गीत/नवगीत

कविता – पंक्षी कही ठहरा गए हैं

आज नभ में उड़ान भरते पंक्षी कहीं ठहरा गये हैं हम तरसते रहे उम्र भर आज भीे दोहरा गये हैं कि दिन भी वो क्या थे हमारे रोज मिलना रोज बिछड़ना एक पलड़ा हल्का है तो उस पर सामान रखना प्रेम हासिल न हुआ पर आभार क्यों ठुकरा गये हैं आज नभ में उड़ान भरते […]