Author :

  • लेख- उदारता और कंजूसी

    लेख- उदारता और कंजूसी

    उदारता जहां मानव के सर्वश्रेष्ठ गुणों में से एक है वहीं कंजूसी को अधिकांश लोग अच्छा गुण नहीं मानते। परंतु अगर सही स्थान और सही स्थिति में कंजूसी की जाए तो इसके अनेक लाभ हो सकते...

  • गज़ल

    गज़ल

    दुआ ये दो मुझे मेरा सुखन पुकार उठे आफरीन सारी अंजुमन पुकार उठे साथ-साथ चले साया-ए-बहार मेरे जहां से निकलूँ मैं चमन-चमन पुकार उठे छुपाऊँ लाख मैं चाहे तुम्हें इस दुनिया से आँख कह दे, माथे...


  • गज़ल

    गज़ल

    अपनी-अपनी ख्वाहिशों की आग में जलता मिला इस गज़ब की भीड़ में हर आदमी तनहा मिला सुबह से लेके शाम तक जिसने हंसाया लोगों को रात को पर्दे के पीछे वो मुझे रोता मिला तेज़ होते...

  • गज़ल

    गज़ल

    रेत का महल हूँ हवा से भी डर जाता हूँ ज़रा सी ठेस क्या लगती है बिखर जाता हूँ हालातों ने बदल डाली इस कदर सूरत आईना देखकर कभी-कभी डर जाता हूँ हर सुबह रोज़ होता...

  • गज़ल

    गज़ल

    ज़िंदगी कट गई इम्तिहां की तरह कोई भी ना मिला मेहरबां की तरह ====================== छोड़कर चल दिए बारी-बारी सभी मैं हूँ टूटे-पुराने मकां की तरह ====================== कान दीवारों के होते हैं आजकल आँख से काम लो...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जाने वाले लौट आ कि तबियत उदास है कोई गीत गुनगुना कि तबियत उदास है काटने को दौड़ते हैं रेशमी बिस्तर बाहों में ले सुला कि तबियत उदास है दम ना निकल जाए मेरा प्यास से...

  • गज़ल

    गज़ल

    मुसाफिर रहे ता-उम्र ना घर हमने बनाया मंज़िल तुझे, तुझे ही सफर हमने बनाया शोहरत अता की अपने बेपनाह इश्क से तेरा हुस्न काबिल-ए-ज़िकर हमने बनाया गुज़रा ना था इस राह से हमसे कोई पहले इस...

  • मौन

    मौन

    मौन शब्द की संधि विच्छेद की जाय तो म+उ+न होता है। म = मन, उ = उत्कृष्ट और न = नकार। मन को संसार की ओर उत्कृष्ट न होने देना और परमात्मा के स्वरूप में लीन...

  • गज़ल

    गज़ल

    कुछ पता ही ना चला कैसे, कहां, किधर गई चार दिन की ज़िंदगी ना जाने कब गुज़र गई एक-एक करके सारे हमसफर बिछड़ गए बस धुआं-धुआं ही था जहां तलक नज़र गई आँधियों से शर्त लगाकर...