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  • कविता

    कविता

    इस पूरे जीवन में हम सब, रिश्ते तो बहुत बनाते हैं, कुछ हमको फायदा देते हैं, कुछ हमसे फायदा पाते हैं, मजबूरी में फिर रिश्तों के, व्यापार भी करने पड़ते हैं, पसंद ना हों उन लोगों...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इश्क की आग में इक बार जल के देखते हैं, पहलू-ए-यार में हम भी मचल के देखते हैं जिंदगी कट ना जाए इंतज़ार में ही कहीं, वो तो आएगा नहीं हम ही चल के देखते हैं...

  • कविता

    कविता

    बड़ी मासूमियत से, एक दिन उसने मुझे पूछा, मुहब्बत नाम है किसका, मुहब्बत कैसी होती है, कहा मैंने सुनो जानां, मुहब्बत के बहुत रंग हैं, इबादत की तरह इसके, ना जाने कितने ही ढंग हैं, कभी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    गमगीन ये वातावरण है, इक तेरे जाने के बाद। आँखों में भी जागरण है, इक तेरे जाने के बाद। ले गए तुम साथ अपने आस भी, विश्वास भी, श्वास लेना भी कठिन है, इक तेरे जाने के बाद। गीत सब...

  • नापाक इरादों पर

    नापाक इरादों पर

    रहा नहीं अब शक कोई उनके नापाक इरादों पर ना करो भरोसा बार-बार हमसाए के झूठे वादों पर जितनी बार हाथ दोस्ती वाला हमने बढ़ाया है उतनी बार हमारी पीठ में इसने छुरा घुसाया है ना...


  • गीत

    गीत

    चाहे जितना भी समझा लो इसे समझ ना आएगा जब भी मौका मिला फिर वही राग बेसुरा गाएगा कभी ना सुधरेगा ये ना ही अपनी हरकत छोड़ेगा हड्डी देखेगा जब कुत्ता पूँछ उठा कर दौड़ेगा प्यार...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तीखे मोड़ हों जिसमें वो राह अच्छी नहीं होती, ए मेरे दोस्त बिन माँगी सलाह अच्छी नहीं होती उड़ा देती है छत बस्ती के सब कच्चे मकानों की, बहुत ज्यादा भी तूफानी हवा अच्छी नहीं होती...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    साफ नीयत जनाब रखना, नज़र कभी ना खराब रखना अच्छा है पैर हों ज़मीं पर, मगर निगाहों में ख्वाब रखना हो गुनगुनी धूप सी मुस्कुराहट, और आँसूओं में सैलाब रखना दरिया में नेकियां डाल देना, गुनाहों...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इंसानियत को रोते ज़ार-ज़ार देखकर, हैरान हूँ नफरत की मैं दीवार देखकर परवरदिगार भी है शर्मसार खुद से आज, ये मजहबों के बीच की दरार देखकर शायद शहर में कल भी कुछ अच्छा नहीं हुआ, लगता...