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  • गजल

    गजल

    मुझपे ये आखरी एहसान कर दे, बस मेरा हौसला चट्टान कर दे आज़माइश से ना हो खौफ मुझको, मुसल्लम तू मेरा ईमान कर दे मेरी पहचान खुद से ही करा दे, भले दुनिया से फिर अनजान...

  • गजल

    गजल

    इक तो अब हो गई पुरानी भी, हमको आती नहीं सुनानी भी तुम अपने गम से भी नहीं खाली, है अधूरी मेरी कहानी भी आशिकी मर्ज़ लाइलाज भी है, और पैगाम-ए-ज़िंदगानी भी थोड़ा तूने भरोसा तोड़...

  • गजल

    गजल

    कातिल चारागर लगता है, हवा में घुला ज़हर लगता है किसको दें आवाज़ यहां अब, दुश्मन सारा शहर लगता है जब से छूटा साथ तुम्हारा, लंबा बहुत सफर लगता है मिलना तो चाहता हूँ तुमसे, पर...

  • गजल

    गजल

    कोशिश कर भी लो आदत खानदानी नहीं जाती, चोर चोरी से जाए पर बेईमानी नहीं जाती, खज़ाने खत्म हुए सारे जागीरें लुट गईं लेकिन, मिजाज़ों से अब भी उनके सुल्तानी नहीं जाती, पा सकते थे हम...

  • गजल

    गजल

    दो जवाँ दिलों का ग़म दूरियाँ समझती हैं कौन याद करता है हिचकियाँ समझती हैं तुम तो ख़ुद ही क़ातिल हो, तुम ये बात क्या जानो, क्यों हुआ मैं दीवाना बेड़ियाँ समझती हैं बाम से उतरती...


  • गजल

    गजल

    ज़ख्मी जब भी ईमान होता है, सब्र का इम्तिहान होता है सच का साथी नहीं यहां कोई, मुखालिफ ये जहान होता है जब भी आहट ज़रा सी होती है, मुझको तेरा गुमान होता है अलग दुनिया...

  • खबर ही ना हुई

    खबर ही ना हुई

    किस्सा कब हो गया तमाम खबर ही ना हुई कितने रह गए अधूरे काम खबर ही ना हुई मैं रोज़मर्रा के मसाइल में उलझा ही रह गया ढली कब ज़िंदगी की शाम खबर ही ना हुई...

  • गजल

    गजल

    हक में बेकसूरों के गवाही कौन पढ़ता है, यहां चेहरों पे लिखी बेगुनाही कौन पढ़ता है, यहाँ अखबार बिकते हैं चंद तस्वीरों की खातिर, ये कागज़ पर जो फैली है स्याही कौन पढ़ता है, बिना दस्तक...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    खामोशियाँ बोलें तो सुनने का मज़ा कुछ और है दर्द-ए-दिल चुपचाप सहने का मज़ा कुछ और है तैरना लाज़िम है माना पार जाने के लिए पर नदी के साथ बहने का मज़ा कुछ और है ये...