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  • लेख

    लेख

    जो दूसरों के दोष पर ध्यान देता है वह अपने दोषों के प्रति अंधा हो जाता है। ध्यान आप या तो अपने दोषों की तरफ दे सकते हैं, या दूसरों के दोषों की तरफ, दोनों एक...

  • गज़ल

    गज़ल

    जानता हूँ कि न आएगा पलट कर तू मैं एक मील का पत्थर हूँ और मुसाफिर तू मुझे यकीन है तुझको भी इश्क है मुझसे ये और बात है करता नहीं है जाहिर तू तुझसे मिल...

  • गज़ल

    गज़ल

    होकर हालात का शिकार बदल जाती है नीयत का क्या है बार-बार बदल जाती है ========================== करती है वादे सारी ज़िंदगी के ये दुनिया चलके साथ कदम दो-चार बदल जाती है ========================== पहले तो बनाती है...

  • गज़ल

    गज़ल

    बहुत छोटा सा मसला है मगर क्यों हल नहीं होता निगाहों से मेरी चेहरा तेरा ओझल नहीं होता दीवाने तो मिलेंगे बहुत तुमको पर समझ लेना हरेक लकड़ी का टुकड़ा जानेमन संदल नहीं होता भरी होकर...

  • गज़ल

    गज़ल

    बस कुछ कर गुज़रना चाहता हूँ ज़माने को बदलना चाहता हूँ जहां को रोशनी देने की खातिर बनके शम्स जलना चाहता हूँ ठहर जाने का मतलब मौत ही है मैं सारी उम्र चलना चाहता हूँ रगों...

  • गज़ल

    गज़ल

    लबों पे लेकर निकले हैं इंकलाब का नारा लोग, बदलेंगे तस्वीर वतन की हम जैसे आवारा लोग ऐसी आँधी आएगी ज़ालिम तू भी बच ना पाएगा, सीना तान कर खड़े हुए हैं बेघर बेसहारा लोग कर...

  • कविता

    कविता

    ये जो तुम आज ठूंठ देखते हो कभी हुआ करता था वृक्ष हरा भरा जिसकी हरियाली से थी घर में खुशहाली शीतल छाया में जिसके दिन भर की थकन पल में मिट जाया करती थी चारों...

  • कविता

    कविता

    जब भी करता हूँ इक़रार अपनी चाहत का उससे सब जानकर भी बनते हुए अंजान अल्हड़पन से खिलखिलाती पूछने लगती है व्याख्या एहसासों की बिल्कुल पगली सी है कैसे समझाऊं उसे एहसास व्याख्यायित करने के लिए...

  • कविता

    कविता

    रोज़ की तरह आज सुबह भी ले आया हूँ एक खूबसूरत आज मजबूरियों के कत्लखाने में कि उतारकर खाल इसकी बोटी-बोटी कर बेच दूँगा शाम तलक ताकि भर सके मेरी और मेरे परिवार की ज़रूरतों का...

  • गज़ल

    गज़ल

    दिल कहूँ दिलबर कहूँ दिलदार दिलरूबा कहूँ, कभी तुम्हें सनम कहूँ कभी तुम्हें खुदा कहूँ हमसफर तू हमकदम तू हमदम तू हमराज़ तू, तुमको ही मंज़िल कहूँ तुमको ही रास्ता कहूँ मौजूद ना होके भी तू...