Author :

  • मैं पानी हूँ

    मैं पानी हूँ

    “क्या… समझ रखा है… मुझे? मर्द हूँ… इसलिए नीट पीता हूँ… मरद हूँ… मुरद…आ” ऐसे ही बड़बड़ाते हुए वह सो गया. रोज़ की तरह ही घरवालों के समझाने के बावजूद भी वह बिना पानी मिलाये बहुत...

  • शह की संतान

    शह की संतान

    तेज़ चाल से चलते हुए काउंसलर और डॉक्टर दोनों ही लगभग एक साथ बाल सुधारगृह के कमरे में पहुंचे। वहां एक कोने में अकेला खड़ा वह लड़का दीवार थामे कांप रहा था। डॉक्टर ने उस लड़के...






  • नफरत

    नफरत

    दीवारें नफरत के घरोंदों की अक्सर बनी होती हैं उन शब्दों की ईंटों से जो पकने से पहले ही गिर जाती हैं किसी की उम्मीदों के बहते पानी में। उछलती हुई बूँदें जब बिखर जाती हैं...


  • गायब हुए गाँधीजी

    गायब हुए गाँधीजी

    एक दिन नोटों में से गांधीजी गायब हो गए, नोटों की वैधता समाप्त हो गयी। राजनेता परेशान, रिज़र्व बैंक परेशान, पुलिस परेशान… और जनता, उसे कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि एक भावनात्मक भाषण में राष्ट्रप्रेम के...