गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुझे लोग ग़ज़ल कहने नहीं देते। सुकूँ से मुझे रहने नहीं देते।। सवाल-दर-सवालों से उलझता हूँ मैं, दरीचे से बाहर रहने नहीं देते। चिन्दियों में बिंदियों का रख़ते ख़याल, मुझे अपनी रौ में बहने नहीं देते। ख़ुद तो कहेंगे पर बंदिश यहाँ, मुझे मेरा रस्ता गहने नहीं देते। क्या है ‘बहर’क्या है ‘काफ़िया’ ‘शेर’के ‘मतला’  […]

बाल कविता

बाल गीत – बाबा कैसे होते गाँव

बाबा   कैसे   होते  गाँव। गाँव देखने  का है चाव।। घर कुछ छोटे बड़े गाँव में, बच्चे खेलें सघन छाँव में, बरगद पीपल नीम खड़े हैं, कुछ छोटे कुछ बहुत बड़े हैं, हरे -भरे  पेड़ों  की छाँव। बाबा  कैसे  होते   गाँव।। चारों ओर खेत गाँवों के, कहीं पेड़ सुंदर आमों के, खेतों में  सरसों  गेहूँ की- […]