न बन मत बर्वाद कर तू, नमन कर हजारों इस सरज़मी को। गाई हैं रब […]

बाल कविता

वीर बहूटी – बालगीत

वीरबहूटी कहलाती हूँ। छूते ही शरमा जाती हूँ।। लाल रंग मखमल-सी काया। जिसने देखा रूप सुहाया।। रेंग – रेंग कर मैं जाती हूँ। वीरबहूटी कहलाती हूँ।। जब अषाढ़ में बादल घिरते। धरती पर जल वर्षा करते।। भूतल के ऊपर आती हूँ। वीरबहूटी कहलाती हूँ।। बच्चे मुझे प्यार करते हैं। छू -छू कर मुझसे डरते हैं।। […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुझमें कोई तो कमी रही होगी। आँख में कुछ नमी रही होगी।। पत्थरों में भी बीज बो डाले, उस जगह कुछ जमीं रही होगी। उनको देखा तो चश्म भर आए, उनके घर में गमी रही होगी। हाथ छूते ही गिर पड़े थे वे, वह कोई इक डमी रही होगी। बहुत जोरों का इक तूफान उठा, […]