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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ज़रा सी बात में पूरी कहानी ढूँढ लेती है, मुहब्बत हो या नफरत इक निशानी ढूँढ लेती है नज़र कमजोर हो जाए चाहे जितनी बुजुर्गों की, नए किस्सों में पर बातें पुरानी ढूँढ लेती है सहलाती...

  • मानवता हो गयी मरणासन्न

    मानवता हो गयी मरणासन्न

    दिल्ली में हुए शर्मनाक कांड पर दिल में उत्पन्न हुए आक्रोश से निकली कुछ पंक्तियाँ :- मानवता हो गई मरणासन्न, लोट रही अंगारों पे, घूम रहे हैं भूखे कुत्ते, गलियों में, बाज़ारों में, मेरे देश में...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ज़िंदगी कतरा-कतरा पिघलती रही शाम ढलनी ही थी शाम ढलती रही कुछ ना कहा मैंने लब सिल लिये आँखों के रस्ते हसरत निकलती रही किस्मत में था उसके फक्त इंतज़ार खल्वत-ए-शब में भी शमा जलती रही...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मैं ये जाहिर नहीं करता कि मैं सब याद रखता हूँ पहले भूल जाता था मगर अब याद रखता हूँ भरोसा उठ गया जबसे मेरा इंसानियत पर से महफिल में हर इक बंदे का मजहब याद...

  • अकथ्य मेरी वेदना

    अकथ्य मेरी वेदना

    प्राण पंछी है विकल, असह्य मेरी वेदना मौन मुखरित है प्रिये, अकथ्य मेरी वेदना नीर नैनों में भरे मैं,समुद्र तट की ओर आता जलधि का घनघोर गर्जन, तन में कंपन सा उठाता वेग से बहता प्रभंजन,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कौन ऐसा है जहां में कि जिसे कुछ गम नहीं मुझे तसल्ली देने वाले तेरा दुख भी कम नहीं खुद पे इतराने से पहले देख ले ये भी ज़रा है कौन सी दीवार जिसपे साया-ए-मातम नहीं...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कौन उलझे सवाल कौन करे, चलो छोड़ो बवाल कौन करे गुज़र गई जैसी भी गुज़री, ज़िंदगी का मलाल कौन करे मंज़िल सामने खड़ी है पर, कौन उठे कमाल कौन करे हिज्र ही है नसीब जब अपना,...



  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हम मेहनतकश इंसानों का बस इतना सा अफसाना है, सुबह हुई तो घर से निकले रात हुई घर जाना है दब के ज़रूरत के नीचे दम तोड़ा हर इक ख्वाहिश ने, अब अपने लिए तो जीना...