सामाजिक

पतंग सी है ज़िंदगी

हम इंसानों की जिह्वा तरंगी, चंचल और ज़िंदगी के हर रंग को जीने की चाह रखने वाली है, किसे पसंद नहीं रंग बिरंगी इन्द्रधनुषी रंग फिर वो चाहे पतंग के हो या ज़िंदगी के। महज़ हल्के कागज़ से बनी पतंग और प्रवाल सी ज़िंदगी में कितनी समानता है, जब पतंग उड़ान भरती छू रही होती […]

सामाजिक

खुद पर खुद शासन करो

क्या शारीरिक अत्याचार ही घरेलू हिंसा कहलाता है ? मानसिक प्रताड़ना का क्या? लगता है कुछ स्त्रियाँ प्रताड़ना सहने के लिए ही पैदा हुई होती है, ऐसी स्त्रियों को पता भी नहीं होता घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के बहुत सारे प्रकार होते है। शारीरिक अत्याचार को ही हिंसा समझने वाली स्त्रियों को मौखिक अत्याचार, लैंगिक अत्याचार […]

सामाजिक

अब स्त्री विमर्श बंद हो

आज इक्कीसवीं सदी में भी कुछ स्त्रियों के प्रति कुछ मर्दों का नज़रिया अट्ठारहवीं सदी वाला ही होता है उनकी नज़रों में स्त्री कम अक्कल, हीनबुद्धी और भोगने की वस्तु मात्र है। क्यूँ आज भी लेखकों की कलम बार-बार स्त्री विमर्श में लिखने को मजबूर होती है। आज भी स्त्रियों के लिए पन्ने भर-भरकर लिखा […]

सामाजिक

समय बदला हम कब बदलेंगे

अनमना सबकी नफ़रत का मारा 2020 का साल भी चला गया, ओर भी कई साल आएंगे चले जाएंगे। वक्त का काम है बदलना दिन महीने साल बदलते रहते है, पुराना छूटता है नयापन सबको पसंद है परिवर्तन संसार का नियम है हर चीज़ में होता रहता है। पर क्या हम बदलते है ? हमारे वाणी, […]

सामाजिक

एक सवाल

एक लड़की और एक लड़का क्या अच्छे दोस्त नहीं हो सकते ? प्यार, इश्क, मोहब्बत से परे भी क्या एक लड़की और लड़के के बीच या एक औरत और मर्द के बीच दोस्ती का रिश्ता भी हो सकता है? ये सवाल शायद सदियों से प्रश्नार्थ चिन्ह लिए खड़ा है। आज इक्कीसवीं सदी में भी हम […]

सामाजिक

क्या सच में मिल रहे है सबको ये अधिकार

10 दिसंबर पूरी दुनिया में मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। 11948 को संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा ने संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकारों की विश्वव्यापी घोषणा को अंगीकृत किया गया। जिसमें विचार, विवेक, धर्म, स्वतंत्रता तथा कहीं भी सभा आयोजन से लेकर सरकार बनाने तक के अधिकारों की जोगवाई मानव अधिकार कानून के […]

सामाजिक

संयम ओर सहनशीलता का मतलब ? 

“खुद के ही विरुद्ध युद्ध” कभी कभी संयम और सहनशीलता को कमज़ोरी की श्रेणी में रख दिया जाता है। हमारे मौन का मतलब लोग कुछ ओर ही निकाल लेते है और हमारे अस्तित्व के उपर प्रश्नार्थ लगा लेते है। अगर आप सही हो तो सच को चिल्ला चिल्ला कर बोलो संयम इंसान को अंदर ही […]

कहानी

आत्मसम्मान

अस्पताल में अफ़रा तफ़री मच गई एक्सिडेंट में बहुत बुरी तरह ज़ख़्मी कोई पेशन्ट आया था। दीप्ति ने देखा वो पेशन्ट शशांक था जिससे दीप्ति कभी बेइन्तहाँ प्यार करती थी, अपनी जान से ज़्यादा चाहती थी। बेशक शशांक को इस हालत में देखकर दीप्ति का दिल चर्रा उठा पर लहू-लुहान पूरी तरह से ज़ख़्मी शशांक […]

कविता

रिश्तों को संभालो

देखो कहीं दरख़्त ना बन जाए दूरियाँ, मिलते रहो यक ब यक की कहीं अन्जान न बन जाए एक दूसरे का चेहरा। नाप तोल कर वस्तुएं ली दी जाती है रिश्ते नहीं जनाब अपनेपन पर ये कैसा है पहरा। सुस्ताए रिश्ते को संभाल लो ज़रा कहीं अहं के चलते अनमनेपन का गड्ढा बन  ना जाएं […]

कहानी

अंधविश्वास

इक्कीसवीं सदी की पढ़ी लिखी तेज़ तर्रार लड़की रिया आसमान में उड़ रही थी जैसा सोच रखा था वैसा ही ससुराल पाया था। सुखी संपन्न और सबसे महत्वपूर्ण घर के सारे लोग पढ़े लिखे और प्रबुद्ध है। रिया का मानना था की पढ़े लिखे लोगों से तालमेल बिठाना सहज हो जाता है। मानसिक खटराग नहीं […]