सामाजिक

अस्सी पार, जोश अपार

एक ओर जहाँ अधिकांश बुजुर्ग रिटायरमेंट के बाद केवल और केवल टाईमपास के लिए ब्रह्माण्ड भर की चर्चाओं में व्यस्त रहा करते हैं, पाटों, पेढ़ियों, चौपालों और कई जगहों पर चर्चाओं में रमे हुए नज़र आते हैं वहीं ताजिन्दगी कर्मयोग और मानव शरीर से सेवा का भाव अपनाने का संकल्प लिए हुए खूब सारे व्यक्तित्व […]

राजनीति

आधी आबादी के लिए गूंज रहा आत्मनिर्भरता का पैगाम

महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन की बदौलत पारिवारिक खुशहाली एवं सामाजिक विकास में महिलाओं की भागीदारी का ग्राफ निरन्तर ऊँचाइयां प्राप्त करने की ओर अग्रसर है। इस दिशा में महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी महिलाओं को विकास के अवसरों का […]

इतिहास

नेताजी तो एक ही थे – सुभाषचन्द्र बोस

जहां कहीं नेताजी शब्द सामने आता है। हमारी कल्पनाओं में एक ही चित्र उभरकर सामने आता है और वह है नेताजी सुभाषचन्द्र बोस। सुभाष बोस के आगे एक बार लग गया नेताजी का शब्द अतने अधिक उच्चतम शिखर और अपार ऊर्जाओं का बोध कराता है कि इनके सामने बाकी सारे फीके पड़ जाते हैं। नेताजी […]

सामाजिक

छातीकूटिए अमर रहें

दुनिया की आबादी का काफी हिस्सा औरों के सुख से दुःखी तथा औरों के दुःख से सुखी रहने वाले लोगों से भरा पड़ा है। भगवान का दिया हुआ इनके पास सब कुछ है, कहीं किसी चीज की कोई कमी नहीं है फिर भी दुःखी हैं, हमेशा अपने दुःखों, पीड़ाओं और अनमनेपन का जिक्र करते हुए […]

सामाजिक

निरंकुश अभिव्यक्ति की आपदा

अभिव्यक्ति और दस्तावेजीकरण अब उस युग में पहुंच चुके हैं जहाँ इनकी अपार संभावनाएं और प्रचुर माध्यम उपलब्ध हैं। इनका जी भर कर और जम कर उपयोग हो रहा है। बिना किसी रोक-टोक और सीमा के बोला भी जा रहा है, लिखा भी जा रहा है, और परोसा भी जा रहा है। अब सब तरफ […]

सामाजिक

जैसे हैं, वैसे ही रहें भी, और दिखें भी

जो हम हैं वह हैं ही, यह हमारी मौलिकता ही है कि हम ‘हम’ हैं। परमात्मा ने जैसा शरीर, मन और बुद्धि प्रदान की है उसी के अनुरूप साँचे में ढले हुए हैं। जैसे भी हम हैं वैसे हैं क्योंकि दुनिया में भगवान ने हर व्यक्ति को अलग मौलिक स्वरूप और गुणधर्म प्रदान किया है। […]