लघुकथा

माँ

रमली को आज आने में देर हो गई  । हरी दारू के नशे में अनाप-शनाप बक रहा था । बेटी बुधिया को दो-तीन तमाचे जड़ चुका था । वह कोने में सिसक रही थी । रमली के आते ही हरि बरस पड़ा – “आ गई देवी जी …इतनी देर कैसे हुई आज ..? मालूम है […]

लघुकथा

शर्त

चेतना अपनी माँ की इकलौती पुत्री थी । दो वर्ष की रही होगी तब पिताजी का साया सर से उठ गया था । वह विवाह योग्य हो गई थी । माँ भी बेटी के विवाह के लिए चिंतित रहती । इसी चिंता में माँ की सेहत बिगड़ने लगी थी । बेटी की सकुशल घर बस […]

लघुकथा

लघुकथा – भरोसा

पिताजी की आदतों से रोहन बहुत परेशान था । जिसने भी रोहन के पढ़ाई के बारे में पूछा पिताजी का एक ही जवाब होता ‘धीरज धरो महाशय बेटा अफसर ही बनेगा ।’ प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में रोहन तीसरी बार असफल हुआ था । अब तो पिताजी के बातों से भी नफरत हो गई थी।  […]

लघुकथा

साॅरी

लता का छः वर्षीय बेटा अपनी छोटी बहन से एक रोटी ज्यादा  खाने की जिद करने लगा इसपर लता आग बबूला हो गई । लता के हरकतों को देखकर उसकी सहेली बोली -” लड़का तो लड़का है यार इस तरह नहीं डांटना चाहिए । एक रोटी ज्यादा हो गयी तो क्या हुआ बेटी को इसकी […]

कविता

कदम तुम, बढ़े चलो

देख ध्यान हटे नहीं गंतव्य पथ मिटे नहीं लक्ष्य में निगाहे , राह और दिखे नहीं चले चलो, चले चलो कदम तुम, बढ़े चलो आँख कान सजग रहे सोया जग तू जग रहे शत्रुआलस्य कामना से, सतर्क पग-पग रहे गिरे मगर, उठे चलो कदम तुम, बढ़े चलो दामिनी सी चाल हो इच्छा शक्ति ढाल हो […]

लघुकथा

सबक

“बाबूजी… आपके बहू का कहना है कि हम अलग रहना चाहते हैं ..।” राघव अपने पिता गोविंद जी से कहा । “अच्छी बात है, कब अलग हो रहे हो…?” गोविंद जी अखबार पर नजर गड़ाए ही बोले । “आप हमें हमारा हिस्सा दें फिर हम अलग हो जाएँगे ” राघव अपनी सफाई में कहा । […]

लघुकथा

लघुकथा – गलती

“हैल्लो भाभी….घर कब आ रही हो?” गुंजन अपने भाभी को फोन पर पूछने लगी । “साहब क्या कर रहे हैं….जो आपको फोन करना पड़ा ?” भाभी थोड़े गुस्से में बोली । “भैया….? थोड़ी देर पहले ड्यूटी से आऐं हैं, लगता है पेंटिंग कर रहे हैं ।” गुंजन हँसते हुए बतायी । ” तो आपने फोन […]

लघुकथा

सजा

जेल में सजा काट रहे पति ही एकमात्र घर के सहारा थे । जवान पत्नी कहाँ जाए काम करने जहाँ भी जाती लोगों के नजरों और तानों का शिकार होती । पति से जेल में मिलने आयी थी । पत्नी को देखकर पति रो पड़े पत्नी भी रोने लगी । “कैसी हो नीलू ?” आँसू […]

लघुकथा

उम्मीद

‘सब्जी वाली…. सब्जी वाली… ले लो दीदी, गोभी, भिंडी, टमाटर, धनिया, मिर्च…।’ प्रत्येक रविवार को वह सायकिल से सब्जी बेचा करती । एक रविवार धनिया लेने के बहाने उनको रोका । सब्जियों के दाम पूछा, थोड़ी सी हिम्मत जुटा कर पूछा -‘ दीदी..बुरा न मानो तो एक बात पूछूँ ?’ ‘ हाँ पूछो …’ थोड़ी […]

लघुकथा

नया रिश्ता

अगस्त का पहला रविवार था । सौरभ का मिजाज बदला-बदला सा लग रहा था । पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि अन्नू के लिए चाय बनायें, हमेशा अपना रौब झाड़ता था । थाने की पुलिसगिरी घर में भी चलती थी । अन्नू के लिए किसी अजूबे से कम नहीं लग रहा था । सौरभ पौधों […]