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  • जानवरीयत

    जानवरीयत

    वृद्धाश्रम के दरवाज़े से बाहर निकलते ही उसे किसी कमी का अहसास हुआ, उसने दोनों हाथों से अपने चेहरे को टटोला और फिर पीछे पलट कर खोजी आँखों से वृद्धाश्रम के अंदर पड़ताल करने लगा। उसकी...

  • छुआछूत

    छुआछूत

    ‘अ’ पहली बार अपने दोस्त ‘ब’ के घर गया, वहां देखकर उसने कहा,  “तुम्हारा घर कितना शानदार है – साफ और चमकदार” “सरकार ने दिया है, पुरखों ने जितना अस्पृश्यता को सहा है, उसके मुकाबले में...

  • मैं पानी हूँ

    मैं पानी हूँ

    “क्या… समझ रखा है… मुझे? मर्द हूँ… इसलिए नीट पीता हूँ… मरद हूँ… मुरद…आ” ऐसे ही बड़बड़ाते हुए वह सो गया. रोज़ की तरह ही घरवालों के समझाने के बावजूद भी वह बिना पानी मिलाये बहुत...

  • शह की संतान

    शह की संतान

    तेज़ चाल से चलते हुए काउंसलर और डॉक्टर दोनों ही लगभग एक साथ बाल सुधारगृह के कमरे में पहुंचे। वहां एक कोने में अकेला खड़ा वह लड़का दीवार थामे कांप रहा था। डॉक्टर ने उस लड़के...






  • नफरत

    नफरत

    दीवारें नफरत के घरोंदों की अक्सर बनी होती हैं उन शब्दों की ईंटों से जो पकने से पहले ही गिर जाती हैं किसी की उम्मीदों के बहते पानी में। उछलती हुई बूँदें जब बिखर जाती हैं...