सामाजिक

फ़ेमिनिज़म

महिला सशक्तिकरण ये शब्द ही अपने आप में खोखला नहीं लगता? स्त्रीयों को निर्बल लाचार अबला समझने वाले एक बार नौ महीने 5 किलोग्राम वज़न पेढू पर बाँधकर रखें और नाक के छेद में से नारियल निकालने वाला, जाँघो को चीर देने वाला बच्चे को जन्म देते वक्त होने वाले दर्द से गुज़र कर देखे। फिर […]

लघुकथा

लघुकथा  – बस अब और नहीं

“ओ रज्जो पता लगा लिया किस किसके घर ताज़ा डिलीवरी हुई। किसके घर बेटा हुआ है रे ? चल आज वसूली करने जाते है हाथ बहुत तंग चल रहा है आजकल” कहते हुए किन्नरों की टोली की सरदार गुलाबबानों ने हर एरिया की लिस्ट देखी और बोली “आज एम. जी. रोड़ पर स्पेशल मैं जाती […]

स्वास्थ्य

माहवारी को सहज बनाओ

अगर तेरह चौदह साल की बच्ची को माहवारी शुरू होने से पहले ही सारी समझ दी जाएं तो अचानक से बच्ची के पिरीयड शुरू हो जाने पर घबराएंगी नहीं। माहवारी क्यूँ होती है, कैसे होती है क्या-क्या एहतियात बरतना चाहिए सारी समझ बेटी को देनी चाहिए। माहवारी कहते है जिसे हम ये अभिशाप नहीं वरदान […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

दुन्यावी गतिविधियों को महसूस करो

रेत के चमकीले एक कण में पूरी दुनिया का प्रतिबिम्ब देखने के लिए और एक जंगली फूल में इत्र की खुशबू से लिपटे पहाड़ देखने के लिए अवसाद की मुट्ठी को खोलकर आज़ाद हथेलियों पर अनंत के कणों को पकडना होगा। अगोचर विश्व की गतिविधियों को सुनने के लिए सीने में छुपे मशीन के कान […]

सामाजिक

स्त्री वंदनीय है

संपूर्णता, सुंदरता और कामुकता सिर्फ़ पत्रिकाओं में छपी तस्वीर मात्र है “मैं सच्ची, सही और हल्की सी सुंदर स्त्री हूँ” कोई महान या मूर्ति की ऊँचाई सी रचना  नहीं, नांहि छरहरी कमर वाली ललना.. थोड़ी कमनीय काया और नर्म दिल की मालकिन हूँ, धैर्य और धधकती ज्वाला भी लहलहाती है मुझमें.. प्रेम की परिभाषा, स्पंदन और स्पर्श को बखूबी […]

कविता

एक याद भरी पुरवाई 

सूखे पतझड़ सी पीली पड़ गई मेरी  ज़िंदगी के कैनवास पर नीले पीले सुनहरे गाढ़े रंगो की टशर भरना तुम्हारा मेरी गर्विली गरदन को उपहार देता है.! उदासीन लम्हों में गीत गाती ज़िंदगी का पार्श्व संगीत है तुम्हारी प्रीत.! मेरी कोरी आँखों के भीतर भले ही दर्द का दरिया बहता है एक नज़र तुम्हारी सौ […]

कविता

ऐसा नहीं कि…

एसा नहीं की संवेदना नहीं है इंसान में उन्माद के अतिरेक में जबरदस्ती छटपटाती पड़ी है दिल की संदूक में.! एसा नहीं की विश्वास नहीं है इंसान में स्वार्थ ओर मोह के अड़ाबीड़ जंगल में खो गया है जैसे कोई मासूम बच्चा खो जाता है मेले में.! एसा नहीं की प्यार नहीं है इंसान में […]