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  • आपका दिन

    “मैं केक नहीं काटूँगी।” उसने यह शब्द कहे तो थे सहज अंदाज में, लेकिन सुनते ही पूरे घर में झिलमिलाती रोशनी ज्यों गतिहीन सी हो गयी। उसका अठारहवाँ जन्मदिन मना रहे परिवारजनों, दोस्तों, आस-पड़ौसियों और नाते-रिश्तेदारों...



  • स्त्री

    स्त्री

    अपने सपनों में से अपनों के सपनों को बीन-बीन कर निकालती है। स्त्री कुछ ऐसी ही रची गयी जिन पे छत टिकी, उन दीवारों को संभालती है।   कहाँ गिने हैं दिन अपनी उम्र के उसने...

  • गर्व

    गर्व

    पूरे देश की जनता के रक्त में उबाल आ रहा था। एक आतंकवादी ने 200 किलोग्राम विस्फोटक एक कार में रखकर सेना के जवानों से भरी बस से वह कार टकरा दी और देश के 40...