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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ख्वाहिशें ले के हम हज़ार गए, पर तेरे दर से बेकरार गए तुझे गैरों से ना मिली फुर्सत, हम तुझे मिलने कितनी बार गए चाहा जो ना मिल सका मुझको, यूँ ही बस जिंदगी गुज़ार गए...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

      इस बेदर्द ज़माने में दिल को, दिल से मिलाए कौन, हर कोई गम में डूबा है, गीत खुशी के गाए कौन   इश्क-मुहब्बत की रस्में या, प्यार-वफा की कसमें हों, बर्बादी के रस्ते हैं सब,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ख्वाब क्या ताबीर क्या ये क्या खबर, ज़ुल्फ क्या जंजीर क्या ये क्या खबर दिल की सुनते हैं दिल की कहते हैं, तकरीर क्या तहरीर क्या ये क्या खबर तदबीर से हासिल किया जो भी किया,...

  • गजल

    गजल

    जाने क्या चाहता है मुझसे मुकद्दर मेरा, बनता काम बिगड़ जाता है अक्सर मेरा याद आया मुझे ये आग लगाने के बाद, इसी बस्ती में ही था छोटा सा इक घर मेरा तुझसे मांगा है यही...

  • गजल

    गजल

    रह गई कौन सी कसर आखिर, हुआ तुझपे ना कुछ असर आखिर जल गया धूप में शहर सारा, आई बारिश की ना खबर आखिर जुस्तजू जिसकी थी वो मिल ना सका, कटा तनहा ही ये सफर...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    आंधी मगरूर दरख्तों को पटक जायेगी, सिर्फ वो ही शाख बचेगी जो लचक जायेगी, आसमां छूने का हो जायेगा खुद अंदाजा, जब जमीं पाँव के नीचे से सरक जायेगी — भरत मल्होत्रा परिचय - भरत मल्होत्राMail...

  • गजल

    गजल

    फिर तुझे माहताब लिखूँगा, एक खिलता गुलाब लिखूँगा कहीं तेरा नाम ना पढ़ ले कोई, तुमको आली जनाब लिखूँगा मेरी चाहत के बिखरे पन्नों पर, आज सारा हिसाब लिखूँगा तेरी जुल्फों को घटाएँ लिखकर, तेरी आँखों...

  • गजल

    गजल

    जाने कैसे हमें लग गया मर्ज़ ये है संगीन बहुत, अपनी तबियत थोड़े दिनों से रहती है गमगीन बहुत दीवानों सा हाल हुआ है होश नहीं है अपना अब, इश्क हुआ ना था हमको तब हम...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कायम जिसके दिल में आज भी ईमान रहता है, वो शख्स इस दुनिया में अब परेशान रहता है मजमा लग गया सारे जहां के खबरनवीसों का, अफवाह थी कि इस बस्ती में इक इंसान रहता है...

  • कविता

    कविता

    कवि के अंतर्मन से निकली, कविता भी रूठ जाती है कभी, अपने ही रचयिता से, बिल्कुल उसी तरह जैसे, छोटा सा बच्चा रूठ जाता है, कभी-कभी अपनी माँ से, झूठ-मूठ का, लाड में, पर उस रूठने...